MP Voter List Draft: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
23 दिसंबर, 2025 को चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया है।
इस ड्राफ्ट सूची के अनुसार, राज्य की वोटर लिस्ट से 42.74 लाख नाम हटा दिए गए हैं।
इनमें 19.19 लाख पुरुष और 23.64 लाख महिला मतदाता शामिल हैं।
इस प्रक्रिया के तहत, 7 नवंबर से 22 दिसंबर, 2025 तक, बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया।
चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2003 की लिस्ट से मेल न खाने के कारण ये नाम काटे गए हैं।
8.40 लाख नामों की मैपिंग नहीं
इसके अलावा, लगभग 8.40 लाख ऐसे नाम हैं जिनकी मैपिंग (क्षेत्र/बूथ के साथ जोड़ना) नहीं हो पाई है।
यह कार्य लगभग 45 दिनों तक चला, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारियों ने घर-घर जाकर सत्यापन किया।
जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं, उन्हें चुनाव आयोग द्वारा नोटिस जारी करके अपना नाम दोबारा जोड़ने का मौका दिया जाएगा।
नागरिक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन या अपने बूथ के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ऑफलाइन इस ड्राफ्ट सूची की जांच कर सकते हैं।

मतदान केंद्रों की संख्या में वृद्धि
इस बदलाव के साथ ही, प्रदेश में मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथ) की संख्या में भी करीब 7000 की बढ़ोतरी हुई है।
अब मध्य प्रदेश में कुल मतदान केंद्रों की संख्या 71,930 हो गई है।
यह वृद्धि चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप है, जिसमें एक शहरी बूथ पर अधिकतम 1200 और ग्रामीण बूथ पर 1000 मतदाता तय किए गए हैं।
किसी भी बूथ पर मतदाताओं की संख्या इस सीमा से अधिक होने पर एक अतिरिक्त (सहायक) मतदान केंद्र बनाया जाता है।

विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने डाटा लीक की आशंका जताते हुए आरोप लगाया है कि आदिवासी, प्रवासी मजदूर और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अन्यायपूर्ण तरीके से सूची से बाहर किए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग के पास अपना सर्वर नहीं है, जिससे मतदाताओं के संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को खतरा है।

मतदाता सूची में बदलाव के मुख्य कारण
नाम कटने के प्रमुख कारणों में ये शामिल हैं:
- मृत मतदाता: लगभग 8.5 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।
- डुप्लीकेट एंट्री: लगभग 2.5 लाख नाम दो या दो से अधिक बार दर्ज पाए गए।
- अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाता: बड़ी संख्या में लोग अपने पंजीकृत पते पर नहीं रहते।
- अपूर्ण या असंगत जानकारी: लगभग 9 लाख लोगों ने अधूरे या त्रुटिपूर्ण गणना फॉर्म जमा किए थे।
नाम कैसे चेक करें?
अगर आपका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो घबराएं नहीं। आपके पास इसे दोबारा जुड़वाने के लिए पर्याप्त समय और स्पष्ट प्रक्रिया है।
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ऑनलाइन: चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/ पर जाएं। वोटर हेल्पलाइन ऐप डाउनलोड करें या अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर जांच करें।
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ऑफलाइन: अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क करें। ड्राफ्ट सूची की हार्ड कॉपी स्थानीय मतदान केंद्र या तहसील कार्यालय पर भी देखी जा सकती है।

नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया
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फॉर्म-6 भरें: नया नाम जोड़ने या पुनर्स्थापित करने के लिए फॉर्म-6 का उपयोग करें। अब SIR के तहत फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा प्रपत्र भी भरना अनिवार्य है, जिसमें यह बताना होगा कि आपका या आपके पूर्वजों का नाम 2003 की सूची में था या नहीं।
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दस्तावेज जमा करें: आयोग द्वारा मान्य 11 प्रकार के दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। इनमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट आदि शामिल हैं।
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जन्म तिथि के अनुसार नियम:
- 1 जुलाई 1987 से पहले जन्म: कोई एक मान्य दस्तावेज।
- 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म: स्वयं का जन्म प्रमाण + माता या पिता में से किसी एक की भारतीय नागरिकता का प्रमाण।
- 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म: जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य + माता-पिता दोनों की भारतीय नागरिकता का प्रमाण।

गलत नाम हटाने या सुधार के लिए
- नाम हटाने के लिए (जैसे मृतक का नाम): फॉर्म-7 भरें।
- विवरण सुधारने के लिए (नाम, पता, उम्र, फोटो): फॉर्म-8 भरें।
अगर समूह में नाम काटे गए हों
अगर आपको लगता है कि किसी क्षेत्र या समुदाय के बहुत से लोगों के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं, तो आप सामूहिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए:
- लिखित शिकायत सीधे अपने जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) को दें।
- राजनीतिक दलों के माध्यम से भी इसकी सूचना दी जा सकती है।

ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद की महत्वपूर्ण तारीखें
मतदाताओं के लिए निम्नलिखित तारीखें याद रखना जरूरी है:
- 23 दिसंबर 2025: ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशन।
- 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026: दावे और आपत्ति दर्ज करने की अवधि। (कुछ सूत्र 14 फरवरी 2026 तक की अवधि भी बता रहे हैं)।
- 21 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।
राजनीतिक विवाद
SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक मतभेद साफ दिख रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि यह मतदाता सूची को फिल्टर करने की एक सामान्य और जरूरी प्रक्रिया है।
SIR के नाम पर लोकतंत्र से खिलवाड़ किया जा रहा है। चुनाव आयोग फोटोयुक्त मतदाता सूची सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा?
लाखों नाम काटे जा रहे हैं वो लोग न घुसपैठिए हैं, न विदेशी, बल्कि मध्यप्रदेश के वास्तविक नागरिक हैं। यह किसी पार्टी का नहीं, जनता के मताधिकार का सवाल है। कांग्रेस… pic.twitter.com/1wvcdnAvXN
— Umang Singhar (@UmangSinghar) December 22, 2025
तकनीकी चुनौतियां
प्रक्रिया के दौरान कई तकनीकी समस्याएं भी सामने आईं:
- चुनाव आयोग की वेबसाइट और सर्वर लंबे समय तक डाउन रहे।
- BLO ऐप में खामियों के कारण डेटा संग्रह प्रभावित हुआ।
- फॉर्म छपाई और वितरण में देरी हुई, जिससे कार्यक्रम प्रभावित हुआ।
शिकायत दर्ज करने के तरीके
अगर आपको प्रक्रिया में कोई अनियमितता दिखती है या मदद की जरूरत है, तो इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं:
- राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP): https://voters.eci.gov.in/ पर जाकर ‘Register Complaint’ सेक्शन में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- हेल्पलाइन: चुनाव आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क करें।
- BLO से सीधे संपर्क: अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर से मिलें और उन्हें आवेदन व दस्तावेज जमा कराएं।

याद रखें, ड्राफ्ट सूची अंतिम नहीं है।
प्रत्येक मतदाता के पास अपना नाम जांचने, सुधार कराने और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर है।
समय सीमा का ध्यान रखते हुए अपने मताधिकार के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।
अंतिम सूची 21 फरवरी 2026 को जारी होने से पहले सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण कर दिया जाएगा।


