RSS Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नागपुर स्थित अपने मुख्यालय में हर साल की तरह इस बार भी पूरे पारंपरिक और उत्साह के साथ विजयादशमी उत्सव मनाया।
साल 1925 में इसी पावन दिन विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की स्थापना हुई थी।
इस साल के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन करने के बाद देश को संबोधित किया।
अपने इस मुख्य संबोधन में उन्होंने देश और दुनिया के वर्तमान हालातों, आंतरिक सुरक्षा, बाहरी साजिशों, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक (जैसे AI और OTT) के इस्तेमाल पर बहुत ही खुलकर और बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी।

भारत में अस्थिरता फैलाने की साजिश: भागवत
अपने संबोधन के दौरान आरएसएस प्रमुख ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश के भीतर कुछ ऐसी कोशिशें हो रही हैं, जैसी हाल ही में हमने बांग्लादेश और फ्रांस जैसे देशों में देखी हैं।
दुनिया में ऐसी कई छिपी और ताकतवर शक्तियां सक्रिय हैं, जो किसी भी तरह से भारत को आगे बढ़ने से रोकना चाहती हैं और इसे दबाना चाहती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन ताकतों का मुख्य मकसद केवल सरकार या सत्ता बदलना नहीं है, बल्कि देश की व्यवस्था को कमजोर करके वहां अपने हिसाब से कठपुतली या ‘पिट्ठू’ नेताओं को बैठाना है।
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उन्होंने कहा कि देश के कुछ नेता अनजाने में या अपने स्वार्थ के चलते इस प्रकार की विघटनकारी ताकतों और देश को तोड़ने वाले लोगों की मदद कर रहे हैं।
भागवत ने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि हमें इन साजिशों को समझकर पूरी तरह सतर्क रहना होगा।

सत्ता परिवर्तन से नहीं बदलते हालात
पश्चिम से चल रही हवाओं और उथल-पुथल का जिक्र करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि आज कल एक नया चलन चल पड़ा है कि केवल ‘रिजीम चेंज’ यानी सरकार बदल देने से ही सारे हालात अपने आप ठीक हो जाएंगे।
लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसा कभी नहीं हुआ है। सिर्फ सत्ता या चेहरे बदलने से बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं होतीं।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत ने जिस मजबूत और पक्की नीति के साथ देश का नेतृत्व किया है और जिस प्रकार हमारी नई पीढ़ी ने अपने पुरुषार्थ का परिचय दिया है, उससे भारत विरोधी ताकतों के सारे खेल अपने आप बंद हो गए हैं।
यही वजह है कि आज ये ताकतें भारत को अपना मुख्य निशाना बना रही हैं।

आंदोलनों का उद्देश्य समाधान हो, राजनीति का अखाड़ा नहीं
समाज में उठने वाले विभिन्न मुद्दों और आंदोलनों पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि समस्याएं हर समाज में होती हैं और उन्हीं के कारण आंदोलन भी जन्म लेते हैं।
लेकिन किसी भी आंदोलन का मूल उद्देश्य हमेशा समस्याओं का सही समाधान निकालना होना चाहिए, न कि समाज के अंदर आपसी द्वेष, कलह और विभाजन पैदा करना।
उन्होंने अफसोस जताया कि आज के समय में कई बार आंदोलनों का गलत इस्तेमाल किया जाता है और वे आम जनता की भलाई के बजाय विशुद्ध रूप से राजनीति का साधन बन जाते हैं।
केवल नेता देश या समाज को नहीं चलाते, बल्कि समाज की अपनी सक्रियता और समझदारी से ही बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान निकलता है।

एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत: इतिहास से सीख
देश के इतिहास और विभाजन के दर्द को याद करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि यदि हम सभी देशवासी आपसी एकता के मजबूत सूत्र में बंधे रहेंगे, तो दुनिया की कोई भी ताकत हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
उन्होंने अंग्रेजों के समय का उदाहरण देते हुए बताया कि लॉर्ड कर्जन ने हिंदू और मुसलमान के नाम पर बंगाल का विभाजन करने की कोशिश की थी, लेकिन देश के कड़े विरोध के चलते मात्र चार साल के भीतर ही उन्हें वह फैसला वापस लेना पड़ा था।
इसके विपरीत, साल 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका।
इसका मुख्य कारण यह था कि लोगों के मन में यह भावना घर कर चुकी थी कि जो लोग अलग दिखते हैं या जिनकी जीवनशैली अलग है, वे देश से भी पूरी तरह अलग हैं।
तुष्टिकरण की राजनीति ने हमेशा ऐसी मानसिकता को बढ़ावा दिया है। उन्होंने अपील की कि हमें अपने छोटे-छोटे अहंकार और व्यक्तिगत मतभेदों को छोड़कर केवल देशहित के लिए जीना चाहिए।

विकास ऐसा हो जो प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए
आज के आधुनिक विकास और तकनीकी प्रगति पर बात करते हुए मोहन भागवत ने नेपाल की हालिया बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए विज्ञान, तकनीक और इंडस्ट्री को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, लेकिन यह सब करते वक्त हमें यह ध्यान रखना होगा कि इससे हमारी प्रकृति और पर्यावरण को कोई भारी नुकसान न पहुंचे।
विकास का सही पैमाना वही है जिसमें इकॉनमी (अर्थव्यवस्था), इकोलॉजी (पर्यावरण) और एथिक्स (नैतिकता) तीनों का बेहतरीन संतुलन बना रहे।
विकास ऐसा नहीं होना चाहिए कि विकास करने वाला इंसान ही सुरक्षित न बचे।

OTT और AI के दौर में विवेक जरूरी
आज की डिजिटल दुनिया और नई तकनीक पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि आज के समय में नई पीढ़ी के पास सूचनाओं और जानकारियों का अंबार है।
इंटरनेट, सोशल मीडिया और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर हर तरह का कंटेंट उपलब्ध है।
बिना यह समझे कि क्या सही है और क्या गलत, किसी भी चीज का आंख मूंदकर इस्तेमाल करना समाज और युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए भी देश में स्पष्ट और कड़े नियम तय होने चाहिए, जिस पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक का सही दिशा में इस्तेमाल करना आज की सबसे बड़ी मांग है।

कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों की रही मौजूदगी
नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित इस भव्य विजयादशमी उत्सव में कई देश-विदेश के और देश के दिग्गज नेता शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ उपस्थित रहे।
इसके अलावा इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इस गरिमामयी समारोह के गवाह बने।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने पारंपरिक पथ संचलन और अनुशासन का परिचय देते हुए मार्च निकाला।
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