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चैत्र नवरात्रि 2026: अनजाने में टूट गया व्रत? तो घबराएं नहीं, इन 3 उपायों से दूर होगा दोष

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Chaitra Navratri Vrat Khandit Upay: चैत्र नवरात्रि का उत्सव पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

आज नवरात्रि का तीसरा दिन है और भक्त मां चंद्रघंटा की आराधना कर रहे हैं।

नवरात्रि के इन नौ दिनों में उपवास रखना शक्ति की उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

संयम, नियम और सात्विकता इस व्रत की बुनियाद है।

लेकिन कई बार इंसान की सेहत साथ नहीं देती या अनजाने में कोई ऐसी चूक हो जाती है जिससे व्रत खंडित (टूट) हो जाता है।

ऐसे समय में भक्त अक्सर डर जाते हैं या खुद को अपराधी महसूस करने लगते हैं।

शास्त्रों का मत है कि ईश्वर ‘भाव’ के भूखे होते हैं, न कि कठोर नियमों के।

अगर आपकी मंशा गलत नहीं थी और भूलवश कुछ हुआ है, तो सनातन धर्म में इसके लिए प्रायश्चित और दोष निवारण के बेहद सरल मार्ग बताए गए हैं।

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1. क्षमा याचना: मन की शुद्धि सबसे जरूरी

जैसे ही आपको अहसास हो कि आपसे भूल हुई है, सबसे पहले अपने आप को शांत करें।

शुद्ध जल से हाथ-मुंह धोएं और अपने मंदिर के सामने बैठ जाएं।

मां दुर्गा के चरणों में अपना सिर झुकाएं और उनसे अपनी मानवीय भूल के लिए क्षमा मांगें।

‘अच्युत-अनंत-गोविंद’ के नाम का 108 बार जाप करना अमृत के समान माना जाता है।

साथ ही ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप आपके मन को शांत करेगा और संकल्प को दोबारा शक्ति देगा।

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2. हवन और शुद्धिकरण

अगर आपको लगता है कि चूक बड़ी है, तो घर में छोटा सा हवन करें।

इसके लिए किसी बड़े पंडित की आवश्यकता नहीं है, आप स्वयं आम की लकड़ियों और कपूर की सहायता से मां के नाम की आहुति दे सकते हैं।

हवन की अग्नि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है।

इसके पश्चात पूरे घर में गंगाजल छिड़कें, ताकि वातावरण और आपका तन-मन पुनः शुद्ध हो जाए।

3. दान और कन्या पूजन: सबसे बड़ा प्रायश्चित

हिंदू धर्म में दान को हर दोष का सबसे उत्तम निवारण माना गया है।

अगर व्रत टूटा है, तो किसी जरूरतमंद को सफेद चीजें जैसे- चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र दान करें।

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इसके अलावा, कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना जाता है।

उसी दिन या अगले दिन दो छोटी कन्याओं को भोजन कराएं या उन्हें फल भेंट करें।

उनका आशीर्वाद मिलते ही आपके मन का बोझ उतर जाएगा।

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महत्वपूर्ण बात:

याद रखें, भक्ति डर का नहीं बल्कि प्रेम का मार्ग है।

यदि खराब स्वास्थ्य या बीमारी के कारण आपको भोजन या दवाई लेनी पड़ी है, तो इसे दोष न मानें।

शरीर को कष्ट देकर की गई पूजा मां स्वीकार नहीं करतीं। अपनी पूजा जारी रखें और मन में विश्वास रखें कि मां आपकी भक्ति को स्वीकार करेंगी।

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