Bhutan Glacier Lake Burst: पड़ोसी देश भूटान में कुदरत का एक बड़ा कहर देखने को मिला है।
गुरुवार देर रात भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू ग्लेशियर झील (जिसे शिंताफू तशो भी कहते हैं) अचानक फट गई।
झील के फटने से पानी का एक बहुत बड़ा सैलाब पहाड़ों से नीचे की तरफ बह निकला।
पानी के इस तेज बहाव ने रास्ते में आने वाली हर चीज को तहस-नहस कर दिया।
गनीमत यह रही कि इस आपदा में अभी तक किसी भी जानमाल के नुकसान की कोई आधिकारिक खबर सामने नहीं आई है, लेकिन भूटान से लेकर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक भारी खलबली मच गई है।


भूटान में मची तबाही का मंज़र
वाकिला पर्वत के नीचे बनी शिंताफू झील भूटान की 17 सबसे संवेदनशील और खतरनाक ग्लेशियर झीलों में गिनी जाती है।
गुरुवार शाम को अचानक इस झील का जलस्तर तेजी से बढ़ा और पानी ओवरफ्लो होकर बाहर आने लगा। रात करीब सवा आठ बजे यह बाढ़ का पानी ताकत्सेमाखांग इलाके तक पहुंच गया।
इस भयंकर बहाव के चलते भूटान का मशहूर प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड ‘गासा त्साचु’ पूरी तरह से पानी में डूब गया और वहां बनी कई सुविधाएं तबाह हो गईं।
इसके अलावा पुनाखा-गासा हाईवे का एक बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव और मलबे में बह गया। सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ और मलबा आ जाने के कारण ट्रैफिक पूरी तरह ठप करना पड़ा है।

पुनाखा जिले में किसानों के लिए लगाया गया सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम भी क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे सिंचाई का काम रुक गया है।
शिंगचाला नदी का पानी उफनकर आसपास के गांवों में घुस गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भारत के लिए क्यों बढ़ा खतरा?
भूटान की इस झील से निकला पानी नदियों के रास्ते बहते हुए भारत तक पहुंच सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
* पानी का रूट: झील से छूटा पानी सबसे पहले भूटान की ‘मो छू’ नदी में पहुंचा। आगे चलकर मो छू और ‘फो छू’ नदियां मिलकर ‘पुनात्सांगछू’ नदी बनाती हैं।
* भारत में प्रवेश: यही नदी दक्षिण की ओर बहते हुए भारत में प्रवेश करती है, जहां इसे संकोश नदी के नाम से जाना जाता है।
* असम और बंगाल पर असर: संकोश नदी आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। इसी वजह से पश्चिम बंगाल और असम के कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

बंगाल और असम में हाई अलर्ट, 10 हजार लोग शिफ्ट
भूटान में मची तबाही और भारत की तरफ पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र और राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में प्रशासन ने सबसे पहले कदम उठाते हुए रातभर सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया और नदी के निचले इलाकों में रहने वाले 10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों व राहत शिविरों में पहुंचा दिया।
प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय आपदा प्रबंधन की टीमों को तैनात कर दिया गया है।
प्रभावित इलाका | प्रशासन की कार्रवाई व स्थिति
- अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल)- संकोश नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है; 10 हजार से ज्यादा लोग शिफ्ट
- कूचबिहार (पश्चिम बंगाल)- तुफानगंज और बॉक्सिरहाट इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और बचाव टीमें तैनात हैं।
- जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल)- नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
- दार्जिलिंग और डुआर्स- पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदियों के पास न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
- धुबरी (असम)- संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए नदी किनारे के गांवों में चेतावनी जारी की गई है।

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
नदी किनारे रहने वाले लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और बिना जरूरी काम के पानी के स्रोतों के पास बिल्कुल न जाएं।
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