CJP Founder Abhijeet Dipke bail: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर और प्रमुख अभिजीत दीपके को शनिवार को दिल्ली में जमानत मिल गई है।
उन्हें दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार देर रात को गिरफ्तार किया था। दरअसल, शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली के आयोजन से ठीक पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।
पिछले मात्र 8 दिनों के भीतर दीपके के खिलाफ यह दूसरी बार पुलिस कार्रवाई हुई है।
इससे पहले 10 अक्टूबर को भी उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में ले लिया गया था, हालांकि अगले ही दिन उन्हें रिहा कर दिया गया था।

सुरक्षा की कड़े इंतजाम
शनिवार को उनकी रिहाई से पहले CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह और वकील पुष्प शर्मा मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।
उन्हें सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाना था, जिसके चलते मंदिर मार्ग थाने के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
आखिरकार कानूनी प्रक्रियाओं के बाद उन्हें जमानत मिल गई।

SIR के विरोध में सियासत तेज, 1 नवंबर को कांग्रेस की रामलीला मैदान में रैली
देशभर में वोटर लिस्ट के SIR (सत्यापन या विशेष प्रक्रिया से जुड़े विरोध) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसी कड़ी में अब कांग्रेस पार्टी भी मैदान में उतर आई है।
SIR के विरोध में आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी।
कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए दिल्ली पुलिस से पहले ही अनुमति ले ली है।

इस बीच, अभिनेता और एक्टिविस्ट प्रकाश राज ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट के SIR के खिलाफ देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आगे भी जारी रहेंगे।
प्रकाश राज ने अपने अंदाज में कहा कि हमारे रगों में गांधी, अंबेडकर और भगत सिंह का खून दौड़ता है, इसलिए हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
केरल में दिल्ली पुलिस के खिलाफ जीरो FIR दर्ज
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस की मुश्किलें दक्षिण भारत तक पहुंच गई हैं।
केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित म्यूजियम पुलिस स्टेशन में दिल्ली पुलिस के खिलाफ ‘जीरो एफआईआर’ (Zero FIR) दर्ज की गई है।
यह शिकायत दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ छात्रा और NSUI कार्यकर्ता अथिरा विजयन ने दर्ज कराई है।
शिकायत के मुताबिक, 13 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें न सिर्फ रोका, बल्कि उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया, गालियां दीं, घसीटा और मारपीट की।

इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं (जैसे धारा 74, 76, 115, 117, 126, 296 और 391) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
दिल्ली में धारा 163 लागू, कई जगहों पर बैरिकेडिंग और विरोध मार्च
दिल्ली में लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।
कनॉट प्लेस, संसद मार्ग और जंतर-मंतर जैसे प्रमुख इलाकों में भारी बैरिकेडिंग की गई है, हालांकि यातायात (ट्रैफिक) की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) तोड़ने के आरोप में कई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस का कहना है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कनॉट प्लेस में भारी भीड़ जुटाई गई थी।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में विभिन्न महिला और छात्र संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है।

ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन, क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सड़कों पर मार्च निकाला और अंत में दिल्ली पुलिस मुख्यालय का घेराव किया।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य नेताओं की मुश्किलें
प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को लेकर भी छात्र संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
संगठन का दावा है कि नेहा बोरा को मंडी हाउस से हिरासत में लेने के बाद करीब 5 घंटे तक दिल्ली के अलग-अलग थानों में घुमाया गया और अंततः उन्हें आरके पुरम थाने ले जाया गया।
वकीलों का आरोप है कि आधी रात को थाने पहुंचने के बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया गया, और जब मुलाकात हुई तो वहां पुलिसकर्मी व रिकॉर्डिंग कैमरे मौजूद थे।

इसके अलावा, उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद समय पर दवाइयां न दिए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी के अन्य प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है।
इन्हें 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पकड़ा गया था, जिनकी कस्टडी 18 अक्टूबर को समाप्त होगी।

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर जारी की नई गाइडलाइंस
‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च और उसके बाद उपजे विवादों के बीच दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) को सही तरीके से संभालने, फहराने और प्रदर्शित करने के संबंध में बेहद सख्त और स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं।
पुलिस ने याद दिलाया है कि तिरंगे का अपमान कानूनी रूप से दंडनीय है।
* सम्मान सर्वोपरि: तिरंगा कभी भी जमीन को नहीं छूना चाहिए और न ही पानी में घिसटना चाहिए।
* सही तरीका: इसे उल्टा (केसरिया पट्टी नीचे करके) या आधा झुकाकर नहीं फहराया जा सकता (विशेष सरकारी निर्देशों को छोड़कर)।
* कपड़े और सजावट: राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल कपड़ों, यूनिफॉर्म, कुशन, रुमाल, नैपकिन या मंच को ढकने के लिए नहीं किया जा सकता।
* लिखना और लपेटना: झंडे पर कुछ भी लिखना या किसी वाहन, ट्रेन, नाव, विमान या इमारत को ढकने के लिए इसका उपयोग करना प्रतिबंधित है।

यह पूरा घटनाक्रम दिल्ली की सियासत में आने वाले दिनों में और अधिक गर्माहट लाने के संकेत दे रहा है, जहां एक तरफ विपक्षी दल और छोटे राजनीतिक संगठन सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं, तो वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
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