Europe protests 2026: इन दिनों यूरोप के छह प्रमुख देशों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
पढ़ाई का बढ़ता खर्च, बेरोजगारी, कम वेतन और आसमान छूते मकानों के किराए के खिलाफ आम जनता और छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है।
फ्रांस, इटली, स्पेन, ग्रीस, बेल्जियम और अल्बानिया में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, जो कई जगहों पर हिंसक भी हो चुके हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाया है, तो वहीं पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ तीखी झड़पें भी देखने को मिली हैं।

आइए जानते हैं कि यूरोप के इन देशों में आखिर क्यों सुलग रही है आग और क्या हैं इसके मुख्य कारण।
1. फ्रांस: 140 शहरों में महा-आंदोलन, 1800 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
फ्रांस में हालात सबसे ज्यादा बेकाबू होते नजर आ रहे हैं।
यहाँ स्कूलों की खराब हालत, शिक्षकों की भारी कमी और देश में लगातार बढ़ रही महंगाई के विरोध में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
बड़ा प्रदर्शन और हिंसक झड़पें:
बीते 17 अक्टूबर को फ्रांस के करीब 140 शहरों में जोरदार प्रदर्शन हुए, जिसमें लगभग 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे।
इस आंदोलन में छात्र संगठनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ट्रेड यूनियनों और आम कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया।

पेरिस, मार्सेई और बोर्डो जैसे बड़े शहरों में जमकर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। लीमोज शहर में तो 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग तक लगा दी गई।
बड़ा एक्शन और घायलों के आंकड़े:
18 अक्टूबर तक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लगभग 1800 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरे बवाल में 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी और दमकलकर्मी घायल हुए हैं।
देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि कुछ उपद्रवी तत्वों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का गलत फायदा उठाया है।

2. अल्बानिया: भ्रष्टाचार और महंगी पढ़ाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों में आग
अल्बानिया की राजधानी तिराना समेत पूरे देश में प्रधानमंत्री एदी रामा की नीतियों के खिलाफ पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
* शुरुआत और मुख्य वजह: शुरुआत में यह विरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर की एक लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना को लेकर शुरू हुआ था, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। धीरे-धीरे इसमें भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, विश्वविद्यालयों की बदहाली और महंगी फीस का मुद्दा भी जुड़ गया।
* हिंसा का दौर: 17 अक्टूबर को अल्बानिया में प्रदर्शन पूरी तरह हिंसक हो गए। उग्र भीड़ ने पुलिस पर पेट्रोल बम और पत्थर फेंके। सड़कों पर गाड़ियां और कूड़ेदान जलाए गए।
हालात इतने बिगड़ गए कि प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ कार्यालयों के अलावा बैंकों और डाकघरों को भी आग के हवाले कर दिया।

भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस, पानी की बौछारें और यहां तक कि रबर की गोलियां चलानी पड़ गईं।
3. इटली: महंगाई और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ स्कूलों पर कब्जा
इटली में भी लोग बढ़ती महंगाई, कम वेतन और खराब होती सरकारी सुविधाओं से त्रस्त हैं।
* छात्रों का कब्जा और मिलान का बवाल: इटली में छात्रों ने कई स्कूलों पर कब्जा कर लिया है और वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
17 अक्टूबर को मिलान में महंगाई के खिलाफ निकला मार्च उस वक्त हिंसक हो गया जब कुछ नकाबपोशों ने दुकानों के शीशे तोड़कर सामान लूटना शुरू कर दिया।

सड़कों पर कुर्सियों और मेजों से बैरिकेड लगाकर रास्ते जाम कर दिए गए।
* सरकार की चेतावनी: प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस हिंसा की निंदा करते हुए साफ कहा है कि विरोध जताना सबका अधिकार है, लेकिन शहरों में इस तरह की हिंसा और तोड़फोड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार ने आगामी 30 अक्टूबर को इस मुद्दे पर बड़ी हड़ताल का ऐलान किया है।

4. स्पेन: एक बुजुर्ग महिला को घर से निकाले जाने पर भड़का गुस्सा
स्पेन में मुख्य रूप से आसमान छूते किराए और लोगों को उनके घरों से जबरन बेदखल किए जाने के खिलाफ जोरदार आंदोलन चल रहा है।
* दिल दहलाने वाली घटना: मैड्रिड में 87 साल की मारिकार्मेन अबास्कल को उनके उस घर से निकाल दिया गया, जहाँ वे पिछले 70 सालों से रह रही थीं।
जिस निवेश फंड ने वह मकान खरीदा था, उसने उनका किराया एक झटके में 230% बढ़ाने की मांग कर दी थी।
बुजुर्ग महिला इतना किराया नहीं भर पाईं और बाद में उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने स्पेन के लोगों के मन में गुस्सा भर दिया।

* राजनीतिक असर: अक्टूबर की शुरुआत से ही मैड्रिड समेत 50 से ज्यादा शहरों में हजारों लोग किराए में राहत और बेदखली रोकने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।
बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार को मजबूरन समय से पहले 21 नवंबर को ही नए चुनाव कराने का ऐलान करना पड़ा।
5. ग्रीस: पढ़ाई का खर्च और हॉस्टल की कमी, संसद के बाहर तंबू लगाकर बैठे छात्र
ग्रीस के छात्र और युवा देश में रहने की ऊंची लागत से बुरी तरह परेशान हैं।
* छात्रों का अनोखा विरोध: एथेंस के प्रसिद्ध सिंटाग्मा स्क्वायर में यूनिवर्सिटी के छात्रों ने संसद भवन के सामने ही अपने तंबू गाड़ दिए हैं।
छात्रों का कहना है कि बिजली, पानी, खाना, किराया और पढ़ाई का खर्च इतना बढ़ चुका है कि आम परिवार के बच्चों के लिए पढ़ाई जारी रखना नामुमकिन हो गया है।

भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार से सस्ते हॉस्टल और वित्तीय मदद की मांग कर रहे हैं।
6. बेल्जियम: खर्च घटाने की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब
बेल्जियम में दो मोर्चों पर एक साथ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।
एक तरफ ट्रेड यूनियनें सरकार की आर्थिक नीतियों से नाराज हैं, तो दूसरी तरफ छात्र शिक्षा प्रणाली में किए जा रहे बदलावों का विरोध कर रहे हैं।
* क्यों भड़का आक्रोश: छात्रों को डर है कि सरकार के नए नियमों और शिक्षा बजट में कटौती से पढ़ाई बहुत महंगी हो जाएगी।
वहीं, ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार के बजट सुधारों का सीधा असर कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है।

ब्रुसेल्स में अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों से लेकर 17 अक्टूबर तक लगातार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें, गाड़ियों में आगजनी और प्रदर्शन देखने को मिले हैं।
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