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भोपाल के बड़े तालाब में 20 नए शिकारे लॉन्च: CM मोहन यादव ने भी की सैर, जानें किराया और सुविधाएं

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Bada Talab Shikara भोपाल की पहचान बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) अब श्रीनगर की डल झील जैसा अनुभव देने के लिए तैयार है।

मध्य प्रदेश पर्यटन निगम ने बड़े तालाब में बुधवार को एक साथ 20 शिकारे लॉन्च कर दिए हैं।

इन शिकारों का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर किया।

इस मौके पर सीएम यादव खुद शिकारे में बैठकर सैर करने के साथ-साथ फ्लोटिंग मार्केट से साड़ी और जैकेट भी खरीदी।

पर्यटन को नई दिशा: भोपाल में डल झील जैसा अनुभव

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परियोजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि इन शिकारों को कश्मीर की डल झील के मॉडल पर तैयार किया गया है।

इसका उद्देश्य भोपाल में वाटर टूरिज्म को बढ़ावा देना और स्थानीय उत्पादों को एक नया बाजार उपलब्ध कराना है।

उन्होंने शिकारों में पर्यटकों के लिए बनाई गई विभिन्न सुविधाओं की सराहना भी की।

कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राज्य बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

हालांकि, सरकार द्वारा सभी विधायकों को आमंत्रित किए जाने के बावजूद कांग्रेस से केवल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

क्या है शिकारे की सवारी का किराया और अनुभव?

अब आम पर्यटक भी इन रंग-बिरंगे शिकारों की सवारी का लुत्फ उठा सकेंगे।

हर शिकारे में 4 से 6 लोग एक साथ बैठ सकते हैं।

20 मिनट की सैर के लिए 4 लोगों का किराया 300 रुपये जबकि 6 लोगों का किराया 450 रुपये रखा गया है।

यह सेवा सुबह 9 बजे से सूर्यास्त तक उपलब्ध रहेगी।

सैर के दौरान नाविक पर्यटकों को बड़े तालाब और भोपाल की ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानकारी भी देंगे।

इसके अलावा, शिकारे की सवारी को और भी यादगार बनाने के लिए बर्ड वॉचिंग के लिए दूरबीन, हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की बिक्री, ऑर्गेनिक सब्जियों व फलों के स्टॉल और स्थानीय व्यंजनों जैसे पोहा-समोसे की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने भी सैर के दौरान शिकारा-बोट रेस्तरां से चाय-नाश्ता किया और फ्लोटिंग मार्केट से खरीदारी की।

पर्यावरण के अनुकूल तकनीक से निर्मित हैं शिकारे

एक बड़ी बात यह है कि इन सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित और आधुनिक तकनीक से किया गया है।

इन्हें ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ (FRP) और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से बनाया गया है, जो पानी के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती।

इससे तालाब का पारिस्थितिकी तंत्र और पानी की शुद्धता सुरक्षित रहेगी।

इन शिकारों को एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था ने तैयार किया है, जिसने केरल, बंगाल और असम में भी ऐसे ही शिकारे बनाए हैं।

एनजीटी के आदेश के बाद क्रूज का विकल्प बने शिकारे

इन शिकारों के लॉन्च का एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि यह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने करीब 10 महीने पहले बड़े तालाब सहित प्रदेश की सभी जल निकायों में डीजल/मोटर से चलने वाले क्रूज और मोटर बोट पर रोक लगा दी थी।

एनजीटी ने इनसे होने वाले प्रदूषण और जलीय जीवन व मनुष्यों के लिए खतरे को देखते हुए यह आदेश दिया था।

इसके चलते बड़े तालाब में चलने वाली ‘लेक प्रिंसेज’ क्रूज और ‘जलपरी’ मोटरबोट बंद हो गई थीं, जिससे पर्यटकों की संख्या में कमी आ गई थी।

अब इन पर्यावरण-हितैषी शिकारों के चलने से न सिर्फ पर्यटकों को फिर से आकर्षित करने की उम्मीद है, बल्कि तालाब का पारिस्थितिकी संतुलन भी बना रहेगा।

यह परियोजना भोपाल को एक वाटर-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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