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आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब मध्य प्रदेश में फ्री में होंगे हार्ट, लिवर और फेफड़ों के महंगे ट्रांसप्लांट?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Organ Transplant MP Ayushman Yojana: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बहुत ही राहत भरी और अच्छी खबर सामने आ रही है।

राज्य सरकार अब गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।

प्रदेश सरकार की योजना के तहत अब आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ योजना के दायरे को और बड़ा किया जा रहा है, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को महंगे इलाज के लिए अपनी संपत्ति या जमापूंजी न बेचनी पड़े।

आइए इस पूरी योजना को आसान शब्दों में विस्तार से समझते हैं।

क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?

अब तक आयुष्मान भारत योजना के तहत देश और प्रदेश के पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।

लेकिन कई जटिल बीमारियां ऐसी होती हैं जिनका खर्च इस सीमा से कहीं अधिक होता है।

इसे ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने हार्ट (हृदय), लिवर (यकृत) और लंग्स (फेफड़े) के ट्रांसप्लांट को पहली बार इस योजना में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है।

इसके साथ ही, इन जटिल और महंगी सर्जरी के लिए इलाज की सालाना सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने पर भी विचार किया जा रहा है।

यदि यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू हो जाता है, तो यह गरीब मरीजों के लिए किसी जीवनदान से कम नहीं होगा।

ट्रांसप्लांट का खर्च कितना ज्यादा है?

आम तौर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) का खर्च इतना ज्यादा होता है कि आम आदमी इसके बारे में सोच भी नहीं सकता।

सरकारी और निजी अस्पतालों में इन ऑर्गन ट्रांसप्लांट का अनुमानित खर्च कुछ इस प्रकार है:

* किडनी ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में 3 से 5.5 लाख रुपये, जबकि निजी अस्पतालों में 15 से 20 लाख रुपये तक।

* लिवर ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में 8 से 12 लाख रुपये, जबकि निजी अस्पतालों में 30 से 35 लाख रुपये तक।

* हार्ट ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में लगभग 10 लाख रुपये, जबकि निजी अस्पतालों में 40 से 50 लाख रुपये तक।

* लंग्स (फेफड़े) ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में 10 से 15 लाख रुपये, जबकि निजी अस्पतालों में 60 से 70 लाख रुपये तक।

इतना भारी-भरकम खर्च उठा पाना एक आम परिवार के बस की बात नहीं होती।

यही वजह है कि सरकार इन पैकेजों को आयुष्मान योजना के तहत लाकर मरीजों को आर्थिक सुरक्षा देने की कोशिश कर रही है।

मध्य प्रदेश में क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

हाल ही में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि देश भर में साल 2025 के दौरान करीब 20 हजार ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए, लेकिन विडंबना यह है कि इसमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत ही रही।

इसके अलावा, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच प्रदेश में मृत व्यक्ति से अंगदान (Cadaveric Organ Donation) के सिर्फ 13 मामले ही दर्ज किए गए।

इन आंकड़ों को सुधारने और प्रदेश में अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में जुटी है।

आयुष्मान भारत योजना मप्र के सीईओ अरविंद शाह के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया और खर्च का आकलन करने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) का गठन किया गया है।

इस कमेटी में एम्स (AIIMS) और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के डॉक्टर शामिल हैं, जो ऑपरेशन से पहले की जांच, सर्जरी, आईसीयू का खर्च, दवाइयां और ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल (Post-operative care) का पूरा आकलन कर रहे हैं।

अंगदान और ट्रांसप्लांट के लिए डॉक्टरों की होगी विशेष ट्रेनिंग

मध्य प्रदेश में अंगदान की प्रक्रिया को धरातल पर मजबूत बनाने के लिए एम्स भोपाल अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण (Training) देगा।

इसमें ब्रेन डेथ की पुष्टि करना, अंगदाता की पहचान करना, परिजनों की सही तरीके से काउंसलिंग करना, तथा अंग को सुरक्षित रखकर समय पर ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाने की तकनीक सिखाई जाएगी।

इस प्रस्ताव को मैपकास्ट (MAPCOST) की हरी झंडी भी मिल चुकी है।

कैंसर के इलाज को लेकर विशेषज्ञों की अहम सलाह

अंग प्रत्यारोपण के साथ-साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कैंसर के इलाज को लेकर भी बड़े सुझाव दिए हैं।

पूर्व एनएचएम निदेशक डॉ. पंकज शुक्ला का मानना है कि कैंसर का इलाज सिर्फ कुछ चुनिंदा कीमोथेरेपी या रेडिएशन तक सीमित नहीं होता।

यह एक लंबा और कई चरणों से गुजरने वाला प्रक्रिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयुष्मान योजना में कैंसर के इलाज के लिए टुकड़ों में अप्रूवल मिलने के बजाय, शुरुआती जांच से लेकर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और लंबे समय तक चलने वाले फॉलो-अप व महंगी दवाओं तक के पूरे चक्र को एक सिंगल और पर्याप्त कवरेज के तहत लाया जाना चाहिए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को बार-बार अनुमति के चक्कर में आर्थिक और मानसिक परेशानी न उठानी पड़े।

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