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“कृष्ण जी नमाजी थे” कहने वाले मौलाना पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, बोले- ‘दोबारा ऐसा कहा तो दरवाजे पर करेंगे गीता पाठ’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Dhirendra Shastri Maulana Krishna Controversy: उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले एक मौलाना जर्जिस अंसारी के एक विवादित बयान ने इस समय देश के धार्मिक माहौल को गरमा दिया है।

मौलाना ने दावा किया है कि भगवान श्रीकृष्ण धर्म से मुसलमान थे और वे दिन में पांच बार नमाज पढ़ा करते थे।

इस बयान के सामने आने के बाद हिंदू समाज और संतों में भारी नाराजगी है।

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है।

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तेलंगाना के शमशाबाद में चल रही अपनी हनुमंत कथा के पहले ही दिन धीरेंद्र शास्त्री ने मौलाना को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने मौलाना को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे हिंदू देवी-देवताओं और हमारी पूजा पद्धति पर टिप्पणी करना बंद करें।

अगर उन्होंने भविष्य में दोबारा ऐसा कोई बयान दिया, तो वे खुद उनके घर के दरवाजे पर जाकर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करेंगे।

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मौलाना जर्जिस अंसारी ने आखिर क्या दावा किया था?

यह पूरा विवाद मौलाना जर्जिस अंसारी के एक भाषण (तकरीर) के बाद शुरू हुआ।

मौलाना ने अपने बयान में कहा, “अगर हमारे भाई बुरा न मानें, तो भगवान कृष्ण भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे। वे धर्म से मुस्लिम थे।”

अपने इस अजीबोगरीब दावे को सही साबित करने के लिए मौलाना ने हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक का हवाला दिया।

वह श्लोक इस प्रकार है:

मौलाना ने इस श्लोक की अपनी तरह से व्याख्या करते हुए कहा, “इस श्लोक में कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन! जब भी ईश्वर की इबादत या पूजा करो, तो पूरे शरीर का योग करो। यहां योगी का मतलब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी से नहीं है, बल्कि पूरे शरीर के योग से है। यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर या हाथ उठाकर नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें पूरे शरीर का इस्तेमाल होना चाहिए, जैसा कि नमाज में होता है।”

मौलाना यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, “आजकल हिंदू धर्म में लोग सिर्फ हाथ उठाकर ‘ओम नमः शिवाय’ कह देते हैं और पूजा पूरी हो जाती है। अगर हिंदू और मुस्लिम दोनों अपनी किताबों को अच्छी तरह पढ़ लें, तो वे इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। इस्लाम सिर्फ मुसलमानों का नहीं है, बल्कि इसी धर्म और रास्ते को भगवान राम और कृष्ण ने भी दुनिया के सामने रखा था।”

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें…

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पलटवार: ‘अंसारी जी, घर वापसी कर लो’

हैदराबाद (तेलंगाना) में 17 जुलाई से 19 जुलाई तक चलने वाली तीन दिवसीय हनुमंत कथा के मंच से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया।

उन्होंने कहा कि मौलाना के इस बयान से उन्हें और करोड़ों सनातनी हिंदुओं को गहरी ठेस पहुंची है।

धीरेंद्र शास्त्री ने मौलाना को नसीहत देते हुए कहा, “अंसारी जी, अभी भी सही मौका है, घर वापसी कर लो। भगवान कृष्ण कभी नमाज नहीं पढ़ते थे। आपका जो भी मजहब है, आप उसके हिसाब से अपनी इबादत (पूजा) कीजिए, लेकिन हमारे भगवान और हमारी पूजा पद्धति में दखल देने या छेड़खानी करने की कोशिश बिल्कुल मत कीजिए। इस तरह के गलत और झूठे बयान देना तुरंत बंद करें।”

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बागेश्वर बाबा ने देश की एकता और भाईचारे पर बात करते हुए बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा, “भारत की धरती पर जन्म लेने वाले सभी लोगों की सांस्कृतिक जड़ें और विरासत एक ही हैं। भले ही लोगों की धार्मिक आस्थाएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी संस्कृति एक है। इसलिए किसी को भी दूसरे के धर्म का अपमान करने का अधिकार नहीं है। अगर दोबारा ऐसी गुस्ताखी हुई, तो हम मौलाना के घर के बाहर गीता का पाठ शुरू कर देंगे।”

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क्या है गीता के उस श्लोक का असली और सही अर्थ?

धार्मिक जानकारों और संस्कृत के विद्वानों के अनुसार, मौलाना जर्जिस अंसारी ने गीता के श्लोक का पूरी तरह से गलत और भ्रामक अर्थ निकाला है।

श्लोक का वास्तविक अर्थ: श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को ध्यान (Meditation) और योग साधना का तरीका समझा रहे हैं। कृष्ण जी कहते हैं कि जो भी साधक या योगी (ध्यान लगाने वाला) है, उसे एकांत स्थान पर अकेले बैठना चाहिए। उसे अपने मन और सभी इंद्रियों (Desires) को काबू में रखना चाहिए। मन में किसी भी प्रकार की इच्छा या लालच (संग्रह की भावना) रखे बिना, उसे निरंतर अपने मन को परमात्मा के ध्यान में लगाना चाहिए।

यहाँ ‘योग’ का मतलब आत्मा का परमात्मा से मिलन और मन को शांत करना है, न कि किसी खास मजहब की शारीरिक क्रिया या नमाज।

भैय्यू महाराज की पत्नी ने की FIR की मांग

इस विवादित बयान का विरोध सिर्फ संतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह कानूनी रूप लेता जा रहा है।

इंदौर के दिवंगत संत भैय्यू महाराज की पत्नी डॉ. आयुषी देशमुख ने मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने पुलिस में एक आवेदन देकर मौलाना के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

डॉ. आयुषी देशमुख का कहना है कि किसी को भी हिंदू धर्म या हमारे आराध्य देवी-देवताओं पर इस तरह की अमर्यादित और अपमानजनक टिप्पणी करने की आजादी नहीं दी जा सकती।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश में एक ऐसा सख्त कानून बनना चाहिए, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे धर्म की मान्यताओं का अपमान न कर सके और ऐसा करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

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