Pakistan-Afghanistan War: दुनिया अभी रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास के संघर्षों से उभरी भी नहीं थी कि दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध का बिगुल बज गया है।
सीमा पर तनाव इतना बढ़ गया है कि दोनों ओर से भारी गोलाबारी, हवाई हमले और सैन्य अभियानों का दौर शुरू हो चुका है।
पाकिस्तान ने जहां ‘गजब लिल हक’ नामक ऑपरेशन शुरू किया है, वहीं तालिबान ने भी अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक दी है।
आखिर रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि कल तक ‘भाई-भाई’ की बात करने वाले ये देश एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए?
Pakistani Defense Minister Khawaja Muhammad Asif said it is “open war” now as Pakistan bombed Taliban government targets in major Afghan cities overnight. https://t.co/qzQpbBoAtH pic.twitter.com/lG6XguVZGl
— DW News (@dwnews) February 27, 2026
जंग की वजह: 22 फरवरी का वो हमला
इस ताजा संघर्ष की चिंगारी 22 फरवरी को लगी, जब पाकिस्तान के भीतर एक बड़ा आतंकी हमला हुआ।
पाकिस्तान का सीधा आरोप है कि इस हमले की साजिश अफगानिस्तान की धरती पर रची गई थी।
जवाब में पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बमबारी की।
इसके बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन माना और बीती रात जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की सीमा चौकियों को निशाना बनाया।
देखते ही देखते, एक आतंकी घटना ने दो देशों के बीच पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी।
Pakistan has struck Kabul and declared it’s in an ‘open war’ with Afghanistan, after Islamabad accused the Afghan Taliban of opening fire along the shared border.
The fighting follows days of hostilities, despite a ceasefire agreement in October. pic.twitter.com/uQO1NT4H9f
— Al Jazeera English (@AJEnglish) February 27, 2026
विवाद की असली जड़: डुरंड लाइन
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच झगड़े की सबसे बड़ी और पुरानी वजह है ‘डुरंड लाइन’।
यह 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे 1893 में ब्रिटिश राज के दौरान खींचा गया था।
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अफगानिस्तान का तर्क: अफगान सरकार (चाहे वो पहले की हो या अब तालिबान की) इस लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानती। उनका कहना है कि यह सीमा पश्तून समुदायों को दो हिस्सों में बांटती है।
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पाकिस्तान का रुख: पाकिस्तान इसे ही अपनी आधिकारिक सीमा मानता है और यहां बाड़ (Fencing) लगा रहा है, जिसका तालिबान लड़ाके लगातार विरोध करते हैं और अक्सर बाड़ को उखाड़ फेंकते हैं।
Pakistan bombed Taliban government targets in Afghanistan’s major cities overnight, officials from both countries said, with Pakistan’s defence minister describing the conflict as ‘open war’ https://t.co/oY40T7r8Ap pic.twitter.com/vYJkHRjVKW
— Reuters (@Reuters) February 27, 2026
TTP: वो संगठन जिसने दोस्ती में डाली दरार
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है।
यह संगठन पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना चाहता है और लगातार पाकिस्तानी फौज पर हमले करता है।
पाकिस्तान का दावा है कि अफगान तालिबान इन आतंकियों को पनाह देता है।
हालांकि, काबुल की सत्ता पर काबिज तालिबान इससे इनकार करता है, लेकिन हकीकत यह है कि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 60% से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
Pakistan says it is now “open war” between Islamabad and Afghanistan’s Taliban government as explosions are reported in Kabul and fighting continues along the border.
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— Al Jazeera English (@AJEnglish) February 27, 2026
सैन्य शक्ति का विश्लेषण: कौन किस पर भारी?
