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राघव चड्ढा-आप विवाद में शंकराचार्य की एंट्री: बोले- ‘बढ़ता कद देख असुरक्षित हो रहे पार्टी लीडर’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Shankaracharya on Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रहा अंदरूनी कलह अब सड़कों और सोशल मीडिया से निकलकर आध्यात्मिक गलियारों तक पहुँच गया है।

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी के बीच बढ़ती दूरियों पर अब जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान दिया है।

एक हालिया पॉडकास्ट में शंकराचार्य ने राघव चड्ढा का खुलकर समर्थन किया और इशारों-इशारों में अरविंद केजरीवाल या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा।

 

आईए जानते हैं पूरा मामला…

विवाद की शुरुआत: राघव चड्ढा और ‘आप’ में दरार

आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां तब स्पष्ट हुईं जब 2 अप्रैल को पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर’ (उपनेता) के पद से हटा दिया।

उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई।

इतना ही नहीं, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर यह तक कह दिया कि अब राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।

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यह एक बड़ा कदम था, जिसने संकेत दिया कि राघव और अरविंद केजरीवाल के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।

शंकराचार्य की एंट्री: राघव को बताया ‘देश का एसेट’

इस खींचतान के बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक पॉडकास्ट सामने आया है।

उन्होंने राघव चड्ढा का पुरजोर समर्थन करते हुए कई बड़ी बातें कहीं:

  1. देश की संपत्ति (Asset):

शंकराचार्य ने कहा कि राघव चड्ढा देश के लिए एक ‘एसेट’ यानी कीमती संपत्ति हैं।

उन्होंने राघव की शिष्टता, उनके बोलने के लहजे और तथ्यों के साथ बात रखने की कला की तारीफ की।

पार्टी अपना नुकसान कर रही है:

स्वामी जी का मानना है कि राघव को किनारे करके आम आदमी पार्टी अपना ही नुकसान कर रही है।

उन्होंने कहा कि राघव का कद सिर्फ पार्टी की वजह से नहीं, बल्कि उनके अपने काम और जनता के बीच उनकी छवि की वजह से बढ़ा है।

जनता की आवाज:

उन्होंने कहा कि राघव ने संसद में आम आदमी के मुद्दे उठाए, जिसे जनता ने खूब पसंद किया।

अगर पार्टी उन्हें संसद में बोलने से रोकेगी, तो जनता उन्हें किसी और रास्ते से अपनी आवाज उठाने के लिए चुन लेगी।

इसके अलावा शंकराचार्य ने बताया कि जब राघव के घर बेटे का जन्म हुआ, तो उन्होंने आशीर्वाद के लिए फोन किया था।

राघव ने भी इस पॉडकास्ट के अंश शेयर करते हुए शंकराचार्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

AAP का पक्ष: “राघव पार्टी लाइन से भटक गए”

जब राघव को पद से हटाया गया और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की, तो आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता (जैसे सौरभ भारद्वाज, आतिशी और भगवंत मान) उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर सामने आए।

पार्टी के आरोपों के मुख्य बिंदु ये हैं:

संकट के समय गैर-मौजूदगी:

नेताओं का कहना है कि जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब राघव चड्ढा देश में नहीं थे।

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उन्होंने ‘आंखों के ऑपरेशन’ का हवाला देकर ब्रिटेन (UK) में लंबा समय बिताया, जिसे पार्टी ने ‘मैदान छोड़कर भागना’ माना।

मुद्दों पर मतभेद:

पार्टी का आरोप है कि राघव संसद में गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों या मोदी सरकार को घेरने के बजाय ‘समोसे के रेट’ जैसे छोटे विषय उठाते हैं।

पार्टी नेताओं ने यहाँ तक कहा कि राघव अब पीएम मोदी से डरने लगे हैं।

सोशल मीडिया से सफाई:

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पीएम मोदी और भाजपा की आलोचना करने वाले पुराने पोस्ट डिलीट कर दिए हैं, जिससे उनके भाजपा के प्रति सॉफ्ट होने के संकेत मिलते हैं।

किताब के जरिए तंज: ‘बॉस से ज्यादा चमकने की सजा’

विवाद के बीच राघव चड्ढा ने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वे रॉबर्ट ग्रीन की मशहूर किताब The 48 Laws of Power’ पढ़ रहे थे।

उन्होंने जिस पन्ने की फोटो डाली, उसमें लिखा था— “कभी भी अपने बॉस से ज्यादा चमकने की कोशिश न करें।”

इस पोस्ट को सीधा अरविंद केजरीवाल पर तंज माना गया।

राजनीति में अक्सर यह देखा जाता है कि जब कोई जूनियर नेता अपने सीनियर से ज्यादा लोकप्रिय होने लगता है, तो उसे असुरक्षा के चलते किनारे लगा दिया जाता है।

राघव ने इसी ओर इशारा किया कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता ही शायद उनकी मुसीबत बन गई।

राघव चड्ढा का पलटवार: “घायल हूं, इसलिए घातक हूं”

राघव चड्ढा ने चुप रहने के बजाय वीडियो संदेशों के जरिए अपनी बात रखी। उनके जवाब काफी शायराना और चेतावनी भरे थे:

खामोशी को हार न समझें: राघव ने कहा कि उन्हें चुप कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे हारे नहीं हैं। उन्होंने खुद की तुलना उस ‘दरिया’ से की जो वक्त आने पर ‘सैलाब’ बन सकता है।

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स्क्रिप्टेड कैंपेन: उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पार्टी के भीतर से ही एक सोची-समझी साजिश (Scripted Campaign) चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वे संसद में गाली-गलौज करने नहीं, बल्कि पंजाब और देश के हक की बात करने गए थे।

पंजाब से प्यार: अपनी वफादारी पर उठ रहे सवालों के जवाब में उन्होंने वीडियो साझा कर दिखाया कि उन्होंने संसद में पंजाब के किसानों और पानी के मुद्दों को कितनी मजबूती से उठाया है।

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फिलहाल, राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच की खाई गहरी होती दिख रही है।

एक तरफ पार्टी उन्हें ‘अनुशासनहीन’ और ‘डरपोक’ बता रही है, तो दूसरी तरफ शंकराचार्य जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व उन्हें भविष्य का बड़ा नेता करार दे रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राघव पार्टी के भीतर अपनी जगह वापस पाते हैं या फिर वे अपनी एक अलग राजनीतिक राह चुनते हैं।

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