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प्रतिबंध के बावजूद जंतर-मंतर पर जबरन घुसने वाले CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की SEM कोर्ट से मिली जमानत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Saurav Das Ashutosh Ranka bail: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को आखिरकार 9 दिन की कानूनी प्रक्रिया के बाद दिल्ली की स्पेशल कोर्ट (SEM) से जमानत मिल गई है।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दोनों नेताओं की 3 दिन की और कस्टडी मांगी थी, लेकिन कोर्ट से बेल मिलने के बाद दोनों नेताओं को बड़ी राहत मिली है।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 12 और 13 अक्टूबर का है। दरअसल, दिल्ली सरकार ने जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी थी।

इसके बावजूद, CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को तिरंगा झंडा लेकर जंतर-मंतर पर पहुंच गए।

पुलिस का कहना था कि इन नेताओं ने शांति भंग करने से जुड़े नियमों और पहले भरे गए बॉन्ड का उल्लंघन किया है।

इसी आरोप के तहत दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था और शुरुआती तौर पर 5 दिन के लिए जेल भेजा गया था।

इसके बाद 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत 2 दिन और बढ़ा दी गई थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा और रिवीजन पिटीशन का पेंच क्या था?

इस मामले में गिरफ्तारी के तुरंत बाद नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

उन्होंने अनुच्छेद 226 (Article 226) के तहत सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हालांकि, बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की अदालत ने इस मामले में तुरंत दखल देने से साफ इनकार कर दिया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कड़ा सवाल पूछा कि जब किसी निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए कानून में ‘रिवीजन पिटीशन’ (Revision Petition) का सीधा और स्पष्ट रास्ता मौजूद है, तो आप लोग सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट क्यों आ गए?

अदालत ने समझाया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले निचली अदालत के फैसले के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल की जानी चाहिए। इसके बाद, वकीलों ने अपनी याचिका वापस ले ली।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की 4 बड़ी टिप्पणियां

जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की अदालत में हुई इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई अहम और तीखी टिप्पणियां कीं:

* बॉन्ड तोड़ने पर सवाल:

कोर्ट ने पूछा कि जब दोनों नेताओं ने पहले ही शांति बनाए रखने का एक औपचारिक बॉन्ड भरा था, और उसके बाद दोबारा ऐसी घटना को अंजाम दिया गया, तो अधिकारियों द्वारा सख्त नियमों के तहत की गई कार्रवाई को गलत कैसे ठहराया जा सकता है?

 * शांति भंग होने का खतरा:

अदालत ने कहा कि जंतर-मंतर पर बैरिकेड तोड़कर जाने से माहौल बिगड़ने का खतरा था। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना ही था, तो पुलिस से विधिवत अनुमति ली जा सकती थी।

 * “ये जेन-जी नहीं हैं”:

सुनवाई के दौरान जब वकीलों ने उनकी उम्र (एक की 27 और दूसरे की 31 साल) बताई, तो कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये जेन-जी (Gen-Z) नहीं हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने उनके प्रोफेशन और संगठन के उद्देश्यों के बारे में भी जानकारी मांगी।

 * प्रतिबंधित जगह पर जाने की जिद क्यों:

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर रोक थी और वह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तो वहां दोबारा जाने की जिद क्यों की गई?

इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सौरव और आशुतोष की तरफ से एडवोकेट अभिक चिमनी ने पैरवी की, जबकि दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और सीजीएससी आशीष दीक्षित अदालत में पेश हुए।

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए थे।

अब मामले की जांच क्राइम ब्रांच के पास

दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े जंतर-मंतर वाले केस को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है।

इससे पहले कनॉट प्लेस थाने में दर्ज केस भी क्राइम ब्रांच को सौंपा जा चुका है।

अब दोनों मामलों की एक साथ गहराई से जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जाएगी।

नेहा बोरा की याचिका पर भी नजर

इस बीच, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा दायर की गई याचिका पर भी दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।

नेहा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया था।

उनके वकीलों के अनुरोध पर इस मामले की अगली सुनवाई तय की गई है, जिसमें पुलिस की कार्रवाई को लेकर कोर्ट आगे का निर्देश देगा।

CJP का पुराना प्रदर्शन

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने इससे पहले 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर करीब 36 दिनों तक लंबा प्रदर्शन किया था।

उस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे और संसद मार्च निकाला गया था, जो प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ था।

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