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अब ब्लिंकिट-डीमार्ट से नहीं मिलेगी 5 किलो से ज्यादा चीनी, सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए इंपोर्ट को दी मंजूरी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sugar Purchase Limit: देश में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही आम जनता की रसोई के बजट को बड़ा झटका लगा है।

रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले बाजार में चीनी की किल्लत और कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।

हालात यह हैं कि पिछले एक महीने के भीतर चीनी के दाम लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।

कीमतों में अचानक आई इस तेजी और बाजार में कालाबाजारी रोकने के लिए ब्लिंकिट, जेप्टो जैसे क्विक-कॉमर्स ऐप्स के साथ-साथ डीमार्ट और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े सुपरमार्केट्स ने चीनी की बिक्री पर लिमिट (कैपिंग) लगा दी है।

अब कोई भी ग्राहक एक बार में 2 से 5 किलो से ज्यादा चीनी नहीं खरीद पाएगा।

30 दिनों में कैसे बिगड़ा चीनी का बजट?

उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 65.05 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

ध्यान देने वाली बात यह है कि महज 30 दिन पहले यानी 26 जुलाई को यही चीनी 48 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। यानी सिर्फ एक महीने में चीनी 17 रुपये प्रति किलो (लगभग 35.5%) महंगी हो चुकी है।

केवल रिटेल ही नहीं, बल्कि थोक बाजार (Wholesale Market) में भी चीनी के दाम 45 रुपये से बढ़कर 60.36 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने त्योहारों से पहले आम परिवारों और मिठाई विक्रेताओं की चिंता बढ़ा दी है।

कीमतें बढ़ने और सप्लाई घटने की 3 मुख्य वजहें:

* उत्पादन में गिरावट का अनुमान: इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद देश का कुल चीनी उत्पादन घटकर करीब 279 लाख टन रहने की आशंका है।

* खपत के मुकाबले कम स्टॉक: भारत में हर साल लगभग 280 लाख टन चीनी की घरेलू खपत होती है। हालांकि हमारे पास 50 लाख टन का शुरुआती स्टॉक था, लेकिन नया उत्पादन कम रहने के अनुमान से बाजार पर सप्लाई का भारी दबाव आ गया है।

* कम होता क्लोजिंग स्टॉक: ISMA की मानें तो सितंबर के अंत तक देश में चीनी का बचा हुआ स्टॉक (क्लोजिंग स्टॉक) घटकर सिर्फ 35 लाख टन रह जाएगा, जो पिछले कई वर्षों की तुलना में बेहद कम है।

राहत देने के लिए सरकार ने उठाए 5 सख्त कदम

बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने, कीमतें काबू में करने और जमाखोरी को पूरी तरह रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत कड़े फैसले लिए हैं:

* 10 लाख टन चीनी का आयात: सरकार ने 10 लाख टन चीनी इंपोर्ट करने की मंजूरी दी है।

 * टैक्स फ्री इंपोर्ट: आयात को बढ़ावा देने के लिए चीनी के इंपोर्ट को पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया गया है।

 * एक्सपोर्ट पर बैन extended: देश से बाहर चीनी भेजने (निर्यात) पर 30 सितंबर 2026 तक पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

 * स्टॉक की समय सीमा लागू: 10 मीट्रिक टन से ज्यादा कारोबार करने वाले डीलर्स अब 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक नहीं रख सकते।

 * डीलरों के लिए 400 टन की लिमिट: 30 नवंबर तक डीलरों के लिए अधिकतम 400 टन की स्टॉक लिमिट तय की गई है और सभी राज्यों को बाजारों में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

त्योहारों के इस सीजन में सरकार के इन कदमों से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में चीनी की कीमतें दोबारा स्थिर हो सकेंगी।

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