Manas Bhawan Bhopal Demolition: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का सबसे व्यस्त इलाका ‘पॉलिटेक्निक चौराहा’ शनिवार की सुबह छावनी में तब्दील हो गया।
यहां मानस भवन के ठीक पीछे स्थित झुग्गी बस्ती को हटाने की बड़ी कार्रवाई हो रही है।
पिछले 70 सालों से यहां अपना आशियाना बनाए बैठे 27 आदिवासी परिवारों को आज प्रशासन ने वहां से हटाने का काम शुरू कर दिया।
सुबह होते ही नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीमें भारी सुरक्षा बल के साथ मौके पर पहुंच गईं।

किले में तब्दील हुआ मानस भवन इलाका
कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कर दी गई है और आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
करीब 95 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी इस मिशन में तैनात किए गए हैं।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछार वाली गाड़ियां) भी खड़ी की गई हैं।
पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि वे केवल कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों के लिए यह उनके अस्तित्व की लड़ाई बन गई है।

“मार डालो हमें, इंसानियत खत्म हो गई”
जैसे ही बुलडोजर ने बस्ती की ओर रुख किया, वहां चीख-पुकार मच गई।
कई महिलाएं धूप में ही सड़क पर बैठ गईं और रोते हुए अपना विरोध दर्ज कराने लगीं।
एक महिला का गुस्सा और दर्द सड़क पर साफ दिखाई दिया, जब उसने चिल्लाकर कहा, “हमें मार डालो, इंसानियत पूरी तरह खत्म हो चुकी है।”

बस्ती के निवासियों ने अपने घरों पर ताले लगा दिए थे और चाबियां पुलिस को सौंपते हुए कहा कि अब उनके सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
कुछ आदिवासी परिवारों ने अपने घरों के बाहर अपनी व्यथा लिख रखी थी, जो वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति का ध्यान खींच रही थी।

राजनीतिक सरगर्मी और हाई वोल्टेज ड्रामा
इस कार्रवाई की भनक लगते ही कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा मौके पर शुरू हो गया।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी देर रात से ही धरने पर बैठ गए थे।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार गरीबों को उजाड़ने का काम कर रही है।
कार्रवाई के दौरान तब हड़कंप मच गया जब एक युवक पास के टावर पर चढ़ गया। वह बस्ती हटाने का विरोध कर रहा था।
2023 में भाजपा ने वचन पत्र में लिखा था कि लाड़ली बहनों को पक्का मकान दिया जाएगा।
आज मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल में लाड़ली बहनों के घरों पर बुलडोजर चला रहे हैं। pic.twitter.com/p5b8J9VRjl
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) May 2, 2026
पुलिस ने काफी मशक्कत और समझाइश के बाद उसे नीचे उतारा।
वहीं, आदिवासियों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस ड्यूटी पर है और कोई भी उनके साथ अभद्रता या गाली-गलौज नहीं कर सकता।
आस्था और पहचान का संकट: निषादराज मंदिर
इस पूरी कार्रवाई के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा ‘निषादराज मंदिर’ का है।
आदिवासियों का दावा है कि मानस भवन के पीछे स्थित यह मंदिर भोपाल में भगवान निषादराज का इकलौता मंदिर है।
वर्षों से वे यहां पूजा करते आ रहे हैं।
उनका कहना है कि बस्ती हटाना केवल उनके घर छीनना नहीं, बल्कि उनकी आस्था के केंद्र को भी खतरे में डालना है।

शिफ्टिंग और प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि इन 27 परिवारों को बेघर नहीं छोड़ा जा रहा है।
उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मालीखेड़ी, भौंरी और कलखेड़ा में बने पक्के फ्लैट्स में शिफ्ट किया जा रहा है।
ये 1-BHK फ्लैट्स हैं जिनकी बाजार में कीमत लगभग 12 लाख रुपये बताई जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह स्थानांतरण कोर्ट के आदेशानुसार और शहर के सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक है।

उमंग सिंघार ने घेरा सरकार को
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया (X) के जरिए सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने लिखा कि सरकार का काम केवल गरीबों की बस्तियों को उजाड़ना नहीं होना चाहिए।
कोर्ट के आदेश का सम्मान है, लेकिन पुनर्वास सम्मानजनक होना चाहिए।
व्यवस्था का डंडा केवल गरीबों पर ही क्यों चलता है?
भोपाल के मानस भवन क्षेत्र में पिछले 70 सालों से रह रहे 27 आदिवासी परिवारों को हटाया जा रहा है, चारों तरफ बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल… सिस्टम गरीबों की बस्ती पर सख्त नजर आ रहा है।
माननीय हाईकोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार का कर्तव्य केवल हटाना नहीं, सम्मानजनक…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) May 2, 2026
फिलहाल, मानस भवन के पास का यह इलाका तनावपूर्ण बना हुआ है।
27 परिवारों का भविष्य अब मालीखेड़ी के उन कंक्रीट के फ्लैट्स में है, लेकिन उनकी सालों पुरानी पहचान और समुदाय का ढांचा आज बिखर गया है।
#BhopalNews #MadhyaPradesh #SlumDemolition #TribalRights #BhopalPolice #Politics #CongressProtest #DevelopmentVsDisplacement
