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ममता को बड़ा झटका: TMC के 17 बागी सांसद बीजेपी में होंगे शामिल, यूसुफ पठान समेत 3 देंगे बाहर से समर्थन

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

TMC rebel MPs join BJP: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है।

विधानसभा चुनाव में मिली हार के झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची हलचल अब साफ नजर आने लगी है।

पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी से अलग हुए 20 बागी सांसदों में से 17 सांसद जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की तैयारी में हैं।

दुर्गा पूजा से पहले बड़ा सियासी उलटफेर

खबर है कि यह फेरबदल अक्टूबर में आने वाली दुर्गा पूजा के आसपास पूरा हो सकता है।

 

कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कोलकाता में इस बात की पुष्टि की है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि 17 सांसद एक साथ बीजेपी की सदस्यता लेंगे।

चूंकि अलग हुए कुल सांसदों की संख्या के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य एक साथ यह कदम उठा रहे हैं, इसलिए उन पर संविधान का दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा और उनकी संसद सदस्यता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

ममता का साथ क्यों छूटा?

बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के अंदर असंतोष की लहर देखने को मिली थी।

इसी के चलते 14 जून को 20 सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर अपना अलग रास्ता चुन लिया था।

शुरुआत में इन नेताओं ने त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी NCPI में विलय किया था और केंद्र में एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था।

लेकिन अब यह गुट सीधे बीजेपी में शामिल होकर अपनी आगे की राजनीतिक राह तय करने जा रहा है।

यूसुफ पठान समेत 3 सांसद क्यों नहीं होंगे बीजेपी में शामिल?

इन 20 बागी सांसदों में से 3 सांसद—पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान (बहरामपुर), खलीलुर रहमान (जांगीपुर) और अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद)—सीधे तौर पर बीजेपी में शामिल नहीं होंगे।

इसके पीछे का मुख्य कारण उनके संसदीय क्षेत्रों का सियासी गणित है।

पश्चिम बंगाल में लगभग 30% आबादी मुस्लिम समुदाय की है, और इन तीनों नेताओं के क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या काफी अहम है।

बीजेपी में सीधे शामिल होने पर स्थानीय स्तर पर वोट बैंक के नुकसान का डर है।

इसी वजह से इन तीनों सांसदों ने पार्टी की सदस्यता लिए बिना बाहर से एनडीए (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है।

दल-बदल कानून से कैसे बचेंगे ये 17 सांसद?

भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के मुताबिक, अगर कोई सांसद अपनी मर्जी से पार्टी छोड़ता है या पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है।

लेकिन इस कानून में एक खास छूट दी गई है—यदि किसी दल के कुल विधायकों या सांसदों में से दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता।

यही वजह है कि 17 सांसद एक साथ बीजेपी में शामिल होकर अपनी सांसदी बचाए रखने में कामयाब रहेंगे।

TMC में बचे कितने सांसद और विधायक?

इस टूट के बाद तृणमूल कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर नजर आ रही है:

* लोकसभा: TMC के पास कुल 28 सांसद थे, जिनमें से 20 बागी हो गए। अब ममता बनर्जी के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं।

 * राज्यसभा: 13 में से 2 सांसदों के इस्तीफे के बाद अब केवल 11 सांसद बचे हैं।

 * विधानसभा: पार्टी ने 80 सीटें जीती थीं, लेकिन 58 विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया है। इसके बाद ममता बनर्जी के पास अब केवल 22 विधायक बचे हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आया यह बड़ा बदलाव न सिर्फ ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि आने वाले दिनों में राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख देगा।

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