Congress Action on Vijay Shah: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान का मामला गरमा गया है।
कैबिनेट मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा (अभियोजन) चलाने की मंजूरी न देने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में मंगलवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुवाई में विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस ने मांग की है कि राज्यपाल कैबिनेट के इस फैसले पर पुनर्विचार करें और मंत्री के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की अनुमति दें।

सरकार अपनी बदनामी छिपाने के लिए राज्यपाल को आगे कर रही: उमंग सिंघार
राजभवन से बाहर आने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी और बदनामी छिपाने के लिए राज्यपाल को मोहरा बना रही है।
सिंघार ने कहा कि यदि बयान देने की गलती मंत्री की है और कानून का उल्लंघन हुआ है, तो फिर इस पूरे विवाद में राजभवन को बीच में क्यों घसीटा जा रहा है?
उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य कैबिनेट के पास मंत्री विजय शाह को पद से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का पूरा अधिकार है, तो मुख्यमंत्री और बीजेपी सरकार कार्रवाई करने से क्यों डर रही है?

नेता प्रतिपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी के नारों पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाता है, लेकिन जब देश और प्रदेश की एक महिला सैन्य अधिकारी (कर्नल सोफिया कुरैशी) का अपमान होता है, तो पूरी सरकार चुप्पी साध लेती है उन्होंने इसे न केवल एक महिला अधिकारी का, बल्कि पूरे देश का अपमान बताया।
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सुप्रीम कोर्ट के रुख का दिया हवाला
सिंघार ने मामले में न्यायपालिका की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) इस मामले पर सख्त है, तो क्या भाजपा सरकार खुद को अदालत और संविधान से भी ऊपर समझ रही है?
उन्होंने कहा कि यह सवाल अब देश और दुनिया की जनता के सामने है कि क्या कोई चुनी हुई सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर सकती है?
उमंग सिंघार के अनुसार, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वे इस संवेदनशील मामले पर गंभीरता से विचार करेंगे और सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे।

राज्यपाल की भूमिका पर भी उठे सवाल
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश कांग्रेस (PCC) के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने इस मुद्दे पर राज्यपाल की भूमिका को लेकर भी संवैधानिक सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी पर अपमानजनक टिप्पणी के मामले में गैर-जमानती धाराओं के तहत गंभीर अपराध बनता है।
ऐसे मामले में मंत्री को बचाने वाले कैबिनेट के प्रस्ताव को सहमति देना राज्यपाल के पद की गरिमा और संवैधानिक निष्पक्षता के विपरीत है।

मिश्रा ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर भारतीय सेना के सम्मान, देश की अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा है।
उन्होंने 2015 के व्यापमं घोटाले का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि कैसे तत्कालीन राज्यपाल के खिलाफ भी एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज की थी।
उन्होंने अपील की कि लोकभवन को अदालत या संविधान को चुनौती देने वाले केंद्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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