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संसद मार्ग पर हंगामा: स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत के खिलाफ हिंदू संगठन सड़कों पर उतरें

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Swatantra Bhardwaj detained: दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट करने के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत के विरोध में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

इस विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई दक्षिणपंथी कार्यकर्ता दक्ष चौधरी कर रहे हैं।

बुलंदशहर से हिरासत में लिए गए स्वतंत्र भारद्वाज

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया।

हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले स्वतंत्र का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने मीडिया से कहा था, “मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पूरा विपक्ष एकजुट हो जाए, तब भी मेरा बाल बांका नहीं कर सकता।”

स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग को लेकर CJP और अन्य कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर 3 घंटे तक धरना दिया था।

पुलिस के सख्त कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही धरना खत्म हुआ था, जिसके कुछ देर बाद पुलिस ने स्वतंत्र को हिरासत में ले लिया।

दक्ष चौधरी का आरोप: ‘दबाव में जोड़ी गईं सख्त धाराएं’

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दक्ष चौधरी का कहना है कि पुलिस ने दबाव में आकर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की है।

दक्ष ने दावा किया कि स्वतंत्र के ऊपर दर्ज की गई SC/ST एक्ट, धारा 307 (हत्या का प्रयास) और पॉक्सो एक्ट जैसी धाराएं पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।

उनका कहना है कि पुलिस के शुरुआती रिकॉर्ड में संजय कुमार को किसी भी तरह की गंभीर चोट लगने की बात नहीं कही गई थी।

मामले से जुड़े तीनों पक्षों का क्या है कहना?

1. पीड़ित पक्ष (संजय कुमार और नीशू आजाद):

नीशू आजाद का आरोप है कि 23 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उनके पिता संजय कुमार का सिर फोड़ दिया गया था।

घटना के डेढ़ महीने बाद भी जब पुलिस ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया, तब उन्हें दोबारा प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

2. आरोपी (स्वतंत्र भारद्वाज):

स्वतंत्र ने शुरुआत में एक वायरल पॉडकास्ट में दावा किया था कि उन्होंने संजय कुमार के सिर पर वार किया था और उन्हें 60 टांके आए थे।

हालांकि, बाद में वे अपने बयान से पलट गए और इसे आत्मरक्षा (सेल्फ-डिफेंस) बताया।

स्वतंत्र का कहना है कि 10-15 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया था और जान बचाने के लिए उन्हें कदम उठाना पड़ा।

3. दिल्ली पुलिस का पक्ष:

दिल्ली पुलिस के अनुसार, 23 जून की झड़प में संजय कुमार के सिर पर कड़ा (ब्रेसलेट) लगने से चोट आई थी।

RML अस्पताल की मेडिको-लीगल जांच (MLC) में चोट को ‘साधारण’ बताया गया है।

पुलिस ने खोपड़ी फटने या फ्रैक्चर की बात से साफ इनकार किया है।

पहले स्वतंत्र को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था, लेकिन CJP के प्रदर्शन और नए तथ्यों के आधार पर उन्हें फिर से हिरासत में लेकर मामले में नई धाराएं जोड़ी गई हैं।

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