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लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क पर FBI का बड़ा एक्शन: अमेरिका लाएगा अपनी कस्टडी में; चार्जशीट में पहली बार निज्जर मर्डर से जुड़ा नाम

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Lawrence Bishnoi FBI: अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने भारत से जुड़े एक बहुत बड़े इंटरनेशनल क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

इस मामले में भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, कनाडा में छिपे गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा समेत 37 लोगों के खिलाफ अमेरिकी फेडरल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है।

अमेरिका अब लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया को भारत से अपने देश ले जाने (प्रत्यर्पण) की तैयारी कर रहा है।

इस पूरी कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार आधिकारिक तौर पर लॉरेंस बिश्नोई का नाम 2023 में कनाडा में हुए हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड से जोड़ा गया है।

चार्जशीट में दावा किया गया है कि इन गैंगस्टर्स ने ही निज्जर की हत्या की साजिश रची थी।

इसके साथ ही एफबीआई ने वांटेड गैंगस्टर गोल्डी बराड़ पर 50 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 41 लाख रुपये) का इनाम भी घोषित कर दिया है।

50 ठिकानों पर छापेमारी, 24 गिरफ्तार और भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद

अमेरिकी और कनाडाई एजेंसियों ने इस इंटरनेशनल सिंडिकेट को तोड़ने के लिए कई सालों तक खुफिया जांच की।

इसके बाद अमेरिका, कनाडा और यूरोप में एक साथ 50 से ज्यादा जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।

इस बड़े ऑपरेशन में अब तक 24 आरोपियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि बाकी 13 फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये की कीमत रखने वाला लगभग 1000 किलोग्राम (1 टन) कोकीन, भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, करोड़ों की नकदी और कई डिजिटल सबूत जैसे मोबाइल और लैपटॉप जब्त किए हैं।

कनाडा की पुलिस (RCMP) ने इस पूरे मिशन को ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम दिया था।

तीन बड़े गैंग मिलकर चला रहे थे ‘इंटरनेशनल सिंडिकेट’

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कोई छोटा-मोटा गैंग नहीं है बल्कि तीन बड़े भारतीय संगठित अपराध नेटवर्कों का एक मिला-जुला सिंडिकेट है।

इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड या हेड भारत की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई को बताया गया है।

इस नेटवर्क का काम अलग-अलग महाद्वीपों में बंटा हुआ था:

* लॉरेंस बिश्नोई: भारत की जेल में रहकर फोन और अपने गुर्गों के जरिए पूरे नेटवर्क को गाइड कर रहा था।

 * गोल्डी बराड़: नॉर्थ अमेरिका (अमेरिका और कनाडा) में गैंग के सारे ऑपरेशन्स और हत्याओं को संभाल रहा था।

 * रोहित गोदारा: यूरोप के देशों में गैंग की रंगदारी और ड्रग्स के कारोबार को देख रहा था।

 * जग्गू भगवानपुरिया और अमृतपाल बाठ: इनके नेटवर्कों का इस्तेमाल भी इस सिंडिकेट को लॉजिस्टिक्स और हथियारों की सप्लाई देने के लिए किया जा रहा था।

एजेंसियों का दावा है कि ये सभी आरोपी अलग-अलग देशों में बैठकर भी एक-दूसरे के साथ बेहतरीन तालमेल से काम कर रहे थे।

इनका नेटवर्क भारत, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे 7 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है।

मैक्सिकन ड्रग कार्टेल से कनेक्शन और हवाला-क्रिप्टो का खेल

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के मुताबिक, लॉरेंस और गोल्डी बराड़ का यह गैंग दुनिया के सबसे खतरनाक मैक्सिकन ड्रग कार्टेल के संपर्क में था।

ये गैंग मैक्सिकन कार्टेल से भारी मात्रा में कोकीन खरीदते थे और फिर उसे सुरक्षित रास्तों से अमेरिका और कनाडा के बाजारों में सप्लाई करते थे।

ड्रग्स के अलावा, यह गैंग विदेशों में रहने वाले बड़े भारतीय मूल के व्यापारियों, बिल्डरों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को धमकी देकर करोड़ों रुपये की रंगदारी (प्रोटेक्शन मनी) वसूलता था।

इस काली कमाई को एक देश से दूसरे देश भेजने के लिए अवैध ‘हवाला’ नेटवर्क और ‘क्रिप्टोकरेंसी’ (डिजिटल करेंसी) का इस्तेमाल किया जाता था ताकि पुलिस और टैक्स एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।

