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गांधी जयंती पर दुकानों पर नहीं चलेगा QR कोड: 15 अक्टूबर से लागू होने वाले MDR शुल्क के खिलाफ देशभर के व्यापारियों का बड़ा ऐलान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

No UPI Day 2 October: अगर आप भी सुबह की दूध-सब्जी से लेकर कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी तक के लिए मोबाइल निकालकर तुरंत QR कोड स्कैन करने के आदी हैं, तो आने वाली 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को थोड़ी सतर्कता बरतनी होगी।

इस दिन यदि आप बाजार खरीदारी करने निकल रहे हैं, तो अपने बटुए में नकद पैसे या एटीएम कार्ड रखना न भूलें।

देश के प्रमुख व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ के रूप में मनाने का फैसला किया है, जिसके तहत दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर डिजिटल UPI पेमेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मध्य प्रदेश से शुरू हुई विरोध की लहर

इस आंदोलन की शुरुआत मध्य प्रदेश से हुई।

बीते 23 सितंबर को राज्य की राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई प्रमुख शहरों में लगभग 125 व्यापारी संगठनों ने एक दिन का ‘नो यूपीआई डे’ आयोजित किया था।

इस सांकेतिक विरोध के कारण प्रदेश भर में करीब 25 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुआ था।

मध्य प्रदेश में मिले भारी समर्थन के बाद अब यह विरोध पूरे देश में फैल चुका है।

‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल’ (FAIVM) और ‘कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ (CAIT) जैसे राष्ट्रीय स्तर के बड़े व्यापारी संगठनों के अलावा पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन और महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स (MACCIA) भी इस आंदोलन में पूरी तरह शामिल हो गए हैं।

इंदौर के गारमेंट्स एसोसिएशन ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि यदि 15 अक्टूबर से पहले इस नियम को वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी अपने UPI QR कोड वाली मशीनों को पानी में बहा देंगे।

आखिर क्यों नाराज हैं व्यापारी?

व्यापारियों और दुकानदारों के इस बड़े गुस्से की मुख्य वजह सरकार द्वारा UPI ट्रांजैक्शन पर लागू किया जाने वाला 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग फीस है।

व्यापारियों का कहना है कि किराना, अनाज, पेट्रोल-डीजल, गारमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों में उनका शुद्ध मुनाफा (Profit Margin) पहले से ही बहुत सीमित होता है।

ऐसे में अगर सरकार या बैंक बड़े भुगतानों पर 0.4% का नया MDR चार्ज काटेंगे, तो उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा इसी शुल्क में चला जाएगा।

व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को बढ़ावा देने के नाम पर अब छोटे-बड़े दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

क्या है यह MDR और कैसे काम करेंगे नए नियम?

जब भी कोई ग्राहक अपने मोबाइल ऐप से किसी दुकान का QR कोड स्कैन करके पेमेंट करता है, तो वह पैसा सुरक्षित रूप से ग्राहक के बैंक खाते से निकलकर व्यापारी के खाते में जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए बैंक, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर काम करते हैं।

इसी डिजिटल नेटवर्क को मेंटेन करने के खर्च को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कहा जाता है।

नए नियम की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

* लागू होने की तिथि: MDR का यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है।

 * न्यूनतम सीमा: 0.4% का यह शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक के पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर ही लागू होगा।

 * शुल्क की दर: योग्य व्यावसायिक भुगतानों पर 0.40% के हिसाब से कटौती की जाएगी।

 * अधिकतम सीमा (Cap): MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। यानी यदि कोई ग्राहक ₹75,000 से लेकर ₹10 लाख तक का भी भुगतान करता है, तो दुकानदार से अधिकतम ₹300 ही शुल्क के रूप में काटा जाएगा।

 * आम जनता पर असर: सरकार और NPCI के स्पष्ट निर्देश हैं कि यह शुल्क केवल व्यापारी को देना होगा, ग्राहक पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा और न ही कोई दुकानदार इसे ग्राहक के बिल में जोड़ सकता है। इसके अलावा व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ़्त रहेंगे

किन-किन बड़े संगठनों का मिला है समर्थन?

महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने स्पष्ट किया है कि 2 अक्टूबर को महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी कारोबारी ऑनलाइन भुगतान लेने से परहेज करेंगे।

MACCIA से जुड़े करीब 500 व्यापारिक संगठन जल्द ही इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

इस आंदोलन को निम्नलिखित राष्ट्रीय व क्षेत्रीय व्यापारी संघों का पूर्ण समर्थन मिल चुका है:

 * फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA)

 * ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF)

 * ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA)

 * ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF)

 * अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ (AIEOTF)

 * ऑल इंडिया पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन

2 अक्टूबर को होने वाले इस एक दिवसीय नो UPI डे के माध्यम से व्यापारी संगठन सरकार तक अपना कड़ा संदेश पहुंचाना चाहते हैं, ताकि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस फैसले पर पुनर्विचार किया जा सके।

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