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मध्य प्रदेश में घी के 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल! अनिक, मधुसूदन समेत कई बड़े ब्रांड्स असुरक्षित घोषित

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Unsafe ghee brands in MP: रसोई में इस्तेमाल होने वाला घी आपकी सेहत को फायदा पहुंचा रहा है या चुपचाप नुकसान कर रहा है, यह सवाल इन दिनों मध्य प्रदेश के हर घर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Safety Department) की जांच में राज्यभर से घी के 50 से ज्यादा नमूने असुरक्षित (Unsafe) पाए गए हैं।

रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए बाजार से 42 उत्पादों को वापस मंगाने और 8 उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं।

कौन-से ब्रांड्स आए हैं जांच के दायरे में?

अगर आप या आपके परिवार के लोग बाजार से पैकबंद घी खरीदते हैं, तो यह सूची आपके लिए बेहद जरूरी है।

खाद्य विभाग की जांच में कई लोकप्रिय और जाने-माने ब्रांड्स के नमूने फेल हुए हैं।

असुरक्षित पाए गए उत्पादों की सूची में मुख्य रूप से ये नाम शामिल हैं:

* अनिक घी (Anik Ghee)

* सात्विक केश देसी घी (Satvik Kesh Desi Ghee)

* श्रीमूल एगमार्क शुद्ध घी (Shrimool Agmark Pure Ghee)

* एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी (SRMAI Milk Cream Agmark Ghee)

* अमृत शुद्ध घी, नंद कृष्ण घी और मधुसूदन देसी घी

* देसी गाय का घी संगठन, जवासी काउ देशी घी और संगठन काउ घी

* डेयरी सरस घी, जेबीएस ऑर्गेनिक गाय का घी और खुशबू ब्रांड घी

* गसांता प्रीमियम काउ घी, गुमर योर काउ घी, श्री शुद्ध एगमार्क घी और वास्तु एगमार्क घी

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी ब्रांड्स के अलग-अलग सैंपल जांच में खाने के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिसके बाद से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

जिलों के हिसाब से कहां-किस पर लगी रोक?

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग जिलों में विशेष कार्रवाई की है और स्थानीय स्तर पर बिक्री प्रतिबंधित की है:

* छिंदवाड़ा: यहां पतंजलि काउ घी के एक खास पैक की बिक्री पर रोक लगाई गई है।

* कटनी: जिले में अनिक घी की बिक्री प्रतिबंधित की गई है।

* नर्मदापुरम: यहां संगठन काउ घी की बिक्री रोकी गई है।

* धार: धार जिले में चार बड़े घी उत्पादों पर गाज गिरी है, जिसमें अनिक देसी घी, श्रीमूल घी, एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी और अमृत शुद्ध घी शामिल हैं। इनकी बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है।

* इंदौर: चौंकाने वाली बात यह है कि इंदौर में इस बार सिर्फ घी ही नहीं, बल्कि ‘पीवर इंदौरी लाल मिर्च पाउडर’ की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है, जो यह दिखाता है कि जांच का दायरा सिर्फ घी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खाद्य सामग्रियां भी इसकी जद में हैं।

क्या आपने भी खरीद लिया है यह घी? अब आगे क्या?

इस पूरी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर आपने या आपके परिवार ने पहले ही इन ब्रांड्स का घी खरीदकर खा लिया है, तो आपकी सेहत पर इसका क्या असर पड़ेगा?

खाद्य विभाग ने उपभोक्ताओं से साफ अपील की है कि यदि उनके पास इन सूचियों में शामिल कोई उत्पाद रखा है, तो वे उसका इस्तेमाल बिल्कुल न करें और उसे तुरंत वापस कर दें।

हालांकि, इस बात पर अभी पूरी तरह से पर्दा नहीं उठा है कि इन नमूनों के फेल होने की असल वजह क्या है- क्या इनमें किसी खतरनाक चीज की मिलावट की गई थी या फिर स्टोरेज और क्वालिटी मानकों में कोई भारी कमी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फाइनल और विस्तृत रिपोर्ट नहीं आती, तब तक मिलावट (Adulteration) या अन्य तकनीकी कारणों के बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

जो लोग खा चुके हैं, उनकी सेहत का क्या?

विशेषज्ञों और आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तक सैंपल लिए गए और रिपोर्ट आई, तब तक हजारों लोग इस अनसेफ घी का सेवन कर चुके होंगे।

ऐसे में उन लोगों की सेहत पर जो बुरा असर पड़ सकता है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

फिलहाल इस गंभीर सवाल पर विभाग की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी या खराब खाद्य पदार्थों की जांच की प्रक्रिया इतनी धीमी नहीं होनी चाहिए कि उपभोक्ता उसे खाकर बीमार होने की कगार पर पहुंच जाए।

जांच प्रक्रिया को डिजिटल और तेज करने की मांग लगातार उठ रही है, ताकि समय रहते लोगों की जान और सेहत से खिलवाड़ को रोका जा सके।

संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को ‘जीवन का अधिकार’ देता है, और शुद्ध व सुरक्षित भोजन (Safe Food) इसी अधिकार का एक अहम हिस्सा है।

इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारी रसोई तक पहुंचने वाला हर पैकेटबंद सामान कितना सुरक्षित है, इस पर पैनी नजर रखने के लिए एक पारदर्शी और तेज प्रशासनिक व्यवस्था की सख्त जरूरत है।

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