Homeन्यूजमिशन चीता की बड़ी सफलता: बोत्सवाना से कूनो पहुंचे 9 और चीते,...

मिशन चीता की बड़ी सफलता: बोत्सवाना से कूनो पहुंचे 9 और चीते, भारत में 48 हुई कुल संख्या

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Cheetah Kuno National Park मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है।

भारत में चीतों को फिर से बसाने के ‘मिशन चीता’ को शनिवार को एक और बड़ी सफलता मिली।

अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 9 नए चीते भारत पहुंचे हैं।

इन मेहमानों के आने से कूनो नेशनल पार्क में खुशी का माहौल है और अब भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है।

हवाई सफर और कूनो में एंट्री

इन चीतों को बोत्सवाना से एक विशेष विमान के जरिए करीब 12 घंटे के लंबे हवाई सफर के बाद भारत लाया गया।

विमान पहले ग्वालियर उतरा और वहां से इन चीतों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया।

कूनो पहुंचने के बाद, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने खुद अपने हाथों से इन्हें क्वारंटीन बाड़ों (विशेष बाड़े) में रिलीज किया।

लिंगानुपात में सुधार और प्रजनन की उम्मीदें

इस नई खेप (Batch) में 6 मादा (Female) और 3 नर (Male) चीते हैं।

विशेषज्ञों के लिए यह खबर सबसे ज्यादा उत्साहजनक है।

अब तक कूनो में नर चीतों की संख्या मादाओं के मुकाबले थोड़ी ज्यादा थी, लेकिन 6 मादा चीतों के आने से यह संतुलन बेहतर हो गया है।

जानकारों का मानना है कि इससे कूनो में चीतों के प्राकृतिक प्रजनन (Breeding) की रफ्तार बढ़ेगी और जल्द ही छोटे शावकों की किलकारियां भी सुनाई दे सकती हैं।

मादा चीतों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव भी कम होगा।

जेनेटिक विविधता का फायदा

खास बात यह है कि अब भारत में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना, इन तीन अलग-अलग देशों के चीते मौजूद हैं।

इसे वन्यजीव विशेषज्ञ ‘जेनेटिक प्रयोगशाला’ के रूप में देख रहे हैं।

अलग-अलग मूल के चीतों के होने से ‘इनब्रीडिंग’ (एक ही वंश में प्रजनन) का खतरा कम होता है।

इससे पैदा होने वाले शावकों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बेहतर होती है और वे भारत के माहौल में ज्यादा मजबूती से ढल पाते हैं।

एक महीने की सख्त निगरानी

फिलहाल, इन सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा।

इस दौरान वन विभाग के डॉक्टर और वन्यजीव विशेषज्ञ इनकी सेहत, खान-पान और व्यवहार पर बारीकी से नजर रखेंगे।

एक महीना पूरा होने के बाद, चीता स्टीयरिंग कमेटी यह तय करेगी कि किन चीतों को धीरे-धीरे खुले जंगल में छोड़ा जाए।

भारत में चीतों का सफर

भारत में साल 1952 में चीते विलुप्त घोषित कर दिए गए थे।

इसके बाद से ही इन्हें वापस लाने की कोशिशें चल रही थीं।

कूनो नेशनल पार्क को चीतों के लिए सबसे सुरक्षित और अनुकूल घर पाया गया।

देश में अब 48 चीते

  • 45 चीते कूनो नेशनल पार्क में
  • 03 चीते गांधी सागर अभयारण्य में
  • 20 चीते नामीबियाई मूल के हैं। इनमें 17 का जन्म भारत में हुआ।
  • 18 चीते दक्षिण अफ्रीकी मूल के हैं। इनमें 10 का जन्म भारत में हुआ।
  • 39 चीते अब तक भारत में जन्मे
  • 37 चीते वर्तमान में जीवित हैं
  • 12 चीते, जो भारत में जन्मे, उनकी मौत हुई।

यह मिशन न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि भारत के वन्यजीव इतिहास के लिए भी एक मील का पत्थर है।

- Advertisement -spot_img