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ढाई साल में छठी बार अस्पताल पहुंचे लालकृष्ण आडवाणी: 98 साल की उम्र में फेफड़ों में संक्रमण, डॉक्टर्स की टीम रख रही कड़ी नजर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

LK Advani health update: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है।

शुक्रवार देर शाम उन्हें सीने में संक्रमण (चेस्ट इन्फेक्शन) के चलते दिल्ली के मशहूर अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें आईसीयू (ICU) में रखा गया है और फेफड़ों के विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार देखरेख कर रही है।

फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।

जेपी नड्डा ने की मुलाकात

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा तुरंत अपोलो अस्पताल पहुंचे और लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की पूरी जानकारी ली।

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी उम्र को देखते हुए विशेष सावधानी बरती जा रही है और वे न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विनीत सूरी की निगरानी में हैं।

पिछले ढाई साल में यह छठा मौका है जब आडवाणी जी को स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

वर्तमान में वे 98 वर्ष के हैं और दिल्ली के लुटियंस जोन स्थित अपने सरकारी बंगले पर रहते हैं।

साल 2016 में उनकी पत्नी कमला आडवाणी के निधन के बाद से उनकी पूरी देखभाल उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी करती आ रही हैं।

राजनीतिक सफर का एक अहम अध्याय: अटल जी के बाद संभाली कमान

लालकृष्ण आडवाणी का भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक और मजबूत योगदान रहा है।

साल 2004 के लोकसभा चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन हार गया था और सत्ता यूपीए के हाथों में चली गई थी।

इसके करीब डेढ़ साल बाद, 29 दिसंबर 2005 को मुंबई के शिवाजी मैदान में बीजेपी के रजत जयंती समारोह के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का बड़ा ऐलान किया था।

अटल जी के इस फैसले के बाद पार्टी ने लालकृष्ण आडवाणी को अपना मुख्य चेहरा बनाया और उनके नेतृत्व में साल 2009 का आम चुनाव लड़ा गया।

हालांकि, 16 मई 2009 को आए चुनाव परिणामों में बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और पार्टी 116 सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस नीत यूपीए ने 206 सीटें हासिल कीं।

इसके बावजूद, पार्टी संगठन को खड़ा करने और उसे देश की मुख्यधारा की राजनीतिक ताकत बनाने में आडवाणी की भूमिका अमिट है।

कराची से लेकर देश के उपप्रधानमंत्री तक का सफर

लालकृष्ण आडवाणी का जीवन संघर्ष, समर्पण और राजनीतिक उपलब्धियों से भरा रहा है।

* प्रारंभिक जीवन और विभाजन का दर्द:

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को तत्कालीन भारत के सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) की राजधानी कराची में हुआ था।

उनके पिता का नाम किशन चंद आडवाणी और मां का नाम ज्ञानी देवी था।

वे अपनी पढ़ाई में काफी होनहार थे और कराची के सेंट पैट्रिक्स स्कूल में हमेशा टॉपर रहे।

साल 1942 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े।

देश के विभाजन (1947) के समय उन्हें अपना घर और जन्मस्थान छोड़कर भारत आना पड़ा, जिसके कारण वे आजादी का जश्न भी नहीं मना सके थे।

* संगठन विस्तार और जनसंघ की स्थापना:

दिल्ली आने के बाद उन्होंने राजस्थान के अलवर, भरतपुर, कोटा और बूंदी जैसे इलाकों में आरएसएस के संगठन को मजबूत करने का काम किया।

साल 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई, और 1951 से 1957 तक आडवाणी इसके सचिव रहे।

साल 1957 में वे अटल बिहारी वाजपेयी की मदद के लिए दिल्ली आ गए।

1965 में उनका विवाह कमला आडवाणी से हुआ, जिनसे उनके दो बच्चे—पुत्र जयंत और पुत्री प्रतिभा हैं।

* संसदीय सफर और रथ यात्रा:

अप्रैल 1970 में आडवाणी पहली बार राज्यसभा सांसद बने। उन्होंने 1970 से 1989 तक चार बार राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया।

इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति का रुख किया और 1989 में पहली बार नई दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

इसके बाद वे 1991, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 तक लगातार गुजरात के गांधीनगर से सांसद चुने गए।

आपातकाल (1975) के दौरान उन्हें बेंगलुरु में गिरफ्तार भी किया गया था।

मोरारजी देसाई की सरकार में वे मार्च 1977 से जुलाई 1979 तक देश के सूचना-प्रसारण मंत्री रहे।

* गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री का पद:

मई 1986 से 1991 तक वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

साल 1990 में उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक ऐतिहासिक राम मंदिर रथ यात्रा निकाली, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी और उनके राजनीतिक कद को बहुत ऊंचा कर दिया।

इसके बाद अक्टूबर 1999 से मई 2004 तक उन्होंने देश के केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्य किया और जून 2002 से मई 2004 तक वे देश के उपप्रधानमंत्री रहे।

* सर्वोच्च सम्मान: देश के लिए उनके दीर्घकालिक और विशिष्ट योगदान को देखते हुए साल 2015 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्मविभूषण’ से नवाजा गया।

इसके बाद, 3 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से लालकृष्ण आडवाणी को सम्मानित किए जाने की घोषणा की।

देशभर के उनके चाहने वाले और पार्टी कार्यकर्ता उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

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