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मथुरा में कोहराम: कौन थे ‘फरसा वाले बाबा’ संत चंद्रशेखर, जिनकी मौत ने सुलगाया उत्तर प्रदेश?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Farsa Wale Baba Mathura: मथुरा में 21 मार्च की सुबह अचानक हिंसा और आक्रोश की लपटें उठने लगीं।

दिल्ली-आगरा हाईवे पर हजारों की भीड़, पुलिस पर पथराव, और जलती हुई आंखों में इंसाफ की मांग—इस पूरे बवाल के केंद्र में थे ‘फरसा वाले बाबा’ यानी गौरक्षक संत चंद्रशेखर

उनकी मौत के बाद मथुरा छावनी में तब्दील हो गया है।

आइए जानते हैं कि आखिर क्या हुआ था और क्यों यह मामला इतना बड़ा बन गया।

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कौन थे ‘फरसा वाले बाबा’ चंद्रशेखर?

45 वर्षीय चंद्रशेखर सिंह, जिन्हें स्थानीय लोग श्रद्धा से ‘फरसा वाले बाबा’ कहते थे, मथुरा के कोसीकलां क्षेत्र के आजनौंख गांव में एक गौशाला चलाते थे।

वे इलाके में एक प्रखर गौरक्षक के रूप में जाने जाते थे।

उनके नाम के साथ ‘फरसा’ इसलिए जुड़ा था क्योंकि वे हमेशा अपने साथ एक फरसा रखते थे और गौवंश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते थे।

स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि एक ऐसे संत की थी जो आधी रात को भी गायों की तस्करी रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते थे।

हत्या या हादसा?

घटना शनिवार तड़के करीब 4 बजे की है। बाबा चंद्रशेखर को सूचना मिली थी कि कुछ ट्रक गोवंश (गायों) को भरकर तस्करी के लिए ले जा रहे हैं।

चश्मदीदों और साथियों का दावा:

बाबा के साथियों का कहना है कि वे बाइक से एक संदिग्ध ट्रक का पीछा कर रहे थे। उन्होंने ट्रक को रुकवाने के लिए अपनी बाइक उसके सामने लगा दी।

आरोप है कि ट्रक चालक ने रुकने के बजाय रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को बेरहमी से कुचलते हुए निकल गया।

बाबा की मौके पर ही मौत हो गई। इसे सीधे तौर पर ‘सुनियोजित हत्या’ बताया जा रहा है।

पुलिस का पक्ष:

मथुरा पुलिस और डीआईजी शैलेश पांडे का बयान इससे अलग है। पुलिस के मुताबिक, उस समय घना कोहरा था।

बाबा एक ट्रक को रुकवाकर चेक कर रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने खड़े ट्रक को टक्कर मार दी, जिसकी चपेट में बाबा आ गए।

पुलिस का यह भी दावा है कि तलाशी के दौरान ट्रकों में कोई गोवंश नहीं मिला।

हाईवे पर संग्राम और पुलिस से भिड़ंत

बाबा की मौत की खबर जैसे ही फैली, कोसीकलां और आसपास के गांवों से हजारों लोग इकट्ठा हो गए।

आक्रोशित ग्रामीणों ने बाबा का शव दिल्ली-आगरा हाईवे (NH-19) पर रखकर जाम लगा दिया।

देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए:

  • पथराव और तोड़फोड़: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कई जवान घायल हुए। पुलिस की करीब 5-6 गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए।
  • आंसू गैस और लाठीचार्ज: भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इलाके में हवाई फायरिंग की भी खबरें आईं।
  • मांगें: प्रदर्शनकारी आरोपियों के तुरंत एनकाउंटर और बाबा का स्मारक बनाने की मांग कर रहे थे।

शासन का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इसका संज्ञान लिया है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि “दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

सीएम के निर्देश के बाद पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि तीन अन्य की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।

प्रशासन ने बाबा की गौशाला के पास स्मारक बनाने और उचित जांच का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।

सवाल जो अभी भी बरकरार हैं

हालांकि बाबा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है, लेकिन मथुरा में तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है।

लोग पूछ रहे हैं कि अगर यह महज एक हादसा था, तो ट्रक चालक मौके से क्यों भागे?

और क्या कोहरे की आड़ में गौतस्करों ने जानबूझकर बाबा को निशाना बनाया?

मथुरा की यह घटना बताती है कि गौरक्षा का मुद्दा इस क्षेत्र में कितना संवेदनशील है।

फिलहाल भारी पुलिस बल तैनात है और खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इस बवाल के पीछे कोई गहरी साजिश थी या यह सिर्फ तात्कालिक गुस्से का परिणाम था।

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