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वंदे मातरम पर रार: शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- “कला को हिंदू-मुस्लिम की सोच में मत बांधिए”

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Kangana vs Sharmila Tagore: हाल ही में दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम’ के कुछ छंदों पर अपनी राय जाहिर की।

इसके जवाब में बॉलीवुड अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था?

एक समाचार एजेंसी (IANS) को दिए इंटरव्यू के दौरान शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम’ गीत की पंक्तियों पर बात की।

उन्होंने कहा कि जो लोग एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर में विश्वास करने वाले) को मानते हैं, उनके लिए इस गीत की कुछ पंक्तियां अपनी आस्था के अनुकूल नहीं लगतीं।

शर्मिला टैगोर का कहना था कि गीत में कई देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है, जैसे ‘वंदे काली’ या ‘वंदे दुर्गा’।

जो धर्म या व्यक्ति सिर्फ एक ईश्वर की पूजा करते हैं, उनके लिए इन पंक्तियों का उच्चारण करना थोड़ा कठिन हो सकता है।

इसलिए अगर देश के सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलना है, तो ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो अंतरे ही सबसे उपयुक्त और बेहतरीन हैं।

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें…

कंगना का पलटवार: “कला को हिंदू-मुस्लिम सोच से दूर रखें”

शर्मिला टैगोर का यह बयान सामने आते ही कंगना ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक स्टोरी शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।

कंगना ने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि कला और साहित्य को लेकर किसी वरिष्ठ कलाकार की सोच इतनी सीमित और बनावटी कैसे हो सकती है।

कंगना ने अपनी बात को समझाते हुए लिखा कि किसी भी गीत, कविता या साहित्य में शब्दों का इस्तेमाल ‘रूपक’ (Metaphor) के तौर पर किया जाता है।

एक कवि या कलाकार अपनी रचना में मनचाहा प्रभाव पैदा करने के लिए ऐसी कल्पनाओं और तुलनाओं का सहारा लेता है जो आम तौर पर असंभव लगती हैं।

अपनी बात को बल देने के लिए कंगना ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण दिया।

उन्होंने लिखा कि स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था कि उन्हें ऐसे युवा चाहिए जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और नसों में बिजली दौड़ती हो।

इसका मतलब यह नहीं था कि विवेकानंद मौसम का हाल बता रहे थे, बल्कि वे देश के युवाओं में शक्ति और ऊर्जा जगाना चाहते थे।

कंगना ने आगे कहा कि डॉक्टर भी शरीर की ताकत कोशक्ति’ ही कहते हैं। इसलिए लोगों को संकीर्ण धार्मिक सोच से बाहर आकर एक-दूसरे को अपनेपन के साथ स्वीकार करना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने शर्मिला टैगोर के प्रति अपना सम्मान जताते हुए यह भी कहा कि वह उनसे बहुत प्यार करती हैं।

कंगना के हाल के 3 बड़े विवादित बयान

कंगना अपने बेबाक और आक्रामक बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।

‘वंदे मातरम’ विवाद से ठीक पहले भी उनके कई बयानों ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बवंडर खड़ा किया था:

 * युवा पीढ़ी (Gen-Z) को ‘गटर जनरेशन’ कहा

जंतर-मंतर पर छात्रों के एक विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कंगना ने सोशल मीडिया पर बेहद तल्ख टिप्पणी की थी।

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में एक साथ इतनी बदसूरती कभी नहीं देखी। प्रदर्शन कर रहे युवाओं की भाषा और तरीकों को देखकर उन्हें उल्टी जैसा महसूस होता है।

उन्होंने इस नई पीढ़ी (Gen-Z) को ‘गटर जनरेशन’ तक कह दिया।

हालांकि, जब इस बयान पर चौतरफा हंगामा हुआ, तो कंगना ने सफाई दी कि उन्होंने देश के सभी युवाओं को नहीं, बल्कि प्रदर्शन में शामिल एक खास मानसिकता वाले लोगों को ऐसा कहा था।

 * बाबा रामदेव पर साधा निशाना

योग गुरु बाबा रामदेव ने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान कंगना के ‘गटर जनरेशन’ वाले बयान की आलोचना की थी।

रामदेव ने कंगना के चरित्र और उनके अतीत पर सवाल उठाए थे।

इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि बाबा रामदेव को उनकी जवानी या व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में सपने देखना बंद कर देना चाहिए।

कंगना ने यह भी याद दिलाया कि उन्हें कम से कम सुप्रीम कोर्ट से भ्रामक विज्ञापनों के लिए डांट नहीं पड़ी है, इसलिए बाबा रामदेव उन्हें चरित्र का पाठ न पढ़ाएं।

 * महिलाओं की आजादी और जीवनशैली पर टिप्पणी

कंगना ने पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित भारतीय महिलाओं पर भी टिप्पणी की थी।

उन्होंने कहा था कि आज की कुछ महिलाओं के पास समाज को योगदान देने के लिए कुछ नहीं है और वे एक अच्छी गृहिणी भी नहीं बन सकतीं।

इसके बावजूद वे शराब, नशीले पदार्थों और अनगिनत यौन संबंधों को ही अपनी असली आजादी समझ बैठी हैं।

जब विवादों के बाद कंगना को मांगनी पड़ी माफी और देनी पड़ी सफाई

कंगना का विवादों से पुराना नाता रहा है, और कई मौकों पर बयानों के तूल पकड़ने के बाद उन्हें कानूनी या सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी है:

* कृषि कानूनों पर बयान: उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि वापस लिए गए तीनों कृषि कानूनों को देशहित में फिर से लागू किया जाना चाहिए। जब बीजेपी ने उनके इस बयान से पूरी तरह किनारा कर लिया, तो कंगना को वीडियो जारी कर अपने शब्द वापस लेने पड़े और माफी मांगनी पड़ी।

* जावेद अख्तर मानहानि मामला: मशहूर गीतकार जावेद अख्तर के साथ चल रहे 5 साल पुराने मानहानि के केस को खत्म करने के लिए कंगना को बिना शर्त लिखित माफी मांगनी पड़ी थी, जिसके बाद मामला आपस में सुलझा।

* किसान आंदोलन की बुजुर्ग महिला पर टिप्पणी: 2020 के किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने पंजाब की एक बुजुर्ग महिला किसान (महिंदर कौर) को गलत तरीके से पहचानते हुए विवादित पोस्ट की थी। इस मामले में बठिंडा की अदालत में मुकदमे के दौरान कंगना को अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगनी पड़ी थी।

* बीफ खाने के आरोपों पर सफाई: चुनावों के दौरान जब उनके पुराने पोस्ट्स के आधार पर बीफ खाने के दावे किए गए, तो उन्होंने साफ किया कि वह पूरी तरह से शाकाहारी हैं और किसी भी प्रकार का मांस नहीं खाती हैं।

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