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सोशल मीडिया कंपनियों की खैर नहीं! गलत पोस्ट पर अब Facebook, X और Instagram भी होंगे जिम्मेदार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Social Media new rules: अगर आप फेसबुक, इंस्टाग्राम या X (ट्विटर) पर कुछ भी भड़काऊ या गलत पोस्ट देखते हैं या कोई करता है, तो अभी तक इसके लिए सिर्फ पोस्ट करने वाले यूजर को ही दोषी माना जाता है।

इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कानूनी तौर पर इससे कोई खास मतलब नहीं होता।

वे साफ कह देते हैं कि हम तो सिर्फ एक प्लेटफॉर्म हैं, कंटेंट हमारा नहीं है। लेकिन आने वाले समय में यह व्यवस्था पूरी तरह से बदलने वाली है।

दरअसल, केंद्र सरकार सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने नियमों में बदलाव की चर्चा तेज कर दी है।

सरकार IT एक्ट की धारा 79 के तहत फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसी कंपनियों को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbor) सुरक्षा को खत्म करने पर विचार कर रही है।

क्या है यह ‘सेफ हार्बर’ की ढाल?

आसान भाषा में समझें तो ‘सेफ हार्बर’ इन बड़ी टेक कंपनियों के लिए एक कानूनी रक्षा कवच की तरह काम करता है।

इस नियम के तहत, अगर कोई भी इंटरनेट यूजर प्लेटफॉर्म पर कोई गैरकानूनी बात, भड़काऊ फोटो या फर्जी वीडियो शेयर करता है, तो इसके लिए कंपनी पर सीधे तौर पर कोई केस नहीं किया जा सकता।

कंपनी यह कहकर बच निकलती है कि यह उनका अपना कंटेंट नहीं है।

नियम बदलने के बाद क्या होगा?

अगर सरकार इस ‘सेफ हार्बर’ वाले रक्षा कवच को हटा लेती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।

फिर वे किसी विवादित पोस्ट या वीडियो से यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी कि इसे किसी और ने पोस्ट किया है।

किसी भी यूजर के गलत कमेंट, फेक न्यूज या भड़काऊ पोस्ट के लिए इन कंपनियों से भी सीधा जवाब मांगा जा सकेगा।

इसका मतलब है कि उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर चल रही हर गतिविधि पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त निगरानी रखनी होगी।

किन कंपनियों को मिलती रहेगी छूट?

सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का मकसद सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना है।

इसलिए यह ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP), टेलीकॉम कंपनियों (जैसे एयरटेल, जियो) और बुनियादी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए पहले की तरह ही लागू रह सकती है।

क्या नियम लागू हो गया है?

फिलहाल आपको बता दें कि अभी इस पर सिर्फ मंत्रालयों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा चल रही है।

सरकार ने इस ढाल को खत्म करने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

लेकिन अगर यह प्रस्ताव पास होकर कानून बन जाता है, तो भारत में सोशल मीडिया चलाने का तरीका और कंपनियों की जिम्मेदारी पूरी तरह बदल जाएगी।

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