MP Weather Update: मध्य प्रदेश से मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है, लेकिन इसके जाते ही मौसम के दो अलग-अलग मिजाज देखने को मिल रहे हैं।
दिन के वक्त तेज धूप खिलने से हल्की उमस और गर्मी बनी हुई है, वहीं रात होते-होते ठंडक का अहसास बढ़ गया है।
पिछले तीन दिनों के दौरान रात के न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।
अनूपपुर जिले के खूबसूरत पर्यटन स्थल अमरकंटक में पारा गिरकर 16 डिग्री और इंदौर में 18 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
इसके अलावा भोपाल, उज्जैन और पचमढ़ी में भी रातों को ठंडक बढ़ गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अक्टूबर के महीने में अक्सर ऐसा ही मिला-जुला मौसम देखने को मिलता है।
पिछले 10 सालों के आंकड़ों को देखें तो इस महीने में तीखी धूप, हल्की बारिश और रातों की ठंडक तीनों का असर देखने को मिलता है।
इस साल भी अक्टूबर की शुरुआत इसी ट्रेंड के साथ हुई है।
5-6 अक्टूबर को रहेगा सूखा, 7-8 को फिर भीगेगा पूर्वी मध्य प्रदेश
मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 5 और 6 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में मौसम बिल्कुल साफ रहेगा।
इन दो दिनों में कहीं भी बारिश होने की संभावना नहीं है और दिन में तेज धूप खिली रहेगी।
हालांकि, इसके तुरंत बाद 7 और 8 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में एक बार फिर बादलों की आवाजाही शुरू होगी।
इस दौरान छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट समेत 14 जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
इस बार 100 दिन एक्टिव रहा मानसून, जानें बारिश का पूरा हिसाब
इस साल मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की कुल मियाद 100 दिनों की रही।
मानसून ने 24 जून को राज्य में प्रवेश किया था और 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदाई ले ली।
मानसून के इस सीजन में प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर (यानी लगभग 35.8 इंच) बारिश दर्ज की गई, जो कि सामान्य बारिश (37.3 इंच) के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। पूरे प्रदेश के औसत पर नजर डालें तो इस बार 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है।
* पूर्वी हिस्से का हाल: जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा रहा। हालांकि, इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में 5% से लेकर 21% तक कम बारिश हुई।
* पश्चिमी हिस्से का हाल: पश्चिमी मध्य प्रदेश में इस बार बदरा कम बरसे। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच, भोपाल और नर्मदापुरम समेत कई जिलों में औसत से 9% से लेकर 51% तक कम पानी गिरा।
25 जिलों में कोटा फुल, तो 30 जिलों में रह गई कमी
इस मानसून सीजन में प्रदेश के 25 जिलों ने अपनी जरूरत का कोटा पूरा कर लिया।
इनमें भोपाल, राजगढ़, कटनी, ग्वालियर, पन्ना, छतरपुर, मैहर, सिंगरौली, सतना, शहडोल और अनूपपुर जैसे जिले प्रमुख हैं।
दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
जून के महीने में बारिश की 14 प्रतिशत कमी रही थी, जिसकी भरपाई जुलाई, अगस्त और सितंबर में तेज बारिश के बावजूद पूरी तरह नहीं हो सकी।
इसी वजह से ओवरऑल आंकड़ा 4 प्रतिशत माइनस में रह गया।
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