Omkareshwar VIP darshan vivad: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर से एक बेहद ही चौंकाने वाली और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है।
यहाँ भगवान के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों के बीच जमकर लात-घूंसे चले।
रविवार की देर शाम करीब 6 बजे मंदिर परिसर में हुए इस हंगामे के बाद वहाँ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
विवाद की मुख्य वजह वीआईपी (VIP) दर्शन और मंदिर के रास्ते में हुए बदलाव को माना जा रहा है।

नोएडा से आए करीब 20 से 25 श्रद्धालुओं के एक गुट ने मंदिर प्रशासन पर बदसलूकी और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, यह पूरी घटना नए झूला पुल के पास बने सुखदेव मुनि द्वार की है।
आजकल मंदिर प्रशासन यहाँ के रास्ते को चौड़ा करने का काम कर रहा है।
निर्माण कार्य चलने की वजह से इस रास्ते को आम जनता के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
इस वीआईपी मार्ग से केवल खास लोगों को ही आने-जाने की अनुमति दी जा रही है।

नोएडा से आए श्रद्धालुओं का कहना है कि वे यहाँ पहली बार आए थे और उन्हें इस नए नियम या रास्ते के बंद होने की कोई जानकारी नहीं थी।
रास्ते पर कोई स्पष्ट सूचना बोर्ड या गाइड करने वाला न होने की वजह से वे इसी प्रतिबंधित मार्ग से अंदर जाने लगे।
जैसे ही वे आगे बढ़े, वहाँ तैनात मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।
बहस से बात हाथापाई और लात-घूंसों तक पहुँची
चश्मदीदों (मौके पर मौजूद लोगों) ने बताया कि बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों तरफ से धक्का-मुक्की होने लगी। इसी बीच धक्का लगने से मंदिर का एक कर्मचारी पास में ही बने काउंटर पर जा गिरा।
अपने साथी को गिरता देख वहाँ तैनात 10 से 12 अन्य कर्मचारी भी दौड़ते हुए आए और बात पूरी तरह बिगड़ गई।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। लात-घूंसे चलने लगे और मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई।
कुछ देर के लिए वहाँ डर का माहौल बन गया, जिसके बाद स्थानीय दुकानदारों और अन्य लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।
हालांकि, हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी अभी तक पुलिस में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

श्रद्धालुओं और मंदिर ट्रस्ट का क्या है कहना?
घटना के बाद नोएडा से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर के स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए।
उनका कहना था, “हम यहाँ भगवान के दर्शन करने आए हैं, कोई विवाद करने नहीं। अगर रास्ता बंद था तो कर्मचारी हमें प्यार से समझा सकते थे। लेकिन यहाँ का स्टाफ सीधे डराने-धमकाने और गुंडागर्दी वाली भाषा का इस्तेमाल करता है।”
वहीं स्थानीय लोगों का भी मानना है कि मंदिर में दिशा-निर्देश वाले बोर्ड न होने की वजह से बाहर से आने वाले श्रद्धालु अक्सर भ्रमित (Confuse) हो जाते हैं।
दूसरी तरफ, मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी राव पुष्पेंद्र सिंह ने कर्मचारियों का बचाव करते हुए कहा कि ओंकारेश्वर मंदिर का गर्भगृह काफी छोटा है।
भीड़ को संभालने और सुरक्षा के लिहाज से आने-जाने के अलग रास्ते तय किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं ने नियमों का उल्लंघन किया और मना करने पर स्टाफ के साथ मारपीट की, जिसके बाद बाकी कर्मचारी अपने साथी को बचाने दौड़े थे।
आगे के लिए मंदिर प्रशासन का फैसला
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मंदिर प्रशासन की काफी किरकिरी हो रही है।
इस पर सफाई देते हुए ट्रस्ट ने कहा कि वे कर्मचारियों को पहले से ही श्रद्धालुओं के साथ तमीज और नरमी से पेश आने की ट्रेनिंग देते हैं।
इस घटना से सबक लेते हुए अब कर्मचारियों के लिए नए और सख्त गाइडलाइंस जारी किए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को ऐसी असुविधा या विवाद का सामना न करना पड़े।
