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महाराष्ट्र में पूरे साल बैन हुए पटाखे: सार्वजनिक जगहों पर फोड़ने पर रोक, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- शहर बन जाएंगे गैस चैंबर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Maharashtra firecracker ban: महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आई है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर एक सख्त फैसला सुनाया है।

अदालत ने साफ कर दिया है कि अब सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर सालभर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

इस नए आदेश के दायरे में केवल आम दिन ही नहीं, बल्कि नवरात्रि, दिवाली, क्रिसमस और गणेशोत्सव जैसे तमाम बड़े और छोटे त्योहार भी शामिल होंगे।

यानी अब लोग इन त्योहारों के मौके पर भी सार्वजनिक जगहों पर पटाखे नहीं फोड़ पाएंगे।

गैस चैंबर बनते जा रहे हैं शहर

यह अहम फैसला जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोकले की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक आम नागरिक खुद हालात की गंभीरता को नहीं समझेंगें और शहरों में बढ़ते प्रदूषण के खतरों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक स्थिति में सुधार नहीं आ सकता।

जजों ने चिंता जताई कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो हमारे शहर रहने लायक नहीं बचेंगे और बहुत जल्द एक बड़े ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाएंगे।

निर्माण और बिक्री पर रोक नहीं

इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि कोर्ट ने पटाखों के बनने (मैन्युफैक्चरिंग) और उनकी खरीद-बिक्री पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई है।

इसका सीधा मतलब यह है कि व्यापारी पटाखे बेच सकते हैं और फैक्ट्रियों में इनका निर्माण भी जारी रह सकता है।

हालांकि, इन्हें फोड़ने को लेकर नियम बेहद कड़े कर दिए गए हैं। खासकर त्योहारों के जुलूसों के दौरान होने वाले भारी शोर और धुएं को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का सही ढंग से पालन न होना ही आज सबसे बड़ी समस्या है।

बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर बड़ा खतरा

अदालत ने माना कि दीवाली और अन्य त्योहारों के बाद जो खतरनाक प्रदूषण फैलता है, उसका सबसे बुरा असर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ता है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ और कई अन्य गंभीर बीमारियां घेर लेती हैं।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, बीएमसी (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को कड़े निर्देश दिए हैं।

सरकार और प्रशासन को दिए गए ये निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे इस नियम को सख्ती से लागू करें और जनता के बीच जागरूकता फैलाएं।

इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने को कहा गया है:

* जागरूकता अभियान: महज एक हफ्ते के भीतर स्कूलों और सार्वजनिक परिवहन में प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किए जाएं।

 * सेलिब्रिटीज की मदद: लोगों को जागरूक करने के लिए जाने-माने चेहरों और सेलिब्रिटीज की मदद ली जाए और ग्रीन पटाखों को बढ़ावा दिया जाए।

 * सार्वजनिक नोटिस: प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में अखबारों और अन्य माध्यमों से पब्लिक नोटिस जारी किए जाएं।

* शिकायत तंत्र (Complaint System): पुलिस विभाग के साथ मिलकर एक ऐसा प्रभावी सिस्टम बनाया जाए, जहां आम लोग अवैध रूप से पटाखे फोड़ने या तेज आवाज की शिकायत आसानी से दर्ज करा सकें।

इस मामले में अब अगली सुनवाई 25 नवंबर को तय की गई है, जिसमें प्रशासन को उठाए गए कदमों की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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