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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: SIR पूरे हो चुके राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन के फॉर्म-6 से हटी अतिरिक्त घोषणा पत्र की शर्त

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Voter ID Form 6 update: देश में मतदाता सूची को अपडेट करने और पारदर्शी बनाने की दिशा में भारत चुनाव आयोग (ECI) ने एक अहम बदलाव किया है।

चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक पोर्टल ECINET पर नए वोटर आईडी कार्ड के आवेदन में इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-6’ से वह अतिरिक्त घोषणा पत्र (Declaration) हटा दिया है, जिसमें आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी के 2003 के वोटर रिकॉर्ड की जानकारी देनी होती थी।

यह राहत उन राज्यों के नए वोटरों को मिली है जहाँ ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है।

हालाँकि, जिन राज्यों में वर्तमान में SIR की प्रक्रिया जारी है, वहाँ फॉर्म-6 में यह घोषणा पत्र अभी भी अनिवार्य बना रहेगा।

क्या था यह अतिरिक्त घोषणा पत्र और क्यों हटाया गया?

हाल ही में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-6 में एक नई शर्त जोड़ी थी।

इसके तहत नए वोटर बनने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह बताना पड़ता था कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में शामिल था या नहीं।

चुनाव आयोग का कहना है कि जिन राज्यों में SIR का पहला और दूसरा चरण पूरा हो चुका है, वहाँ मतदाता सूची का संपूर्ण भौतिक सत्यापन (Verification) और पुराने रिकॉर्ड्स से मिलान का काम पहले ही किया जा चुका है।

ऐसे में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए मतदाताओं से पुरानी वंशावली या 2003 के वोटर रिकॉर्ड का विवरण माँगना गैर-जरूरी पाया गया। इससे नए आवेदकों के लिए प्रक्रिया अधिक सरल हो जाएगी।

वहीं, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है, वहाँ पुराने रिकॉर्ड्स से मिलान करने के उद्देश्य से इस घोषणा पत्र को फिलहाल जारी रखा गया है।

जैसे ही उन राज्यों में भी पुनरीक्षण का काम खत्म होगा, वहाँ से भी इसे हटा दिया जाएगा।

दो चुनाव आयुक्तों ने जताया था कड़ा ऐतराज

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के इस फैसले के पीछे आंतरिक मतभेद भी सामने आए थे।

चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म-6 में बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए यह अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ने पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की थी।

चुनाव आयुक्त विवेक जोशी का रुख था कि फॉर्म-6 एक तय वैधानिक (Statutory) फॉर्म है, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत नियमों द्वारा निर्धारित है।

इसमें कोई भी नया खंड या सवाल जोड़ने से पहले संबंधित नियमों में औपचारिक संशोधन करना अनिवार्य था, जो कि नहीं किया गया।

वहीं, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़े गए इस हिस्से को ‘अनधिकृत और गैर-कानूनी’ करार दिया था और इसे तुरंत हटाए जाने की मांग की थी।

इन्हीं आपत्तियों और प्रशासनिक समीक्षा के बाद चुनाव आयोग ने ECINET पोर्टल से इस घोषणा पत्र को हटाने का कदम उठाया।

देश में SIR का दायरा और चुनावी परिदृश्य

चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के पहले और दूसरे चरण में कुल 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों का काम पूरा किया जा चुका है।

वर्तमान में SIR का तीसरा चरण जारी है, जिसकी घोषणा आयोग ने 14 मई को की थी।

इस तीसरे चरण के अंतर्गत दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर समेत कुल 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

यह तीसरा चरण 30 मई से शुरू होकर 23 दिसंबर तक संचालित किया जा रहा है। इस दौरान देश भर के लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं के विवरणों का घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इस चरण के अंतर्गत आने वाले पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर जैसे राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जबकि अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव प्रस्तावित हैं।

संक्षेप में समझिए बदलाव का प्रभाव

* सरल आवेदन प्रक्रिया: SIR पूरा हो चुके राज्यों में युवाओं के लिए नए वोटर कार्ड हेतु आवेदन करना अब ज्यादा आसान होगा।

 * कागजी झंझट से मुक्ति: आवेदकों को अब 2003 के पुराने पारिवारिक वोटर रिकॉर्ड ढूंढने की आवश्यकता नहीं होगी।

 * समान व्यवस्था: धीरे-धीरे सभी राज्यों में SIR का कार्य खत्म होने के बाद यह नई व्यवस्था पूरे देश में लागू हो जाएगी।

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