Dharmendra Pradhan Resignation: NEET-UG में हुई गड़बड़ी और पेपर लीक विवाद के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
उनके पद छोड़ते ही राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर माहौल पूरी तरह बदल गया है।
पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं, ढोल-नगाड़े बजाए और ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाए।



पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों को मौन श्रद्धांजलि दी गई
इस दौरान राष्ट्रगान गाया गया और NEET पेपर लीक विवाद की वजह से अपनी जान गंवाने वाले छात्रों की याद में 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद दो पन्नों और लगभग 575 शब्दों की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर साझा की।
इस पत्र में उन्होंने कई बातें लिखीं, जिसमें यह जिक्र भी शामिल था कि युवाओं को कुछ ताकतों द्वारा भ्रमित किया जा रहा है।

“सुबह हो गई मामू, जनता जाग गई” — अभिजीत दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“वे कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। सुबह हो गई मामू, जनता जाग गई है। हम ऐसे नहीं जाएंगे, कॉकरोच एक बार कहीं घुसता है तो आसानी से निकलता नहीं है।”

अभिजीत दीपके ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का जिक्र करते हुए कहा कि वे सीजेआई का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें ‘कॉकरोच’ कहा। दीपके के मुताबिक, अगर यह शब्द न इस्तेमाल हुआ होता, तो शायद यह आंदोलन इस मोड़ तक नहीं पहुंचता।
उन्होंने आगे कहा कि भले ही शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है, लेकिन उनकी दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं:
* मुआवजा: जिन छात्रों ने मानसिक तनाव में आकर सुसाइड किया है, उनके परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
* कार्रवाई व केस वापसी: प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन हो और छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सरकार और प्रदर्शनकारियों की बैठक
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हो गया है।
बैठक के लिए केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, जितेंद्र सिंह, सौरव दास और अभिषेक रांका दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंच चुके हैं।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी सभी मांगों को मनवाए बिना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
दूसरी ओर, अस्पताल से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत बताया।
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह शांति, धैर्य और निरंतर प्रयास की जीत है। उन्होंने CJP और देश की युवा पीढ़ी (Gen-Z) को इस अहिंसक लड़ाई के लिए बधाई दी।

36 दिन से हो रहा था प्रदर्शन
नीट परीक्षा में हुई धांधली को लेकर देश के युवा और छात्र संगठन पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
आंदोलनकारी छात्रों की मांग थी कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका धरना खत्म नहीं होगा।

इस्तीफे में शिक्षा मंत्री ने छात्रों को क्या संदेश दिया?
इस्तीफे के साथ ही एक भावुक संदेश जारी करते हुए उन्होंने कहा कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए काम करते आए हैं।
वे देश के युवाओं के सपनों और उनकी न्याय की मांग का पूरा सम्मान करते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि देश सेवा का मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात रही।


3 मई की परीक्षा और उसके बाद के बड़े फैसले
अपने बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं।
मामला सामने आते ही सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और जांच CBI को सौंप दी थी। इसके बाद विवादित परीक्षा को रद्द करके नए सिरे से परीक्षा की तारीख घोषित की गई थी।
भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि अगले साल से यह परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड (CBT मोड) में आयोजित की जाएगी।

20 लाख छात्रों के भविष्य का सवाल
उन्होंने बताया कि 20 लाख से ज्यादा छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर काम किया।
जिला प्रशासन, माता-पिता और छात्रों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से पूरी कराई गई।
16 जुलाई को जारी नतीजों में कई गरीब और होनहार बच्चों को सफलता मिली।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उन्होंने इस पूरी घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली और कभी पीछे नहीं हटे।
हालांकि, कुछ लोगों द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने और छात्रों को गुमराह करने से वे काफी आहत हुए हैं।

मोहन भागवत के बयान के 4 घंटे बाद आया इस्तीफा
इस पूरे घटनाक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के बयान को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शनिवार सुबह दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा था कि कोई भी सरकार मनमानी नहीं कर सकती और न ही ताकत के बल पर मालिक बन सकती है।
उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी ढेरों सवाल पूछती है, इसलिए उनसे हुक्म चलाने के बजाय संवाद स्थापित करना चाहिए।

मोहन भागवत के इस बयान के महज 4 घंटे के भीतर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आ गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं।
NTA के 47 अफसर बर्खास्त, लगातार हो रहे एक्शन
NEET और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली के बाद सरकार पर लगातार दबाव बन रहा था।
इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार रात को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया था।
इन अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे (Criminal Cases) दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले शिक्षा मंत्रालय के दो वरिष्ठ सचिवों का भी तबादला किया जा चुका है।

‘इस्तीफे नहीं होते’ से लेकर ऐतिहासिक मिसालों तक
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सत्तारूढ़ दल की कार्यशैली में मंत्रियों के इस्तीफे बहुत कम देखने को मिलते हैं।
जून 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते।”
हालांकि, दबाव बढ़ने पर 2018 में ‘Me Too’ आंदोलन के दौरान तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

एक दिलचस्प बात यह भी है कि 29 साल पहले यानी 1997 में, ओडिशा में हुए एक पेपर लीक के खिलाफ खुद धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र नेता के रूप में 1,500 छात्रों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया था।
उस दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज में धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें कई जगह फ्रैक्चर भी आया था।

क्या है नया एंटी-पेपर लीक कानून?
जून 2024 से पहले तक देश में पेपर लीक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई सख्त केंद्रीय कानून मौजूद नहीं था।
पुलिस सामान्य जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज करती थी, जिनमें आसानी से जमानत मिल जाती थी।
21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया।

इस कानून की मुख्य विशेषताएं:
* गैर-जमानती अपराध: पेपर लीक, फर्जी वेबसाइट बनाना, OMR शीट में गड़बड़ी करना या परीक्षा अधिकारी को धमकी देना गैर-जमानती अपराध बनाया गया है।
* सजा और जुर्माना: सामान्य मामलों में 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
* संस्थागत अपराध: यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी या प्रबंधन का कोई वरिष्ठ अधिकारी इसमें लिप्त पाया जाता है, तो सजा 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

पिछले 5 दिनों का घटनाक्रम (Time Line)
* 20 जुलाई: CJP का संसद मार्च, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का लाठीचार्ज, कई छात्र घायल।
* 21 जुलाई: अभिजीत दीपके ने कहा- “अगर बातचीत करनी है तो सरकार को जंतर-मंतर आना होगा।”
* 22 जुलाई: सोनम वांगचुक का बयान- “ठोस आश्वासन मिलने पर ही अनशन समाप्त होगा।”
* 23 जुलाई: कॉकरोच जनता पार्टी की सरकार को खुली चुनौती।
* 24 जुलाई: सरकार और CJP के बीच दूसरे दौर की बातचीत; सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्तकिया।
* 25 जुलाई: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जंतर-मंतर पर जश्न और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक।
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