पंजाब पुलिस के अधिकारी पर 4 लाख डॉलर की फिरौती का आरोप

इस चार्जशीट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दावा किया गया है कि इस नेटवर्क ने भारत में कुछ भ्रष्ट सिस्टम और अधिकारियों का भी इस्तेमाल किया।

चार्जशीट में पंजाब पुलिस के एक अधिकारी हुंदलप्रीत सिंह का नाम शामिल है।

आरोप है कि हुंदलप्रीत सिंह का इस्तेमाल कैलिफोर्निया (अमेरिका) में रहने वाले एक भारतीय मूल के व्यक्ति से 4 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 3.3 करोड़ रुपये) की फिरौती वसूलने के लिए किया गया था।

पीड़ित को धमकी दी गई थी कि अगर उसने पैसे नहीं दिए, तो पंजाब में रह रहे उसके परिवार और रिश्तेदारों को जान से मार दिया जाएगा।

अमेरिकी एजेंसियां अब इस पुलिस अधिकारी के प्रत्यर्पण की भी मांग कर रही हैं। हालांकि, इस मामले पर अभी पंजाब पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

सख्त ‘RICO’ कानून के तहत केस दर्ज, हो सकती है उम्रकैद

अमेरिकी फेडरल कोर्ट में इन सभी आरोपियों पर बेहद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इनमें हत्या, हत्या की साजिश, इंटरनेशनल ड्रग तस्करी, हथियारों की अवैध सप्लाई, जबरन वसूली (रंगदारी) और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं।

सबसे खास बात यह है कि इन पर अमेरिका का सबसे खतरनाक और सख्त संगठित अपराध विरोधी कानून ‘रिको’ (RICO – Racketeer Influenced and Corrupt Organizations Act) लगाया गया है।

इस कानून के तहत अगर आरोप साबित हो जाते हैं, तो दोषियों को कम से कम 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और उनकी सारी संपत्ति जब्त की जा सकती है।

क्या लॉरेंस बिश्नोई को अमेरिका ले जाना आसान होगा?

अमेरिकी एफबीआई ने साफ कर दिया है कि वे लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और पुलिस अफसर हुंदलप्रीत सिंह को अमेरिका लाने के लिए भारत सरकार से औपचारिक रूप से प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करेंगे।

हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है और इसमें कई कानूनी पेंच हैं:

भारत की कानूनी प्रक्रिया: अमेरिका से औपचारिक अनुरोध मिलने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय और अदालतों में इस पर लंबी सुनवाई होगी।

भारत सरकार दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) के नियमों के तहत ही फैसला लेगी।

भारत में लंबित मामले: लॉरेंस बिश्नोई पर भारत में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और सलमान खान को धमकी देने समेत दर्जनों गंभीर मामले चल रहे हैं।

भारतीय कानून के मुताबिक, जब तक देश के मामलों का ट्रायल पूरा नहीं होता, तब तक किसी आरोपी को दूसरे देश को सौंपना पेचीदा होता है।

सबूतों का आदान-प्रदान: दोनों देश आपस में म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के जरिए इस केस से जुड़े डिजिटल सबूत, गवाहों के बयान और चार्जशीट शेयर करेंगे, जिससे भारत में भी इनके खिलाफ केस मजबूत होगा।

पहले भी भारत से अमेरिका हो चुका है प्रत्यर्पण

ऐसा नहीं है कि भारत से किसी को अमेरिका प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता।

हाल ही में, सितंबर 2025 में भारत सरकार ने गणेश शेनॉय नाम के एक आरोपी को अमेरिका प्रत्यर्पित किया था।

गणेश शेनॉय पर 2005 में अमेरिका में एक सड़क हादसा करने का आरोप था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

हादसे के बाद वह भागकर भारत आ गया था और 20 साल तक भारतीय अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ता रहा।

जब उसके सारे कानूनी विकल्प खत्म हो गए, तो भारत सरकार ने उसे अमेरिकी कानून के हवाले कर दिया।

अब देखना यह होगा कि अमेरिकी एजेंसियों के इस बड़े कदम के बाद भारत सरकार और भारतीय जांच एजेंसियां (जैसे NIA और दिल्ली पुलिस) लॉरेंस बिश्नोई के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट पर अगला क्या एक्शन लेती हैं।

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