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बड़बोलेपन ने फिर कराई “पाकिस्तान” की बेइज्जती: इजरायल की एक ‘घुड़की’ और पाक मंत्री ने डिलीट किया पोस्ट!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Pakistan Defense Minister on Israel: पाकिस्तान के हुक्मरानों की पुरानी आदत रही है कि वे अक्सर बिना सोचे-समझे ऐसे बयान दे देते हैं, जिससे देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

ताज़ा मामला पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से जुड़ा है।

ख्वाजा आसिफ ने इजरायल के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी की, लेकिन जब इजरायल ने अपनी आंखें दिखाईं, तो उन्हें तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा और अपनी पोस्ट डिलीट करनी पड़ी।

क्या था ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान?

दरअसल, शनिवार को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण शांति वार्ता (सीजफायर टॉक्स) होने वाली है।

इस वार्ता में पाकिस्तान एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन इस बैठक से पहले ही रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपना आपा खो दिया।

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उन्होंने इजरायल को ‘कैंसर’ करार देते हुए लिखा कि “इजरायल मानवता के लिए एक धब्बा और बुराई का प्रतीक है।

मेरी दुआ है कि जिन लोगों ने इस देश को बनाया, वे नरक में जलें।”

उन्होंने इजरायल पर गाजा, ईरान और अब लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया।

उन्होंने आगे लिखा कि एक तरफ शांति की बातें हो रही हैं और दूसरी तरफ इजरायल निर्दोषों का खून बहा रहा है।

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इजरायल का सख्त रुख और पाकिस्तान का सरेंडर

ख्वाजा आसिफ की इस पोस्ट ने इजरायल को आगबबूला कर दिया।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस बयान को ‘अस्वीकार्य’ करार दिया।

इजरायल की ओर से स्पष्ट कहा गया कि जो देश खुद को शांति वार्ता का मध्यस्थ बता रहा है, उसके मंत्री द्वारा किसी देश को ‘मिटाने’ या ‘खत्म करने’ जैसी भाषा का इस्तेमाल करना उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री गिदोन सार की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तानी गलियारों में हड़कंप मच गया।

दबाव इतना बढ़ा कि ख्वाजा आसिफ को शुक्रवार दोपहर अपनी पोस्ट डिलीट करनी पड़ी।

जानकारों का मानना है कि यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा ‘डिप्लोमैटिक सरेंडर’ है।

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मध्यस्थता की साख पर लगा बट्टा

पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है और दुनिया के सामने अपनी छवि सुधारने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टीम इस वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच रही है।

ऐसे नाजुक वक्त में रक्षा मंत्री का ऐसा बयान देना न केवल बचकाना था, बल्कि इसने पाकिस्तान की निष्पक्षता को भी संदिग्ध बना दिया है।

भारत में इजरायली राजदूत ने तो पहले ही कह दिया था कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

ईरान का रुख: क्या बेनतीजा रहेगी वार्ता?

इस विवाद के बीच ईरान की ओर से आई खबरों ने पाकिस्तान की चिंता और बढ़ा दी है।

ईरानी मीडिया (फार्स न्यूज एजेंसी) के मुताबिक, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में पूरी तरह से युद्धविराम (Ceasefire) लागू नहीं हो जाता, वह किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा।

हालांकि अमेरिकी मीडिया का दावा था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है, लेकिन ईरानी पक्ष ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही अमेरिका-ईरान सीजफायर को लेकर गलत जानकारी फैलाने के कारण वैश्विक स्तर पर आलोचना झेल चुके हैं।

अब उनके रक्षा मंत्री की इस हरकत ने पाकिस्तान की रही-सही साख भी मिट्टी में मिला दी है।

सवाल यह उठता है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में शांति चाहता है या वह केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की बयानबाजी का सहारा ले रहा है?

फिलहाल, ख्वाजा आसिफ का यह ‘यू-टर्न’ पाकिस्तान की कमजोर कूटनीति का जीता-जागता उदाहरण बन गया है

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