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मध्य प्रदेश में सर्दी ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड: इंदौर में 5.7°C टेंपरेचर, भोपाल में 3 दिन से शीतलहर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Winter Records Broken: उत्तर भारत में शीतलहर ने इस सप्ताह अपना कहर जारी रखा है।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्य कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में हैं।

इसमें भी मध्य प्रदेश का हाल सबसे ज्यादा बेहाल है, जहां एक दशक का सर्दी का रिकॉर्ड टूट गया है।

प्रदेश के कई शहरों में पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है और मौसम विभाग ने कोल्ड वेव व कोल्ड डे का अलर्ट जारी किया है।

1. इंदौर में टूटा 10 साल का रिकॉर्ड, पचमढ़ी सबसे ठंडा

रविवार-सोमवार की रात मध्य प्रदेश के लिए ऐतिहासिक रूप से ठंडी रही।

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

यह पिछले 10 वर्षों में इंदौर का सबसे कम तापमान है।

इससे पहले 24 दिसंबर 2015 को यहां 7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ था।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं और साफ आसमान के कारण रात का तापमान तेजी से गिरा।

प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान 5.2 डिग्री पहुंच गया।

उमरिया (5.6°C), राजगढ़ (6°C), नौगांव (6.5°C) जैसे जिलों में भी कड़ाके की ठंड पड़ी।

राजधानी भोपाल में लगातार तीसरे दिन शीतलहर चल रही है और न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री दर्ज किया गया।

ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी पारा 8-9 डिग्री के आसपास रहा, जिससे आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

एमपी के बड़े शहरों में इतना पारा

रात का तापमान

  1. भोपाल 7.2
  2. इंदौर 5.7
  3. ग्वालियर 8.9
  4. उज्जैन 9.0
  5. जबलपुर 8.3

(नोट: 7-8 दिसंबर की रात का, डिग्री सेल्सियस में)

2. कोहरा और बर्फबारी से उत्तर भारत प्रभावित

मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों पर भी सर्दी की मार पड़ी है।

उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में इस मौसम में पहली बार इतना घना कोहरा देखा गया।

पीलीभीत, लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में दृश्यता मात्र 10 मीटर रह गई, जिससे सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

अयोध्या शहर 5.5 डिग्री तापमान के साथ यूपी का सबसे ठंडा शहर रहा।

वहीं, हिमालयी राज्यों में बर्फबारी ने ठंड को और बढ़ा दिया है।

हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे पर हल्की बर्फबारी हुई और पहाड़ सफेद चादर से ढक गए।

जम्मू-कश्मीर में भी तापमान शून्य से नीचे चला गया है, जहां अमरनाथ यात्रा बेस कैंप का तापमान माइनस 4.3 डिग्री दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार, यह ठंड पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली ठंडी हवाओं के कारण है।

3. क्यों पड़ रही है कड़ाके की ठंड? 

इस असामान्य रूप से तेज और जल्दी पड़ने वाली ठंड के पीछे कई कारण हैं।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ला नीना की स्थिति का इस पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

ला नीना के कारण प्रशांत महासागर ठंडा होता है, जिससे एशिया की ओर ठंडी हवाओं का दबाव बनता है और वे भारत तक पहुंचती हैं।

इसके अलावा, उत्तरी राज्यों में समय से पहले बर्फबारी भी एक बड़ा कारण है।

हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में सामान्य से पहले बर्फ गिरने से ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में तेजी से फैलती हैं।

मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक, इस बार ये हवाएं 20-25% अधिक गहराई तक मध्य भारत के इलाकों में घुसी हैं, जिससे ठिठुरन बढ़ गई है।

साथ ही, पश्चिमी विक्षोभ का लगातार सक्रिय रहना भी तापमान गिरने का कारण बना।

जब भी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तो हल्की बारिश (मावठा) के साथ तापमान में 4-6 डिग्री की गिरावट आ जाती है।

4. दिसंबर में और बढ़ेगी ठंड

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों तक मध्य प्रदेश के कई हिस्सों, खासकर भोपाल और इंदौर में कोल्ड वेव और कोल्ड डे की स्थिति बनी रहेगी।

एक नया पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय है, जो आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा और वहां बारिश व बर्फबारी कराएगा।

इसका मतलब है कि उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं का सिलसिला जारी रहेगा।

दिसंबर माह में ठंड और बढ़ने के आसार हैं। ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर और इंदौर संभाग के जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी।

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर-जनवरी में प्रदेश के कई शहरों में 20-22 दिन तक कोल्ड वेव चल सकती है।

इस बार नवंबर में ही भोपाल ने 84 साल और इंदौर ने 25 साल का ठंड का रिकॉर्ड तोड़ दिया था, ऐसे में दिसंबर भी रिकॉर्ड तोड़ने वाला महीना साबित हो सकता है।

उत्तर भारत में इस समय पड़ रही कड़ाके की ठंड न केवल रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, बल्कि इसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं।

मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के मद्देनजर नागरिकों को ठंड से बचाव के उपाय करने और आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने की सलाह दी जाती है।

खासतौर पर बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

आने वाले दिनों में मौसम में सुधार की उम्मीद कम ही दिख रही है, इसलिए सतर्कता बरतना जरूरी है।

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