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साबरमती जेल के हाई-सिक्योरिटी ‘200 खोली’ ब्लॉक में शिफ्ट हुआ लॉरेंस, क्या टाइगर पर हमले के बाद हुआ एक्शन?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Lawrence high security block: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है।

उसे अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘200 खोली’ हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है।

इस विशेष ब्लॉक में साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के खतरनाक आतंकियों समेत देश के कई कुख्यात और गंभीर अपराधों के दोषी बंद हैं।

जानकारी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई पिछले साल यानी 10 मई 2023 से इसी साबरमती जेल में बंद है, लेकिन अब उसकी सुरक्षा और निगरानी के स्तर को पूरी तरह से बदल दिया गया है।

चार हिस्सों में बंटा है नया हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉरेंस को दूसरे कैदियों से पूरी तरह अलग रखने और जेल के अंदर किसी भी तरह की अनहोनी या आपसी मेलजोल को रोकने के लिए ‘200 खोली’ ब्लॉक को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है।

हर एक हिस्से में 50-50 कैदियों को रखा गया है।

लॉरेंस को जिस सेल में रखा गया है, उसका आकार लगभग 7.5×11 फीट का है।

इससे पहले उसे इसी जेल के ’10 खोली’ ब्लॉक में रखा गया था, जहां केवल 10 कैदियों के रहने की क्षमता थी।

लॉरेंस अपने आपराधिक सफर के दौरान दिल्ली की तिहाड़ और पंजाब की कई अलग-अलग जेलों में भी सजा काट चुका है।

 

फोन और बाहरी संपर्कों पर कड़ी पाबंदियां

अधिकारियों का मुख्य मकसद लॉरेंस के आपराधिक नेटवर्क और उसकी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम कसना है।

साल 2023-24 से पहले लॉरेंस पर अक्सर जेल के अंदर से ही फोन के जरिए व्यापारियों को धमकाने और रंगदारी वसूलने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

जेल के अंदर से उसके कई इंटरव्यू और दूसरे गैंगस्टर्स के साथ बातचीत के ऑडियो-वीडियो भी खूब वायरल हुए थे, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी थी।

हालांकि, जांच एजेंसियों का कहना है कि पिछले दो सालों में जेल के भीतर से लॉरेंस का कोई भी सीधा फोन कॉल या बाहरी संपर्क सामने नहीं आया है।

अब उसकी डिजिटल पहुंच और बाहरी दुनिया से कनेक्शन को बेहद सीमित कर दिया गया है।

वह केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की पेशी में शामिल होता है या अपने वकीलों से कानूनी मामलों पर बात करता है।

जेल में ऐसी है दिनचर्या

रिपोर्ट्स बताती हैं कि वह जेल के नियमों का सख्ती से पालन करता है।

वह सुबह उठकर ध्यान (मेडिटेशन) लगाता है, नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, तय दिनों पर व्रत रखता है और पूरी तरह से सात्विक शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करता है।

विदेश से चल रहा है पूरा सिंडिकेट

हालांकि लॉरेंस खुद जेल की सलाखों के पीछे है, लेकिन उसका आपराधिक साम्राज्य थमता नजर नहीं आ रहा है।

जांच में यह बात सामने आई है कि उसका गिरोह अब मुख्य रूप से विदेश से ऑपरेट हो रहा है।

उसके खास सहयोगियों का एक ग्रुप, जिसे रिपोर्ट में ‘शैडो कैबिनेट’ नाम दिया गया है, गैंग के रोजमर्रा के कामकाज और नए युवाओं को जोड़ने का काम संभालता है।

वहीं, दूसरा ग्रुप आपराधिक वारदातों की प्लानिंग, फंडिंग और टारगेट तय करने में जुटा रहता है।

हाल ही में अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) के ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के बाद गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे कई नामी चेहरे अंडरग्राउंड हो गए हैं।

इसके बावजूद, हाल ही में मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित ने ली थी, जिससे साफ है कि जेल के बाहर नेटवर्क अब भी सक्रिय है।

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