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Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर उज्जैन के रक्षक बाबा काल भैरव की भक्ति से मिटेंगे सारे कष्ट, जानें पूजा विधि

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Kalashtami 2026 : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को ‘कालाष्टमी’ मनाई जाती है।

यह दिन भगवान शिव के सबसे तेजस्वी और रौद्र अवतार, भगवान काल भैरव को समर्पित है।

काल भैरव को ‘समय का देवता’ कहा जाता है, जो न केवल दुष्टों का संहार करते हैं, बल्कि अपने भक्तों के मन से भय (डर) को जड़ से मिटा देते हैं।

10 अप्रैल 2026 को वैशाख मास की कालाष्टमी मनाई जाएगी, जो आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी है।

उज्जैन के राजा और रक्षक: बाबा काल भैरव

मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में बाबा काल भैरव का वास है।

उन्हें इस शहर का सेनापति’ या ‘कोतवाल’ माना जाता है।

उज्जैन की परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले बाबा काल भैरव की अनुमति लेना अनिवार्य माना गया है।

उज्जैन में विराजमान बाबा की कृपा न केवल भक्तों पर बरसती है, बल्कि वे पूरे क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी करते हैं।

 

 

शनि और राहु के दोषों से मुक्ति का अचूक दिन

ज्योतिष शास्त्र में काल भैरव की पूजा को शनि और राहु के दुष्प्रभावों को शांत करने का सबसे प्रभावी तरीका माना गया है।

1. शनि का प्रभाव:  चूंकि शनि देव के गुरु भगवान शिव हैं, इसलिए भैरव बाबा की पूजा से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में राहत मिलती है। 2026 में शनि मीन राशि में होंगे, ऐसे में कालाष्टमी की पूजा मानसिक शांति देगी।

 2. राहु और डर: राहु अक्सर भ्रम और अज्ञात भय पैदा करता है। काल भैरव की उपासना से आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।

 

कैसे करें पूजा? सरल विधि और दान

काल भैरव की पूजा कठिन नहीं है, बस श्रद्धा की आवश्यकता है:

  1. स्नान और संकल्प:** सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
  2. दीप प्रज्वलन:** काल भैरव की मूर्ति या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  3. प्रिय वस्तुएं:** बाबा को काली उड़द, सरसों का तेल, काले तिल और नीले फूल अर्पित करें।
  4. भैरव चालीसा:** ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें और भैरव चालीसा का पाठ करें।
  5.  दान का महत्व:** इस दिन जरूरतमंदों को काला कंबल, जूता या अन्न दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।
  6. साथ ही, काले कुत्ते को रोटी खिलाना सबसे बड़ा उपाय माना जाता है, क्योंकि कुत्ता काल भैरव की सवारी है।

कालाष्टमी केवल उपवास का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के डर और बुराइयों को खत्म करने का अवसर है।

बाबा काल भैरव की शरण में जाने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं लौटता।

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