MP Teachers TET Issue: मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों शिक्षकों का मुद्दा गरमाया हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि इस बार विपक्ष से ज्यादा सरकार के अपने ही लोग (BJP नेता) मुख्यमंत्री मोहन यादव की घेराबंदी कर रहे हैं।
मामला सीधे तौर पर प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों की रोजी-रोटी और उनके सम्मान से जुड़ा है।
सवाल खड़ा हो गया है कि क्या 25-30 सालों का पढ़ाने का अनुभव बड़ा है या फिर नए जमाने की पात्रता परीक्षा (TET)?

सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने खोला मोर्चा
होशंगाबाद-नरसिंहपुर से बीजेपी सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठाकर सबको चौंका दिया है।
उन्होंने सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

सांसद का कहना है कि जिन शिक्षकों ने अपनी पूरी जवानी बच्चों का भविष्य बनाने में लगा दी, आज उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें नौकरी से निकालने का डर दिखाना गलत है।
उन्होंने केंद्र से मांग की है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई जाए।

पूर्व विधायक की खुली चेतावनी
सिर्फ सांसद ही नहीं, सुसनेर से पूर्व बीजेपी विधायक मुरलीधर पाटीदार ने भी तेवर तल्ख कर लिए हैं।
उन्होंने सीएम और शिक्षा मंत्री को दोटूक शब्दों में कहा है कि अगर शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) में बदलाव कर शिक्षकों को राहत नहीं दी गई, तो वे खुद शिक्षकों के साथ सड़कों पर उतरेंगे।

पाटीदार का मानना है कि यह नियम व्यवहारिक नहीं है और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।

आखिर क्यों मचा है बवाल?
इस पूरे विवाद की जड़ में RTE एक्ट 2009 और NCTE की गाइडलाइंस हैं।
सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद अब कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु:
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किसे देनी होगी परीक्षा?: वो शिक्षक जिनकी रिटायरमेंट में 5 साल से ज्यादा का वक्त बचा है।
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कब होगी परीक्षा?: विभाग की योजना जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष परीक्षा कराने की है।
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फेल हुए तो क्या?: शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए 2 साल का समय मिलेगा। अगर फिर भी फेल हुए, तो उन्हें नौकरी से निकाल (Terminate) दिया जाएगा।
शिक्षकों का तर्क है कि जब वे भर्ती हुए थे, तब नियम अलग थे।
अब 50-55 साल की उम्र में उनसे प्रतियोगी परीक्षा पास करने की उम्मीद करना उनके साथ मानसिक प्रताड़ना है।

29 मार्च को भोपाल में ‘महापंचायत’
मध्य प्रदेश शासकीय शिक्षक संगठन अब पीछे हटने को तैयार नहीं है।
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15 से 28 मार्च तक: पूरे प्रदेश में जनसंपर्क अभियान चलेगा, जिसमें सभी सांसद-विधायकों को ज्ञापन सौंपकर उन पर दबाव बनाया जाएगा।
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29 मार्च: भोपाल में प्रदेशभर के शिक्षक जुटेंगे और एक ‘संयुक्त मोर्चा’ बनाएंगे। इसी दिन सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान होगा।
शिक्षकों की मांग है कि या तो इस नियम को वापस लिया जाए या फिर केंद्र सरकार संविधान में संशोधन कर अनुभवी शिक्षकों को इससे छूट दे।
अब देखना यह है कि अपनी ही पार्टी के सांसदों और विधायकों के दबाव के बाद मोहन सरकार क्या बीच का रास्ता निकालती है।
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