Digvijaya Singh Satya Sanatan Swabhiman Yatra: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इन दिनों अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर चर्चा में हैं।
उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर तक जाएगी।
बुधवार को यात्रा का दूसरा दिन रहा, जिसकी शुरुआत सुबह करीब 10 बजे उज्जैन के तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से हुई।
दिग्विजय सिंह हाथ में डंडा लिए अपने समर्थकों के साथ पैदल चलते नजर आए।

चंदा चोरी और EVM पर उठाए गंभीर सवाल
यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के नाम पर चंदा इकट्ठा करने में भारी गड़बड़ी की गई है।
उन्होंने मांग उठाई कि चंदा चोरी करने वालों को तुरंत पकड़ा जाए और जेल भेजा जाए, किसी भी सूरत में दोषियों को बचाया न जाए।
इतना ही नहीं, उन्होंने देश में चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने कहा कि देश को EVM की जरूरत नहीं है, बल्कि सभी चुनाव पुरानी व्यवस्था यानी बैलेट पेपर (मतपत्र) से ही कराए जाने चाहिए।

950 किलोमीटर और 70 दिनों का सफर
यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है, जिसे पूरा करने में लगभग 70 दिन का समय लगेगा।
यात्रा उज्जैन के बाबा महाकाल की नगरी यानी शिव धाम से शुरू होकर प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या (राम धाम) तक पहुंचेगी।
यात्रा के दूसरे दिन का रूट पिंगलेश्वर जोड़, नहारिया जोड़, सायराखेड़ी और देवनखेड़ी से होते हुए ताजपुर जोड़ तय किया गया था, जहाँ भोजन और विश्राम की व्यवस्था थी।
इसके बाद यात्रा देवास जिले के सिंदूरिया गांव की ओर बढ़ी, जहाँ रात्रि पड़ाव प्रस्तावित किया गया।

बातचीत के दौरान जब दिग्विजय सिंह से यात्रा के उद्देश्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने समर्थकों के साथ ‘बम-बम भोले’ का जयकारा लगाया, जिसके जवाब में समर्थकों ने ‘जय सियाराम’ के नारे लगाए।
दिग्विजय ने कहा कि सनातनी परंपरा कभी भी माता सीता का अपमान नहीं करती।
हर्षा रिछारिया के बयान पर प्रतिक्रिया
हाल ही में पूर्व मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया (हर्षानंद गिरि) ने दिग्विजय सिंह की इस यात्रा पर चुटकी ली थी।
उन्होंने कहा था कि राम मंदिर निर्माण के समय लोगों में वैसा उत्साह देखने को नहीं मिला था, जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाने में दिखाई दे रहा है।
जब पत्रकारों ने इस टिप्पणी पर दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने बेहद बेफिक्र अंदाज में कहा, “उनको छोड़ दीजिए, मैं तो उन्हें जानता भी नहीं हूँ।”

पत्नी अमृता राय संभालेंगी संवाद की कमान
दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी इस यात्रा में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी और धर्म के नाम पर की जाने वाली धोखेबाजी से सच्चे सनातनियों के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है।
यह यात्रा हर नागरिक के स्वाभिमान को जगाने का प्रयास है।
दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया कि उनकी गैरमौजूदगी में यात्रा से जुड़ा सारा संवाद और मीडिया प्रबंधन उनकी पत्नी अमृता राय संभालेंगी, जिन्हें उन्होंने अपना आधिकारिक प्रवक्ता बनाया है।
इसके अलावा योगेंद्र परिहार को सह-प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है।


3 हजार से अधिक लोगों का रजिस्ट्रेशन
यात्रा के संयोजक चंदर सिंह सोंधिया ने बताया कि इस 950 किलोमीटर की पैदल यात्रा में स्थायी रूप से चलने के लिए अब तक लगभग 3,000 लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है।
इसके अलावा, जिन-जिन रास्तों से यात्रा गुजर रही है, वहाँ स्थानीय लोग हजारों की संख्या में जुड़ रहे हैं।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की सही और पारदर्शी व्याख्या करना है।

बीजेपी का पलटवार: ‘यह सनातन यात्रा नहीं, राजनीतिक नौटंकी है’
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने दिग्विजय सिंह की इस यात्रा पर जोरदार हमला बोला है।
उज्जैन से बीजेपी सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा को ‘राजनीतिक नौटंकी’ करार दिया।
सांसद फिरोजिया ने कहा कि दिग्विजय सिंह कोई संत या धार्मिक गुरु नहीं हैं, बल्कि एक राजनेता हैं। वह अपनी और अपने बेटे की ढलती हुई राजनीति को चमकाने के लिए यह सब कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि इस यात्रा में न तो सनातन का प्रतीक ‘भगवा ध्वज’ दिखाई दे रहा है और न ही राष्ट्र का ‘तिरंगा’ झंडा।

बीजेपी सांसद ने कांग्रेस के पुराने रुख की याद दिलाते हुए कहा कि यह वही पार्टी है जिसने कभी रामसेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे और भगवान राम को काल्पनिक बताया था।
उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का ‘झूठ बोलो, जोर से बोलो और बार-बार बोलो’ वाला फॉर्मूला अब चलने वाला नहीं है, क्योंकि जनता सब समझ चुकी है।
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