SIR CJP AAP Protest: दिल्ली और मुंबई में शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक हलचल और विरोध-प्रदर्शन का माहौल देखने को मिला।
स्पेशल इंसर्शन/रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), वामपंथी दलों और कई छात्र संगठनों ने एक साथ मोर्चा खोल दिया।
दिल्ली के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर शुक्रवार सुबह से ही स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जंतर-मंतर और आसपास के पूरे इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी, जिसके तहत किसी भी तरह के जुलूस, जनसभा या भीड़ इकट्ठा होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी।

दिल्ली में भारी सुरक्षा, ड्रोन से निगरानी और 700 हिरासत में
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को भारी संख्या में तैनात किया गया।
जंतर-मंतर क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से 8 से 9 अलग-अलग जोन में बांटा गया और प्रत्येक जोन की कमान एक वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी को सौंपी गई।
भीड़ और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस ड्रोन कैमरों का सहारा लेती दिखी।
इसके अलावा जंतर-मंतर पर वॉटर कैनन की गाड़ियां भी खड़ी की गईं।
सख्त पहरे के बावजूद आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, आतिशी और संजय सिंह सहित कई प्रमुख नेता व कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे।

पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को रोकना शुरू कर दिया।
इस दौरान आम आदमी पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं और युवाओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर बसों में बैठाया।
सौरभ भारद्वाज ने हिरासत में लिए जाने के दौरान बस के अंदर से एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार छीना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 6 दिन पहले ही प्रशासन से लिखित अनुमति मांगी गई थी।
दोपहर तक सौरभ भारद्वाज, आतिशी और संजय सिंह समेत लगभग 700 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने और अन्य पुलिस स्टेशनों में भेजा।

थाने के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई और सेंट्रल दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र समेत कई जगहों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए।
आम जनता पर असर: 12 मेट्रो स्टेशन बंद
प्रदर्शन के कारण दिल्ली की ट्रैफिक और मेट्रो सेवाओं पर सीधा असर पड़ा।
एहतियाती कदम उठाते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने जंतर-मंतर के आसपास के 12 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेटों को अगले आदेश तक बंद कर दिया।
जिन मेट्रो स्टेशनों को प्रभावित घोषित किया गया, उनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस और लोक कल्याण मार्ग जैसे अति व्यस्त स्टेशन शामिल हैं।
स्टेशन पूरी तरह बंद होने या गेट सीमित किए जाने के कारण दफ्तरों को जाने वाले आम यात्रियों और छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुख्य विवाद बिंदु
इस पूरे विरोध प्रदर्शन की जड़ में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही SIR (स्पेशल इंसर्शन/रिवीजन) प्रक्रिया और फॉर्म-6 से जुड़े सवाल हैं।
हाल ही में चुनाव आयोग के दो आयुक्तों (जिसमें आयुक्त संधू शामिल हैं) ने इस प्रक्रिया पर 4 गंभीर सवाल उठाए थे:
* फॉर्म-6 में पुराना विवरण: नए मतदाताओं से पिछली SIR लिस्ट में उनके या उनके परिवार के नाम की जानकारी मांगी जा रही थी, जिसे गैरकानूनी बताकर हटाने की मांग की गई थी।
* डेटा कंट्रोल: राज्यों की पहुंच कम करके वोटर डेटाबेस का पूरा नियंत्रण दिल्ली में केंद्रीकृत करने पर सवाल उठे।
* पश्चिम बंगाल की अपीलें: बंगाल में हटाए गए लगभग 16 लाख नामों को लेकर सवाल किया गया कि इतनी बड़ी संख्या में अपीलें किसकी अनुमति से दायर की गईं।
* गोवा सॉफ्टवेयर गड़बड़ी: गोवा में जांच के दौरान योग्य पाए गए 97 पात्र मतदाताओं का नाम केवल सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी खामी के कारण अंतिम वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ा जा सका।


इन सवालों और विरोध के बाद चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उन राज्यों में फॉर्म-6 से 2003 वाली लिस्ट का अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया है, जहाँ SIR पूरा हो चुका है।
अब नए आवेदक को अपने माता-पिता या दादा-दादी के 2003 के रिकॉर्ड देने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
हालांकि, आयोग ने साफ किया है कि मतदाता पात्रता की सामान्य जांच पहले की तरह जारी रहेगी।
मुंबई में CJP का ‘प्रोटेस्ट 2.0’ और आगे का प्लान
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी पार्क में शुक्रवार शाम 4 बजे से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन बुलाया।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह NEET विवाद के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए जंतर-मंतर पर 36 दिनों का ऐतिहासिक आंदोलन हुआ था, वैसा ही ‘प्रोटेस्ट 2.0’ अब मुंबई से शुरू हो रहा है।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस्तीफा नहीं दिया, तो अक्टूबर के अंत से वे एक बार फिर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
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