Mirchi Baba voter list controversy: मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
ताजा मामला महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरि महाराज, जिन्हें लोग ‘मिर्ची बाबा’ के नाम से भी जानते हैं, से जुड़ा हुआ है।
वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने के बाद मिर्ची बाबा ने चुनाव आयोग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि “मैं जिंदा हूँ, मरा नहीं हूँ, फिर भी मेरा नाम किस आधार पर काटा गया?”

“पिंडदान के बाद संन्यासी का परिवार से क्या संबंध?”
गुरुवार को एक वीडियो जारी कर मिर्ची बाबा ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने संन्यास परंपरा का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
बाबा ने कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज रखने या सत्यापन के लिए उनसे जन्मभूमि का प्रमाण पत्र और उनके माता-पिता की जानकारी मांगी जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति संन्यास ग्रहण करता है, तो उसका बाकायदा पिंडदान किया जाता है।
संन्यास लेने के बाद उसका अपने पूर्व परिवार या माता-पिता से कोई सांसारिक संबंध नहीं रह जाता।
संन्यासी की पहचान उसकी गुरु परंपरा से होती है, न कि उसके पुराने नाम या परिवार से। संन्यास के समय पुराना नाम त्याग दिया जाता है और नया नाम दिया जाता है।

उन्हें भी संन्यास के बाद ‘महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरि महाराज’ नाम मिला है। ऐसे में वे अपने पुराने पारिवारिक दस्तावेज कहाँ से लाएं?
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‘मैं दबकर जीने वाला संन्यासी नहीं, अदालत जाऊँगा’
मिर्ची बाबा ने साफ कहा कि वे एक जागरूक नागरिक हैं। उन्होंने पहले चुनाव भी लड़ा है और वे नियमित रूप से आयकर (इनकम टैक्स) भी भरते हैं।
भारत का नागरिक होने के नाते वोट डालना उनका संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। उनसे उनका यह अधिकार कोई छीन नहीं सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि वे किसी से दबकर जीने वाले संन्यासी नहीं हैं।
वे संविधान और कानून पर पूरा भरोसा रखते हैं इस अन्याय के खिलाफ वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और चुनाव आयोग से जवाब मांगेंगे कि आखिर किस आधार पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके अलावा भी कई अन्य साधु-संतों और गरीबों के वोट काटे गए हैं, जो भले ही चुप रहें, लेकिन वे चुप नहीं बैठेंगे।
दुबई से लौटने पर शिक्षक से मिली नाम कटने की जानकारी
जब इस पूरे मामले पर मीडिया ने मिर्ची बाबा से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि वे पिछले कुछ महीनों से दुबई में थे। इसी वजह से वे SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दे पाए थे।
भारत लौटने पर जब उन्होंने खबरों में एसआईआर के विरोध-प्रदर्शन के बारे में देखा, तो उन्होंने ग्वालियर के हजीरा क्षेत्र में अपने स्थानीय बीएलओ (शिक्षक) से संपर्क किया।
शिक्षक ने उन्हें बताया कि पिता के दस्तावेज उपलब्ध न हो पाने की वजह से उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है।

विवादों से रहा है नाता, कोर्ट से हो चुके हैं बरी
गौरतलब है कि मिर्ची बाबा पहले भी कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं।
रायसेन की एक महिला ने 8 अगस्त 2022 को भोपाल के महिला थाने में उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। इसके बाद 9 अगस्त 2022 को पुलिस ने उन्हें ग्वालियर से गिरफ्तार किया था।
हालाँकि, अदालत में मामला चलने के बाद 5 सितंबर 2023 को कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी (इज्जत बरी) कर दिया था।
उन्हें करीब 13 महीने जेल में बिताने पड़े थे, जिसके बाद 6 सितंबर 2023 को वे जेल से बाहर आए थे।

मध्य प्रदेश में SIR से कटे 34 लाख से ज्यादा नाम
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के सत्यापन (SIR) के बाद बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं।
दिसंबर 2025 में जारी की गई ड्राफ्ट लिस्ट में राज्य भर से लगभग 42.74 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।
इसके बाद 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुई अंतिम मतदाता सूची में मूल सूची के मुकाबले 34.25 लाख से अधिक नाम कम हो चुके हैं।
इस भारी कटौती के कारण राज्य भर में आम लोगों के साथ-साथ कई जाने-माने चेहरों के नाम भी वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं।
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