Kailash Vijayvargiya Letter Indore: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
इस त्रासदी के बीच अब राजनीति, प्रशासनिक सुधार और जनता के बीच विश्वास बहाली की कोशिशें तेज हो गई हैं।
क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस पूरी घटना के बाद से ही सक्रिय नजर आ रहे हैं।
दिल्ली और भोपाल में आलाकमान और संगठन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करने के बाद, उन्होंने शनिवार 10 जनवरी को इंदौर की जनता के नाम एक भावुक पत्र जारी किया।

कैलाश विजयवर्गीय का ‘इंदौर के नाम पत्र’
खुद को ‘इंदौर का बेटा’ बताते हुए विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि पिछले 12-15 दिन शहर के इतिहास के सबसे कठिन दिनों में से एक रहे हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा कि 18 लोगों की जान जाना और सैकड़ों का बीमार होना बेहद व्यथित करने वाला है।
उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि पिछले 8 वर्षों से स्वच्छता में नंबर वन रहने वाले शहर के लिए इससे बुरा क्या होगा कि यह आपदा गंदे पानी के कारण आई।
उन्होंने प्रशासनिक विफलता को स्वीकार करते हुए कहा कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन बदलने के प्रस्ताव समय पर लागू नहीं हो पाए।
उन्होंने संकल्प लिया कि अब न केवल इंदौर, बल्कि पूरे प्रदेश में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनने दी जाएगी।

दिग्विजय सिंह की एंट्री और सियासी तंज
दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की इस मामले में ‘चुप्पी’ और घटनास्थल (भागीरथपुरा) न जाने को लेकर कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठने लगे थे।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी उन पर तंज कसा था।
इस दबाव के बीच, अब दिग्विजय सिंह 11 जनवरी को कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ में शामिल होने के लिए इंदौर आ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह दौरा केवल यात्रा के लिए नहीं, बल्कि भागीरथपुरा मामले में अपनी छवि सुधारने की एक कोशिश भी है।

अभी टला नहीं है खतरा
प्रशासन भले ही हालात सामान्य होने के दावे कर रहा हो, लेकिन भागीरथपुरा में डर अभी भी बना हुआ है।
शुक्रवार 9 जनवरी को उल्टी-दस्त के 12 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 4 की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल रेफर करना पड़ा।
सबसे बड़ी चिंता का विषय ‘अधूरा उपचार’ बनकर उभर रहा है।
जिन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी, घर जाने के बाद उनकी तबीयत फिर से बिगड़ने लगी है।
यह सवाल उठाता है कि क्या अस्पतालों पर दबाव कम करने के लिए मरीजों को जल्दी डिस्चार्ज किया जा रहा है?
वर्तमान में 56 मरीज अस्पताल में हैं, जिनमें से 11 आईसीयू में और 4 वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

पानी की सप्लाई और प्रशासनिक जांच
निगमायुक्त क्षीतिज सिंघल ने बताया कि भागीरथपुरा की पानी की टंकी से क्लोरीन युक्त पानी की टेस्टिंग जारी है।
अगले 2-3 दिनों में नियमित सप्लाई शुरू हो सकती है, लेकिन जब तक सैंपलिंग के सभी पैरामीटर सही नहीं पाए जाते, रिस्क नहीं लिया जाएगा।
संभागायुक्त कार्यालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग में इलाज की गुणवत्ता और निगरानी पर सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इंदौर के लिए यह समय केवल एक आपदा से उबरने का नहीं है, बल्कि अपनी उस ‘नंबर वन’ वाली छवि को फिर से साबित करने का है, जो इस दूषित पानी के दाग से धुंधली हुई है।


