Pakistan is liar: इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कभी-कभी एक गलत बयान पूरे देश की साख दांव पर लगा देता है।
ऐसा ही कुछ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुआ है।
पाकिस्तान, जो पिछले कुछ दिनों से खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक ‘बड़ा मध्यस्थ’ (Mediator) साबित करने की कोशिश कर रहा था, उसे वाशिंगटन से तगड़ा झटका लगा है।
मुद्दा है ईरान और अमेरिका के बीच हुआ अस्थायी सीजफायर (युद्धविराम), जिसे लेकर दावों और प्रति-दावों का दौर शुरू हो गया है।

शहबाज शरीफ का वो दावा, जिससे मचा हड़कंप
मंगलवार को पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद उत्साहजनक पोस्ट लिखी।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता रंग लाई है और अमेरिका व ईरान ‘हर जगह’ तत्काल युद्धविराम के लिए राजी हो गए हैं।

शरीफ ने विशेष रूप से ‘लेबनान’ का नाम लिया, जहाँ इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भीषण जंग चल रही है।
उन्होंने इसे पाकिस्तान की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया और कहा कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

अमेरिका ने कैसे उतारी ‘पाकिस्तान की हेकड़ी’?
शहबाज शरीफ के इस बयान के चंद घंटों बाद ही अमेरिका की ओर से करारा जवाब आया. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हंगरी के बुडापेस्ट में मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया कि पाकिस्तान का दावा हकीकत से कोसों दूर है।
वेंस ने कहा, “यह शायद एक गलतफहमी (legitimate misunderstanding) का नतीजा है. ईरान को लगा कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल है, लेकिन हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया.”

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीजफायर का दायरा केवल ईरान और अमेरिका के सहयोगियों (इजरायल और खाड़ी देशों) तक सीमित है, इसमें लेबनान की जंग शामिल नहीं है।
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लेबनान का पेच: जहाँ फंस गया पाकिस्तान
इस पूरे विवाद की जड़ लेबनान है. इजरायल लगातार लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा है.
पाकिस्तान चाहता था कि इस सीजफायर के जरिए लेबनान में भी शांति हो जाए ताकि वह मुस्लिम जगत में ‘हीरो’ बन सके।
लेकिन अमेरिका और इजरायल ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उनकी कार्रवाई सीजफायर का हिस्सा नहीं है।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिए हैं कि वे लेबनान में अपनी सैन्य बढ़त को कम नहीं होने देंगे।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ दलाल
जैसे ही यह खबरें सामने आई। सोशल मीडिया पर दुनिया भर के लोगों, खासकर ईरान के नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा।
लोगों ने पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई और उसे दलाल टैग भी दिया।





ईरान का गुस्सा और होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी
अमेरिका के इस यू-टर्न (जैसा कि ईरान इसे देख रहा है) से तेहरान भड़क गया है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शहबाज शरीफ के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए अमेरिका पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
ईरान का कहना है कि अगर लेबनान में हमले नहीं रुके, तो यह सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा।

नतीजतन, ईरान ने फिर से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी दी है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा मानी जाती है।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने बातचीत शुरू होने से पहले ही तीन मुख्य शर्तों को तोड़ दिया है, जिसमें लेबनान में शांति और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार शामिल थे।

पाकिस्तान की साख पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि शहबाज शरीफ ने घरेलू राजनीति में वाहवाही लूटने के चक्कर में बिना पुष्टि किए इतना बड़ा बयान दे दिया.
अब स्थिति यह है कि:
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ईरान को लग रहा है कि उसे पाकिस्तान के जरिए गुमराह किया गया।
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अमेरिका ने पाकिस्तान को गंभीरता से लेना बंद कर दिया है।
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इजरायल ने लेबनान में हमले और तेज कर दिए हैं।

आगे क्या होगा?
10 अप्रैल को इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता अब संदेह के घेरे में है।
अगर अमेरिका अपने स्टैंड पर कायम रहता है और इजरायल लेबनान में बमबारी जारी रखता है, तो यह 15 दिनों का अस्थायी सीजफायर शुरू होने से पहले ही दम तोड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक ‘अपरिपक्व’ खिलाड़ी के रूप में पेश कर दिया है।
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