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किसानों की चमकी किस्मत: MP में अब धान पर भी मिलेगी भावांतर योजना की सौगात, 6.5 लाख किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Dhaan Bhavantar Bhugtan Yojana MP:  मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों के लिए एक बहुत बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी में आयोजित ‘राज्य स्तरीय धान महोत्सव’ के दौरान घोषणा की है कि अब धान की फसल पर भी किसानों को ‘भावांतर भुगतान योजना’ का लाभ दिया जाएगा।

सोयाबीन और सरसों के बाद अब धान को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है, जिससे प्रदेश के करीब 6.5 लाख किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

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क्या है पूरा मामला और भावांतर योजना का गणित?

आसान शब्दों में कहें तो अब तक सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खुद धान खरीदती थी।

लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत, किसान अपनी मर्जी से खुले बाजार या किसी भी मंडी में अपनी धान बेच सकेंगे।

अगर बाजार में धान की कीमत सरकार द्वारा तय की गई MSP से कम मिलती है, तो नुकसान की बिल्कुल चिंता नहीं करनी है।

बाजार भाव और MSP के बीच का जो भी अंतर (घाटा) होगा, उस अंतर की राशि को सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर (DBT) कर देगी।

उदाहरण के लिए, अगर धान की MSP 2300 रुपये प्रति क्विंटल है और बाजार में व्यापारी ने इसे 2000 रुपये में खरीदा, तो प्रति क्विंटल जो 300 रुपये का अंतर आ रहा है, वह सरकार किसान के खाते में भेजेगी।

इससे किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी और उन्हें पूरा दाम मिलेगा।

सरकारी सिस्टम और किसानों को क्या होंगे फायदे?

पहले जब सरकार सीधे धान खरीदती थी, तो गोदामों (वेयरहाउस) की व्यवस्था, बारदाने (बोरे) का इंतजाम और परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) जैसी लंबी और जटिल प्रक्रियाएं होती थीं।

इसमें अक्सर खरीदी केंद्रों पर गड़बड़ी, घटिया धान जमा होने और तौल में धांधली जैसी शिकायतें सामने आती थीं।

अब भावांतर योजना आने से ये सारी गड़बड़ियां और घोटाले रुकेंगे।

सरकार को भारी-भरकम हैंडलिंग और लॉजिस्टिक्स का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।

सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को सरकारी केंद्रों पर लंबी लाइनों में लगने और अपनी बारी का इंतजार करने से मुक्ति मिल जाएगी।

वे अपनी सुविधा के अनुसार सही समय पर सही दाम देखकर अपनी फसल बेच सकेंगे।

महाकौशल की धान को वैश्विक पहचान और श्रीअन्न पर बोनस

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में महाकौशल क्षेत्र की जमकर तारीफ की।

उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र अपनी बेहतरीन धान के लिए देशभर में मशहूर है और यहां की पारंपरिक ‘छत्रीय धान’ को अब जीआई टैग (Geographical Indication Tag) मिल चुका है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाएगा।

धान के साथ-साथ मोटे अनाज (श्रीअन्न) को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने खजाना खोला है।

‘रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना’ के तहत प्रदेश के 3,941 किसानों को कोदो-कुटकी की खेती के लिए 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया गया।

कुल 2 करोड़ 84 लाख रुपये की यह बोनस राशि सीधे सिंगल क्लिक के जरिए किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है, जिससे पारंपरिक और मोटे अनाज उगाने वाले किसानों का हौसला बढ़ेगा।

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