UCC in Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों एक बड़े सियासी संग्राम का गवाह बन रही है।
मुद्दा है— यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश में इसे लागू करने के संकेतों के बाद, यह मामला अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों और टीवी डिबेट्स की तीखी बयानबाजी में तब्दील हो गया है।
इस विवाद के केंद्र में हैं दो दिग्गज नेता— भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद।

रामेश्वर शर्मा का हमला: “एक कानून, सबकी जिम्मेदारी”
विवाद की शुरुआत हुई भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के एक बयान से, जिसने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी।
शर्मा ने UCC का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि देश में जनसंख्या विस्फोट एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा, “एक खास कौम में 5 बीवी रखना और 25 बच्चे पैदा करना अब देश के लिए संकट बन रहाबन रहा है। जब देश में शिक्षा, राशन और सरकारी योजनाओं का लाभ सबको बराबर मिलता है, तो फिर शादी और बच्चों के नियम भी सबके लिए एक जैसे क्यों नहीं होने चाहिए?”
शर्मा का तर्क है कि ‘हम दो-हमारे दो’ का नियम केवल एक वर्ग पर नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक पर लागू होना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि UCC से समाज में समानता आएगी और जनसंख्या पर नियंत्रण लगेगा।

आरिफ मसूद का पलटवार: “मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश”
भाजपा विधायक के इस बयान पर कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद ने भी मोर्चा खोल दिया।
मसूद ने इसे नफरत फैलाने वाली राजनीति करार दिया। उनका कहना है कि सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।
मसूद ने सवाल उठाया, “आज प्रदेश का किसान खाद के लिए परेशान है, जनता गैस की कीमतों और महंगाई से जूझ रही है, लेकिन सरकार इन पर बात करने के बजाय UCC और धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रही है।”
आरिफ मसूद ने UCC की परिभाषा पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समाज और अन्य विशिष्ट समुदायों को इस कानून से बाहर रखा जाता है, तो फिर इसे ‘यूनिफॉर्म’ या ‘एकसमान’ कैसे कहा जा सकता है?
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून केवल एक खास समुदाय (मुसलमानों) को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है।
पुरानी है ‘शर्मा बनाम मसूद’ की जंग
भोपाल की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि रामेश्वर शर्मा और आरिफ मसूद के बीच यह कोई पहली भिड़ंत नहीं है।
चाहे हिजाब का मुद्दा हो, वक्फ बोर्ड का मामला हो या फिर धार्मिक जुलूसों पर विवाद— ये दोनों नेता हमेशा एक-दूसरे के विपरीत ध्रुवों पर खड़े नजर आते हैं।
रामेश्वर शर्मा जहाँ हिंदुत्व और कड़े कानूनों की वकालत करते हैं, वहीं मसूद अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर मुखर रहते हैं।
आखिर क्या है UCC और क्यों है इस पर बवाल?
UCC का मतलब है एक ऐसा कानून, जो भारत के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
वर्तमान में, शादी, तलाक, जमीन-जायदाद का बंटवारा और गोद लेने जैसे मामलों में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदायों के अपने-अपने ‘पर्सनल लॉ’ हैं।
भाजपा का मानना है कि एक देश में दो तरह के विधान नहीं हो सकते।
वहीं, विरोधियों का तर्क है कि भारत विविधताओं का देश है और यहाँ हर धर्म की अपनी परंपराएं हैं, जिनमें दखल देना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जहाँ इसे पास किया गया है, और अब मध्यप्रदेश सरकार भी इसी राह पर चलने की तैयारी में दिख रही है।
चुनावी बिसात या सामाजिक सुधार?
मध्यप्रदेश में UCC पर छिड़ी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त तेवरों से साफ है कि सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है।
वहीं विपक्षी दल इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बता रहे हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मध्यप्रदेश में भी उत्तराखंड की तरह जल्द ही कानून की शक्ल दी जाएगी, या यह मुद्दा केवल बयानों तक ही सिमट कर रह जाएगा।
