Sadhvi Harsha on Kanwar Yatra: सनातन संस्कृति और धार्मिक आयोजनों को लेकर अक्सर अपनी बेबाक राय रखने वाली पूर्व मॉडल और साध्वी हर्षा रिछारिया (साध्वी हर्षानंद गिरि) एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
हाल ही में इंदौर में हुई बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा की तारीफ करने के महज चार दिन बाद, अब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर कांवड़ यात्राओं में फैली कुरीतियों पर तीखा हमला बोला है।
साध्वी हर्षा ने साफ शब्दों में कहा कि आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाने वाली कांवड़ यात्रा की आड़ में अब नशा, डीजे का शोर और अश्लील डांस जैसा गलत काम हो रहा है, जो सनातन धर्म का मजाक उड़ाने जैसा है।

4 दिन में बदला रुख: तारीफ से सीधे तंज तक
दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले इंदौर के विधायक गोलू शुक्ला द्वारा आयोजित बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा में साध्वी हर्षा खुद शामिल हुई थीं।
उस समय उन्होंने हाथ में ध्वज लहराकर युवाओं की श्रद्धा की तारीफ की थी और इसे सनातन संस्कृति से जुड़ाव बताया था।
लेकिन इसके तुरंत बाद जारी अपने नए वीडियो में उन्होंने हरिद्वार और अन्य स्थानों से निकलने वाली कांवड़ यात्राओं के गिरते स्तर पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा, “हम दूसरों को दोष क्या दें, जब हम खुद अपने धर्म का मजाक बना रहे हैं। कांवड़ यात्राओं में खुलेआम शराब की बोतलें खुल रही हैं, गांजे का सेवन हो रहा है और भगवान शिव-पार्वती का रूप धरकर अश्लील डांस किया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है।”
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ऐतिहासिक महत्व और आज के हालात
साध्वी हर्षा ने कांवड़ यात्रा की शुरुआत का जिक्र करते हुए बताया कि इसकी नींव भगवान परशुराम और रावण के समय से पड़ी थी।
उस दौर में कांवड़ उठाना कठिन साधना, समर्पण और अटूट आस्था का प्रतीक होता था। लेकिन आज के समय में इसकी गरिमा को भारी ठेस पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि अब यात्राओं में भक्ति की जगह डीजे का शोर, गांजे का धुंआ और झांकियों के नाम पर फूहड़ता ने ले ली है।

भगवान शिव और माता पार्वती का वेश धारण कराकर कलाकारों से आपत्तिजनक डांस करवाया जाता है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

सरकार और धर्म गुरुओं से 3 मुख्य मांगें
साध्वी हर्षा ने इस स्थिति पर तुरंत रोक लगाने के लिए सरकार और समाज के सामने 3 प्रमुख मांगें रखी हैं:
* नशे पर तुरंत रोक: कांवड़ यात्रा के दौरान शराब या गांजे का सेवन करने वालों के खिलाफ पुलिस को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। नशेड़ियों को ‘कांवड़िया’ नहीं कहा जा सकता।
* तेज डीजे और बड़ी झांकियों पर लगाम: यात्रा के नाम पर शोर-शराबा करने वाले भारी-भरकम डीजे और फिजूल की झांकियों पर रोक लगाई जाए।
* अश्लील डांस और आपत्तिजनक प्रदर्शन बैन हो: शिव-पार्वती का गेटअप बनाकर किए जाने वाले फूहड़ डांस मंचों और ऐसे आयोजनों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।

उन्होंने संतों और धार्मिक गुरुओं से भी सवाल किया कि जब धर्म का इस तरह अवमूल्यन हो रहा है, तो वे चुप क्यों हैं?
अगर इस प्रवृत्ति को आज नहीं रोका गया, तो आने वाले सालों में इसे संभालना नामुमकिन हो जाएगा।
पहले भी बयानों से विवादों में रही हैं हर्षा
यह पहली बार नहीं है जब साध्वी हर्षा के किसी बयान पर बहस छिड़ी हो।
* आश्रम सुरक्षा का मुद्दा: गुरु पूर्णिमा के दौरान उन्होंने उज्जैन में संतों के बड़े-बड़े आश्रमों पर टिप्पणी की थी।
उन्होंने कहा था कि जब तक उन्हें 100 प्रतिशत सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, वह संतों के आश्रमों में रहने के बजाय अपने माता-पिता के घर रहना पसंद करेंगी।

* पार्लर और सुंदरता पर बयान: उन्होंने कुछ संतों पर छिपकर आश्रमों में मैनिक्योर-पेडिक्योर कराने का आरोप लगाया था।
उनका तर्क था कि जब हमारे देवी-देवता सुंदर रूप में पूजे जाते हैं, तो साधु-संतों को भी साफ-सुथरा रहने का पूरा हक है, इसमें कुछ छिपाने जैसा नहीं है।

साध्वी हर्षा के कांवड़ यात्रा पर आए इस नए बयान ने एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।
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