Dhirendra Shastri on Police Duty: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में सात दिवसीय श्रीराम कथा कर रहे हैं।
कथा के पांचवें दिन उन्होंने पुलिसकर्मियों की कठिन ड्यूटी, करवा चौथ के व्रत और समाज से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की।
उनके बयानों और कथा के दौरान सुनाई गई कहानियों ने एक बार फिर से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
पुलिसकर्मियों की कठिन ड्यूटी पर क्या बोले शास्त्री?
कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने पुलिस प्रशासन और जवानों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि इनकी ड्यूटी वाकई बहुत खतरनाक और तनावपूर्ण होती है।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “किसी की घरवाली लापता हो जाए या किसी का लड़का गायब हो जाए, उसकी टेंशन सीधे पुलिस को मिल जाती है। उस मामले से या शादी से पुलिस का कोई लेना-देना नहीं होता, फिर भी जिम्मेदारी उन्हीं की होती है।”

उन्होंने पुलिसवालों की इस बात का भी जिक्र किया कि ड्यूटी के चलते वे अपने परिवार और त्योहारों को ठीक से समय नहीं दे पाते।
शास्त्री ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनसे अनुरोध किया था कि करवा चौथ का त्योहार होने के कारण आज की कथा थोड़ी जल्दी समाप्त कर दी जाए।
जनता की सुरक्षा और पुलिस की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने उस दिन कथा डेढ़ घंटे पहले ही समाप्त कर दी और लोगों से पुलिस बल के सम्मान में तालियां बजवाकर उनका धन्यवाद करने की अपील की।

एसपी की पत्नी के भूखे सोने का सुनाया किस्सा
पुलिसकर्मियों की निजी जिंदगी के संघर्ष को बयां करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने एक आईएएस/आईपीएस मित्र (एसपी) का किस्सा साझा किया।
उन्होंने बताया कि उस एसपी की पत्नी ने दिवाली के दिन व्रत रखा था और दोनों ने साथ में भोजन करने का प्लान बनाया था।
अधिकारी ने पत्नी से कहा था कि वे जल्द घर लौट आएंगे।
लेकिन ठीक उसी समय एक शहर में हिंदू-मुस्लिम दंगा भड़क गया और अधिकारी उसमें व्यस्त हो गए।
जब वे सुबह करीब 4 बजे घर पहुंचे और पत्नी से पूछा कि क्या उन्होंने खाना खा लिया, तो पत्नी ने जवाब दिया कि वे सुबह से भूखी बैठी हैं और उनका इंतजार कर रही हैं।

इस मार्मिक प्रसंग को साझा करते हुए शास्त्री ने कहा कि देश और समाज के लोग तो अपने त्योहार खुशी से मना लेते हैं, लेकिन पुलिस की नौकरी ऐसी है कि कई बार उनके घर की लक्ष्मी को भूखा ही सोना पड़ जाता है।
युवाओं के लिए ‘नशा, नींद और नारी’ को बताया घातक
शिवपुरी से एक दिन पहले, दतिया में पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगलामुखी के दर्शन करने वाले धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी सीख दी।
उन्होंने युवाओं को चेताते हुए कहा कि जिंदगी में गति के साथ प्रगति का होना भी बहुत आवश्यक है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी युवा के भविष्य को बर्बाद करने के लिए नशा, नींद और नारी सबसे ज्यादा घातक साबित होते हैं।

इसके अलावा, उन्होंने सनातन धर्म को लेकर भी बेबाक राय रखी।
उन्होंने कहा कि आज के समय में सनातन और हिंदुत्व के लिए बाहरी लोग यानी ईसाई या मुसलमान उतने बड़े खतरे नहीं हैं, जितना कि खुद हिंदुओं के बीच आपसी फूट और आपसी मतभेद हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हिंदुओं को किसी को नीचा दिखाने नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति सिर्फ ‘जगाने’ आए हैं।

करवा चौथ को बताया ‘खसम पूजन दिवस’
करवा चौथ के पावन पर्व को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ दिन पहले एक अनोखी टिप्पणी की थी, जो काफी चर्चा में रही थी। उन्होंने इसे ‘खसम पूजन दिवस’ करार दिया था।
उन्होंने अनुयायियों को समझाते हुए कहा था कि साल में सिर्फ एक दिन व्रत रखकर बाकी के 364 दिन पतियों को ताने नहीं मारने चाहिए।
महिलाओं को यह शिकायत नहीं करनी चाहिए कि उनकी शादी किस मुहूर्त में हो गई थी।
शास्त्री ने कहा कि पतियों की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए करवा चौथ पर जो समर्पण और प्रार्थना की जाती है, वैसी ही प्यार और सम्मान की भावना पूरे साल बनी रहनी चाहिए। तभी इस व्रत का वास्तविक आध्यात्मिक और पारिवारिक महत्व सार्थक हो सकता है।

बता दें कि लोकभाषा में ‘खसम’ शब्द का इस्तेमाल पति या शौहर के रूप में पुराने समय से किया जाता रहा है, जो आज भी ग्रामीण अंचलों और लोकगीतों में आम बोलचाल का हिस्सा है।
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