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कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल: प्राचीन यूनानी-रोमन कहानियों को आधुनिक रूप देने के लिए मिला पुरस्कार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Anne Carson Nobel Literature 2026: वर्ष 2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो गई है।

इस बार यह प्रतिष्ठित सम्मान कनाडा की मशहूर कवयित्री और लेखिका ऐन कार्सन को दिया गया है।

स्वीडिश अकादमी ने उनके अनोखे लेखन के लिए यह सम्मान दिया है।

कार्सन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे हजारों साल पुराने ग्रीक और रोमन साहित्य को आज की आधुनिक दुनिया, इंसानी रिश्तों, प्यार और दुख से बड़ी खूबसूरती के साथ जोड़ती हैं।

नोबेल समिति के अनुसार, कार्सन केवल पुरानी कहानियों को दोहराती नहीं हैं, बल्कि अपनी दूरदर्शी सोच और कल्पना से उनमें आज के दौर की भावनाएं उड़ेल देती हैं।

उनकी लिखी किताबों में कविता, कहानी और निबंध जैसी विधाओं का अंतर खत्म हो जाता है, जिससे उनका लेखन दुनिया भर के पाठकों और साहित्य प्रेमियों के लिए बेहद अलग और खास बन जाता है।

कौन हैं ऐन कार्सन?

ऐन कार्सन का जन्म वर्ष 1950 में कनाडा के टोरंटो शहर में हुआ था। शुरुआत से ही उनकी रुचि प्राचीन साहित्य में थी।

उन्होंने ग्रीक और रोमन साहित्य की पढ़ाई की और 1981 में इसी विषय पर अपनी डॉक्टरेट की थीसिस पूरी की।

उनके पास न केवल प्राचीन भाषा और साहित्य का गहरा ज्ञान है, बल्कि वे उस जटिल साहित्य को बहुत ही सहज और दिल को छू लेने वाली भाषा में ढालने में माहिर हैं।

एक राक्षस को बनाया संवेदनशील युवक

ऐन कार्सन की सबसे चर्चित किताबों में से एक है ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड: ए नॉवेल इन वर्स’, जो 1998 में प्रकाशित हुई थी।

यह किताब हजारों साल पुरानी यूनानी पौराणिक कथा पर आधारित है।

मूल कथा में ‘गेरियोन’ नाम का एक पंखों वाला लाल राक्षस होता है, जिसे केवल एक क्रूर जीव माना जाता था। लेकिन कार्सन ने अपनी सोच से इस मिथक को पूरी तरह बदल दिया।

उन्होंने अपनी किताब में गेरियोन को एक राक्षस के रूप में नहीं, बल्कि अपनी मां से बेहद प्यार करने वाले और भावनात्मक रूप से संवेदनशील युवक के रूप में दिखाया।

इस तरह उन्होंने एक बहुत पुरानी पौराणिक कहानी को प्यार, हिंसा, बिखराव और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया।

कार्सन की 2 अन्य चर्चित पुस्तकें

 * द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड (2001):

यह किताब एक ऐसे शादीशुदा रिश्ते की कहानी पेश करती है, जिसमें पति अपनी पत्नी को धोखा देता है।

कार्सन ने इस दास्तान को 29 अलग-अलग हिस्सों में बांटा है।

इस किताब की एक अनोखी बात यह है कि इसका हर हिस्सा मशहूर कवि जॉन कीट्स की कविता की पंक्तियों से शुरू होता है।

* नॉक्स (2010): यह किताब कार्सन के निजी जीवन के एक गहरे दुख से जुड़ी है। इसे उन्होंने अपने भाई माइकल की याद में लिखा था।

माइकल वर्ष 2000 में अपने परिवार से दूर डेनमार्क में रहस्यमय परिस्थितियों में चले गए थे, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।

इस किताब में भाई को खोने का दर्द और पुरानी यादों का लेखा-जोखा है।

पिछले 10 सालों में साहित्य नोबेल का रुझान

अगर पिछले एक दशक के नोबेल इतिहास पर नजर डालें, तो पिछले 10 वर्षों में कुल 10 लेखकों को यह पुरस्कार मिला है, जिनमें से 5 महिलाएं शामिल हैं।

इन 10 विजेताओं में से 6 ने अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में लिखा, जबकि 6 विजेता यूरोपीय देशों से रहे।

वर्ष 2024 में दक्षिण कोरिया की लेखिका हान कांग ने एशिया से यह सम्मान जीता था।

हालांकि, पिछले कुछ दशकों में दक्षिण एशिया से किसी लेखक को यह पुरस्कार नहीं मिला है।

कैसे चुना जाता है नोबेल विजेता?

साहित्य नोबेल चुनने की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और गोपनीय होती है:

* स्वीडिश अकादमी हर साल दुनिया भर के प्रोफेसरों, पूर्व नोबेल विजेताओं और साहित्य संस्थाओं के प्रमुखों से नामांकन मंगाती है। लेखक स्वयं का नाम प्रस्तावित नहीं कर सकते।

 * नोबेल समिति शुरू में लगभग 15 से 20 लेखकों की सूची तैयार करती है, जिसे मई तक घटाकर 5 मुख्य उम्मीदवारों तक सीमित कर दिया जाता है।

 * इसके बाद स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य गुप्त मतदान (वोटिंग) के माध्यम से विजेता का फैसला करते हैं।

50 साल तक गुप्त रहती है नामांकनों की सूची

स्वीडिश अकादमी नोबेल के लिए नामांकित लेखकों की कोई भी सूची (लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट) सार्वजनिक नहीं करती।

कौन सा लेखक नामांकित हुआ था, यह जानकारी 50 सालों तक पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

इसलिए, वर्ष 2026 के नोबेल नामांकनों की पूरी जानकारी वर्ष 2076 में ही सामने आ सकेगी।

नोबेल के ऐतिहासिक दस्तावेजों से पता चलता है कि पूर्व में भारत से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंदो, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आर. के. नारायण जैसे महान विचारकों और साहित्यकारों को भी साहित्य नोबेल के लिए नामांकित किया जा चुका है।

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