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सियासत में संस्कार: जब शपथ ग्रहण के मंच पर PM मोदी ने 98 साल के इस बुजुर्ग के आगे झुकाया सिर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Who is Makhanlal Sarkar: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में शनिवार, 9 मई 2026 को आयोजित भव्य समारोह में जब शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो पूरा मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।

लेकिन इस सियासी हलचल और जीत के शोर के बीच एक ऐसा पल आया, जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों और सोशल मीडिया पर वीडियो देख रहे लाखों भारतीयों का दिल जीत लिया।

यह पल था—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक बुजुर्ग कार्यकर्ता के पैर छूना।

कौन हैं माखनलाल सरकार?

मंच पर जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे, उनकी नजर अग्रिम पंक्ति में बैठे एक 98 साल के बुजुर्ग पर पड़ी।

यह कोई और नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल भाजपा के सबसे पुराने और समर्पित सिपाही माखनलाल सरकार थे।

पीएम मोदी सीधे उनके पास गए, उन्हें सम्मान के साथ शॉल ओढ़ाया और फिर झुककर उनके पैर छुए।

माखनलाल सरकार केवल एक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि भाजपा और उसके वैचारिक पूर्वज ‘भारतीय जनसंघ’ के जीवंत इतिहास हैं।

वे उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिन्होंने देश की आजादी के बाद राष्ट्रवादी आंदोलन की नींव रखी थी।

1952 का आंदोलन और गिरफ्तारी

माखनलाल सरकार का नाता भाजपा की विचारधारा से तब से है, जब पार्टी का जन्म भी नहीं हुआ था।

साल 1952 में, जब भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा देकर कश्मीर आंदोलन शुरू किया था, तब माखनलाल उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।

उस समय कश्मीर में तिरंगा फहराने की कोशिश करने पर डॉ. मुखर्जी के साथ माखनलाल सरकार को भी गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने वह दौर देखा है जब बंगाल में भाजपा का नाम लेने वाला भी कोई नहीं था।

लाठियां खाने और जेल जाने के बावजूद उन्होंने कभी संगठन का साथ नहीं छोड़ा।

शपथ ग्रहण समारोह की झलकियां

बंगाल में भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित शपथ ग्रहण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।

सुवेंदु अधिकारी के साथ-साथ दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल जैसे दिग्गज नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

इसी कार्यक्रम के दौरान एक और पुराने कार्यकर्ता तपन मलिक का भी जिक्र हुआ, जो 1980 से यानी पिछले 40 से ज्यादा सालों से पार्टी के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं।

तपन मलिक जैसे कार्यकर्ताओं की आंखों में जीत के आंसू साफ बयां कर रहे थे कि उन्होंने इस दिन को देखने के लिए दशकों तक संघर्ष किया है।

सांस्कृतिक संदेश और संस्कार

प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम केवल एक राजनीतिक शिष्टाचार नहीं था, बल्कि एक गहरा संदेश था।

उन्होंने दिखाया कि भाजपा अपनी जड़ों और उन बुजुर्गों को कभी नहीं भूलती जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय करने में अपना जीवन खपा दिया।

98 साल की उम्र में भी माखनलाल सरकार का जोश वैसा ही था, जैसा 1952 के कश्मीर आंदोलन में रहा होगा।

पश्चिम बंगाल की धरती पर यह दृश्य भाजपा की नई पारी की शुरुआत के साथ-साथ पुराने संघर्षों को दिया गया एक भावपूर्ण सम्मान था।

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