Sadhvi Harshanand vs Dhirendra Shastri: धर्म और अध्यात्म की दुनिया में इन दिनों आश्रमों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की हिफाजत को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं से एक खास अपील की थी।
इसके जवाब में अब साध्वी हर्षानंद गिरि का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को और ज्यादा गरमा दिया है।

बागेश्वर बाबा की क्या थी अपील?
बीते शनिवार (3 अक्टूबर) की रात बागेश्वर धाम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाएं धाम में अकेली न आएं। यदि वे आती भी हैं, तो किसी भी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादारों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
धीरेंद्र शास्त्री ने सुरक्षा की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे केवल मुख्य मंदिर परिसर और हॉल के भीतर की व्यवस्था की जिम्मेदारी ले सकते हैं।
धाम के आसपास लगभग 5 किलोमीटर के फैले हुए पूरे इलाके की सुरक्षा की गारंटी लेना उनके लिए संभव नहीं है।

उन्होंने वृंदावन जैसी धार्मिक नगरियों में हाल के दिनों में घटी अप्रिय घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि किसी की लापरवाही की वजह से बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज का नाम बदनाम हो।
इसलिए उन्होंने श्रद्धालुओं को लंबे समय तक धाम में न रुकने और अपने सामान व खुद की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं उठाने की सलाह दी।
यहां सुने धीरेंद्र शास्त्री का बयान…
साध्वी हर्षानंद गिरि का तीखा पलटवार
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के बाद साध्वी हर्षानंद गिरि ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी।
हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर हालिया बयानों की ओर ही था।
साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में सुरक्षा और वहां के माहौल पर सीधे सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि अगर आश्रम चलाने वाले संत खुद अपने आश्रम के सेवादारों और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं, तो आम जनता कैसे अपने परिवार और बच्चों को वहां सुरक्षित मानकर भेज सकती है?
जब आश्रम प्रबंधन ही सुरक्षा की गारंटी लेने से हाथ खड़े कर रहा है, तो श्रद्धालुओं को वहां जाने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।
साध्वी का बयान देखने के लिए यहां क्लिक करें…
“घर रहकर ही करें मंत्र जाप और भक्ति”
साध्वी ने श्रद्धालुओं को सलाह देते हुए कहा कि जरूरी नहीं है कि भक्ति करने के लिए आश्रमों के चक्कर ही काटे जाएं।
उन्होंने कहा कि अगर इंसान को सुरक्षित रहना है, तो वह अपने घर पर रहकर ही भगवान का नाम ले सकता है, मंत्रों का जाप कर सकता है और पूजा-पाठ कर सकता है।
उन्होंने साफ किया कि वे सभी आश्रमों को गलत नहीं ठहरा रही हैं, लेकिन जब यह पहचानना मुश्किल हो जाए कि कौन-सा आश्रम सुरक्षित है और कौन-सा असुरक्षित, तो ऐसे में सबसे बेहतर तरीका यही है कि लोग आश्रमों की राजनीति और आंतरिक पंचायतों से दूर रहें।

श्रद्धालु चाहें तो मंदिरों में जाकर केवल भगवान के दर्शन करें और तुरंत अपने घर वापस लौट आएं।
साध्वी ने आश्रमों के प्रबंधन पर चुटकी लेते हुए कहा कि जिन्होंने खुद बड़े-बड़े आश्रम बनाए हैं, आज वे खुद ही उन्हें संभाल नहीं पा रहे हैं।
इसलिए आम श्रद्धालुओं को अपनी और अपने परिवार की भलाई के लिए विवेक से काम लेना चाहिए।
क्यों अहम है यह बहस?
धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा का मुद्दा कोई नया नहीं है, लेकिन जब देश के जाने-माने कथावाचक और संत खुद अपने सेवादारों पर भरोसा न करने की बात कहें, तो श्रद्धालुओं के मन में शंका पैदा होना स्वाभाविक है।
एक तरफ जहां धीरेंद्र शास्त्री इसे सावधानी और सतर्कता का नाम दे रहे हैं, वहीं साध्वी हर्षानंद इसे आश्रमों की विफलता और जिम्मेदारी से भागना मान रही हैं।

इस पूरी बहस ने अब आम श्रद्धालुओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आस्था के केंद्रों में सुरक्षा के पैमाने आखिर क्या होने चाहिए।
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