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बाबा बर्फानी का बुलावा: 15 अप्रैल से शुरू होंगे अमरनाथ यात्रा के रजिस्ट्रेशन, जानें दर्शन के नए नियम

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Amarnath yatra registration start: हर साल की तरह, साल 2026 में भी हिमालय की गोद में स्थित बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं का इंतजार खत्म होने जा रहा है।

‘बाबा बर्फानी’ के नाम से प्रसिद्ध भगवान शिव का यह पावन धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक है।

समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग के दर्शन के लिए इस बार यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है।

रजिस्ट्रेशन की तारीख और तरीका

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रा के लिए एडवांस रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो जाएगा।

अगर आप इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको समय रहते अपना पंजीकरण कराना होगा।

ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन:

देश भर की लगभग 556 अधिकृत बैंक शाखाओं (जैसे पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, यस बैंक, SBI, ICICI और एक्सिस बैंक) में जाकर आप फॉर्म भर सकते हैं।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन:

श्रद्धालु श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी घर बैठे अपना परमिट हासिल कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात:

रजिस्ट्रेशन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर होता है, इसलिए देरी करने पर आपके मनचाहे दिन का कोटा खत्म हो सकता है।

यात्रा का शेड्यूल और रूट

इस साल की यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी।

  • प्रारंभ तिथि: 3 जुलाई 2026
  • समापन तिथि: 28 अगस्त 2026 (रक्षा बंधन के दिन)

प्रथम पूजा: यात्रा की औपचारिक शुरुआत से पहले 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र गुफा में ‘प्रथम पूजा’ की जाएगी।

श्रद्धालु दो रास्तों से गुफा तक पहुंच सकते हैं:

  •  1. पहलगाम मार्ग: यह पारंपरिक और थोड़ा लंबा रास्ता है (लगभग 48 किमी), जिसे पूरा करने में 3-4 दिन लगते हैं।
  •  2. बालटाल मार्ग: यह छोटा रास्ता है (लगभग 14 किमी), लेकिन इसकी चढ़ाई काफी सीधी और कठिन है।

कौन कर सकता है यात्रा? (पात्रता और नियम)

अमरनाथ यात्रा कोई साधारण पिकनिक नहीं, बल्कि एक कठिन चढ़ाई है। इसलिए प्रशासन ने आयु सीमा तय की है:

  1. आयु सीमा: 13 साल से लेकर 70 साल तक के व्यक्ति ही यात्रा के पात्र हैं।
  2. प्रतिबंध: 13 साल से छोटे बच्चे और 70 साल से अधिक के बुजुर्ग इस यात्रा पर नहीं जा सकते। साथ ही, 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं के लिए भी यात्रा पर पाबंदी है।
  3. अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (CHC): रजिस्ट्रेशन के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज ‘अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ है। यह सर्टिफिकेट श्राइन बोर्ड द्वारा अधिकृत डॉक्टरों से ही बनवाना होगा। बिना इसके आपको यात्रा परमिट नहीं मिलेगा।

सुरक्षा के हाई-टेक इंतजाम

इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाया गया है।

  • आरएफआईडी (RFID) टैग: हर यात्री को एक आरएफआईडी कार्ड दिया जाएगा, जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
  • बायोमेट्रिक जांच: एंट्री पॉइंट्स पर आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन होगा ताकि कोई फर्जीवाड़ा न हो सके।
  • सुरक्षा बल: जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के जवान पूरी यात्रा के दौरान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे।

पौराणिक महत्व: अमरत्व की कथा

अमरनाथ की गुफा का इतिहास बेहद रोचक है।

कहा जाता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर होने की कथा सुनाई थी।

कथा सुनाते समय महादेव चाहते थे कि कोई भी तीसरा प्राणी इसे न सुने, इसलिए उन्होंने अपने गले के सांप, वाहन नंदी और माथे के चंद्रमा को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया था।

माना जाता है कि उस समय गुफा में दो कबूतरों ने यह कथा सुन ली थी और वे भी अमर हो गए।

आज भी भक्तों को वहां कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है।

भक्तों के लिए जरूरी सलाह

1. तैयारी: यात्रा से कम से कम एक महीने पहले सुबह-शाम टहलना शुरू करें ताकि शरीर ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन झेलने के लिए तैयार हो जाए।

 2. कपड़े: वहां मौसम कभी भी बदल सकता है और तापमान शून्य से नीचे जा सकता है। इसलिए ऊनी कपड़े, रेनकोट और मजबूत जूते साथ रखें।

 3. खान-पान: लंगर में हल्का और सुपाच्य भोजन ही लें। पानी खूब पिएं ताकि डिहाइड्रेशन न हो।

अमरनाथ यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का अनुभव है।

15 अप्रैल से अपने नजदीकी बैंक में जाकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें और बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए खुद को तैयार करें।

प्रशासन ने सुविधाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी है, बस आपको अपनी सेहत और नियमों का ध्यान रखना है।

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नोट: श्रद्धालुओं से निवेदन है कि वे केवल श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (shriamarnathjishrine.com) पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।

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