जब हम युद्ध की बात करते हैं, तो दोनों देशों की ताकत की तुलना करना जरूरी हो जाता है।
| विशेषता | पाकिस्तान (Pakistan) | अफगानिस्तान (Taliban) |
| ग्लोबल रैंकिंग | दुनिया की टॉप 15 सेनाओं में | अनौपचारिक सैन्य बल |
| सक्रिय सैनिक | लगभग 6,50,000 | लगभग 1,70,000 – 2,00,000 |
| परमाणु हथियार | 170+ वारहेड्स (संपन्न) | शून्य |
| वायुसेना | 450+ फाइटर जेट (F-16, JF-17) | केवल कुछ चालू हेलीकॉप्टर |
| विशेषज्ञता | पारंपरिक युद्ध और मिसाइल तकनीक | गुरिल्ला वारफेयर और हिट-एंड-रन |
पाकिस्तान की ताकत:
पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है।
इसके पास आधुनिक वायुसेना, उन्नत रडार सिस्टम और लंबी दूरी की मिसाइलें हैं।
तकनीकी रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान से कहीं आगे है।
🚨 BIG BREAKING NEWS💥
This is a Pakistani military F-16, American-made, that Afghan defensive forces have shot down. pic.twitter.com/7qBAjv89rk
— Afghanistan Defense (@AFGDefense) February 27, 2026
अफगानिस्तान (तालिबान) की ताकत:
तालिबान के पास भले ही फाइटर जेट न हों, लेकिन उनके पास ‘गुरिल्ला युद्ध’ का वो अनुभव है जिसने अमेरिका जैसे महाशक्ति को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
तालिबान के लड़ाके ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों के मास्टर हैं।
उनके पास अमेरिका द्वारा छोड़े गए आधुनिक छोटे हथियार, हम्वी गाड़ियां और नाइट विजन उपकरण हैं, जो रात के अंधेरे में जंग लड़ने में उन्हें माहिर बनाते हैं।
शुरू हुआ ‘ओपन वॉर’
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयानों से साफ है कि पाकिस्तान अब “नरम रुख” अपनाने के मूड में नहीं है।
वहीं, पाक पीएम शहबाज शरीफ ने भी सेना को खुली छूट दे दी है।
BREAKING
Pakistan’s Minister of Defense says that Pakistan is in an “open war” with Afghanistan.
Asif adds that Pakistan’s “cup of patience” has “overflowed.”
Pakistan has repeatedly accused India of backing the Baloch Liberation Army (BLA) and the Tehrik-e-Taliban Pakistan… pic.twitter.com/DMfK1GKivk
— Yashar Ali 🐘 (@yashar) February 27, 2026
दूसरी तरफ, तालिबान के सैन्य प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने खुद कमान संभाल ली है।
जानकारों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे:
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क्षेत्रीय अस्थिरता: भारत, ईरान और चीन जैसे पड़ोसी देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
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शरणार्थी संकट: युद्ध की स्थिति में लाखों लोग सीमा पार कर भागेंगे, जिससे मानवीय संकट पैदा होगा।
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आर्थिक तबाही: पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक कंगाली की कगार पर है; युद्ध उसे पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।
Pakistan declares ‘open war’ after Afghanistan attack, launches Operation ‘Ghazab Lil Haq’: What we know so far
– Pakistan claims precision strikes on Taliban military infrastructure in Kabul, Kandahar, Paktia
– Taliban retaliates, claims to have captured 15 Pakistani military… pic.twitter.com/rmpJ00VdlN— NDTV (@ndtv) February 27, 2026
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की यह जंग सिर्फ सीमा का विवाद नहीं है, बल्कि भरोसे की कमी और आतंकवाद के मुद्दे पर उपजा आक्रोश है।
पाकिस्तान को लगता है कि जिस तालिबान को उसने पाल-पोसकर बड़ा किया, वही अब उसके लिए भस्मासुर बन गया है।
वहीं, तालिबान अपनी नई मिली ताकत और संप्रभुता को लेकर किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो डुरंड लाइन की यह चिंगारी पूरे दक्षिण एशिया को अपनी चपेट में ले सकती है।


