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‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा’: यौन शोषण मामले में कोर्ट से राहत मिलते ही बोले बृजभूषण, पहलवान बोले– हाईकोर्ट जाएंगे

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों में बरी कर दिया है।

इस मामले में उनके साथ आरोपी बनाए गए कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी अदालत ने राहत देते हुए बाइज्जत बरी किया।

फैसला सुनाए जाने के दौरान बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों ही अदालत में उपस्थित थे।

अदालत का यह फैसला मामला दर्ज होने के लगभग तीन साल बाद आया है।

फैसला आने के बाद बृजभूषण ने अदालत के बाहर प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।”

उन्होंने आगे कहा कि वे शुरू से ही खुद को बेकसूर मानते रहे हैं और अगर उन पर लगे आरोप सही साबित होते तो वे फांसी पर लटकने को तैयार थे।

मामला क्या था और कैसे शुरू हुआ?

इस विवाद की शुरुआत जनवरी 2023 में हुई थी, जब देश के शीर्ष पहलवानों विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन शुरू किया था।

पहलवानों का आरोप था कि बृजभूषण ने WFI अध्यक्ष पद पर रहते हुए कई महिला पहलवानों का मानसिक और शारीरिक शोषण किया।

शुरुआत में 6 महिला पहलवानों (जिनमें एक नाबालिग भी शामिल थी) ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई थी।

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इसके बाद पहलवानों ने सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया।

हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के दौरान नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी, जिसके बाद मामला अन्य महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर आगे बढ़ा।

1133 दिन, 127 सुनवाई और 32 गवाह

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया काफी लंबी चली।

राउज एवेन्यू कोर्ट में कुल 1133 दिनों के घटनाक्रम के दौरान 127 बार सुनवाई हुई।

मुकदमे (ट्रायल) के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

* 20 जुलाई 2023: कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को नियमित जमानत दे दी थी।

* 10 मई 2024: दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने बृजभूषण के खिलाफ आरोप (Charges) तय किए, जिसके बाद औपचारिक रूप से ट्रायल शुरू हुआ।

* 2 जुलाई 2026: दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप

ट्रायल के दौरान महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर खेल दौरों और शिविरों के दौरान गलत नीयत से छूने और अनुचित मांग करने के आरोप लगाए थे:

* इलाज के बदले अनुचित मांग: एक महिला पहलवान का आरोप था कि 2022 में जापान में लगी चोट के इलाज में मदद के बदले बृजभूषण ने उनसे गलत मांग की थी।

* अनुचित स्पर्श (Inappropriate Touch): किर्गिस्तान और मंगोलिया में हुए प्रतियोगिताओं और अभ्यास सत्रों के दौरान टी-शर्ट उठाकर या सांस जांचने के बहाने गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया गया।

* तस्वीरों और सम्मान समारोह में बदसलूकी: लखनऊ और कर्नाटक में प्रतियोगिताओं के दौरान ग्रुप फोटो खिंचवाते वक्त या मेडल देते समय अनुचित तरीके से पकड़ने और विरोध करने पर धमकाने का आरोप था।

* व्यक्तिगत स्थानों पर बुलाना: एक खिलाड़ी ने आरोप लगाया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें कमरे में बुलाकर बिना सहमति के जबरन गले लगाया गया।

अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के विश्लेषण के बाद पाया कि ये आरोप अदालत में कानूनी तौर पर सिद्ध नहीं हो सके, जिसके आधार पर आरोपी को बरी कर दिया गया।

बरी होने के बाद बृजभूषण और उनके परिवार की प्रतिक्रिया

अदालत से राहत मिलने के बाद जब बृजभूषण अपने आवास पहुंचे, तो उनके समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

* बृजभूषण शरण सिंह: “मैंने कभी खुद को दोषी नहीं माना। हम तो सिर्फ खेल और जूनियर खिलाड़ियों के अधिकारों के लिए काम कर रहे थे। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि कई बार बड़े खिलाड़ी भी अपने व्यक्तिगत हितों के लिए गलत आरोप लगा सकते हैं।”

* करण भूषण सिंह (सांसद व पुत्र): सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा— “साजिश नाकाम हुई, सत्य की जीत हुई।” उन्होंने कहा कि एक समय पर उनके पिता के खिलाफ ऐसा माहौल बनाया गया था कि सभी दल एकतरफा कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

पहलवानों का रुख: ‘लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई’

अदालत के फैसले से असंतुष्ट पहलवानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

* विनेश फोगाट: “एक ताकतवर नेता के खिलाफ आवाज उठाना बहुत मुश्किल था। सिस्टम और सत्ता शुरुआत से ही आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे थे। हमें दुख है कि कोर्ट ने आरोपों को पर्याप्त नहीं माना, लेकिन हमने उम्मीद नहीं खोई है। हमारे वकीलों को हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दे दिया गया है।”

* बजरंग पूनिया: “अदालत के फैसले से हमें निराशा हुई है। सत्ता और बाहुबल के दम पर गवाहों को प्रभावित किया गया। हम समझेंगे कि किस आधार पर यह निर्णय आया है और आगे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।”

* महावीर फोगाट (द्रोणाचार्य अवॉर्डी): “कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होता है। पहलवानों ने अपनी बात रखी और अपनी लड़ाई लड़ी, लेकिन कानून से बढ़कर कोई नहीं है।”

खेल और राजनीतिक गलियारों की प्रतिक्रियाएं

* संजय सिंह (अध्यक्ष, WFI): “आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद थे। इस पूरे विवाद के कारण भारतीय कुश्ती को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। अगर यह विवाद नहीं होता, तो भारत ओलंपिक में और पदक जीत सकता था।”

* अरविंद केजरीवाल: “यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। सबूतों और बयानों के बावजूद ऐसा फैसला आना आम जनता के मन में सवाल खड़े करता है।”

* प्रियंका गांधी: “सरकार के महिला सशक्तीकरण के दावों और उनके कार्यों में जमीन-आसमान का अंतर है। इस मामले में जिस तरह की प्रक्रिया रही, उससे सरकार का रवैया स्पष्ट होता है।”

आगे का कानूनी रास्ता क्या है?

कानूनी नियमों के अनुसार, निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) से बरी होने का अर्थ है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जुर्म साबित नहीं हो सका।

पीड़ित पक्ष के पास इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील करने का अधिकार सुरक्षित है।

महिला पहलवानों के पास फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 60 दिनों का समय होता है।

इसके लिए उन्हें पहले हाईकोर्ट से विशेष अनुमति (Leave to Appeal) लेनी होगी, जिसके बाद मामले की नए सिरे से हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकेगी।

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