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7 दिन में भी ‘खड़े हनुमान’ को हिला नहीं पाई मशीनें, सोशल मीडिया पर रील्स वायरल; देश भर से उमड़ी भक्तों की भीड़

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ujjain Khade Hanuman Mandir: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में इन दिनों सड़क चौड़ीकरण और धार्मिक आस्था के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

शहर के प्रसिद्ध सती गेट के पास स्थित ‘खड़े हनुमान मंदिर’ की प्रतिमा को स्थानांतरित (शिफ्ट) करने को लेकर बीते छह दिनों से असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

एक तरफ जहां स्थानीय प्रशासन मंदिर के आसपास का अधिकांश हिस्सा ध्वस्त कर चुका है, वहीं मुख्य प्रतिमा को सुरक्षित हटाने की उसकी कोशिशें फिलहाल तकनीकी और सामाजिक अड़चनों के कारण थमती नजर आ रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया के दौर में एक नया मोड़ ले लिया है।

मंदिर और प्रतिमा से जुड़ी रील्स और वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु ‘खड़े हनुमान जी’ के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचने लगे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और तकनीकी उलझनें

उज्जैन में यातायात को सुगम बनाने और सड़कों के चौड़ीकरण के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा सती गेट के पास स्थित खड़े हनुमान मंदिर के आसपास के ढांचे को हटाने की प्रक्रिया 4 सितंबर को शुरू की गई थी।

करीब एक हफ्ते की कार्रवाई के दौरान मंदिर परिसर का काफी हिस्सा गिरा दिया गया है और वर्तमान में हनुमान जी की प्रतिमा को धूल-मिट्टी और धूप से बचाने के लिए एक टेंट (तिरपाल) के नीचे रखा गया है।

प्रारंभिक चरण में, मंदिर के मुख्य पुजारी महेश बैरागी और प्रबंधन समिति ने सशर्त रूप से प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की सहमति दी थी।

इसके बाद नगर निगम की टीमों ने प्रतिमा के इर्द-गिर्द का मलबा और प्लास्टर हटाना शुरू किया।

हालांकि, जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा, प्रतिमा की मूल संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका गहराने लगी, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से काम रोक दिया गया।

प्रतिमा की स्थिति और उसकी सुरक्षा को समझने के लिए इंदौर से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई।

विशेषज्ञों ने प्रतिमा के आधार और पीछे की जमीन की खुदाई करके प्रारंभिक मूल्यांकन किया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आधुनिक उपकरणों और एडवांस स्कैनिंग तकनीक के उपयोग की सिफारिश की गई।

इसी क्रम में, आईआईटी इंदौर (IIT Indore) की एक विशेष तकनीकी टीम ने मंदिर स्थल का दौरा कर भौतिक जांच की और वैज्ञानिक तरीके से यह समझने का प्रयास किया कि क्या प्रतिमा को बिना क्षति पहुंचाए हटाया जा सकता है या नहीं।

उमा भारती और साध्वी हर्षानंद का कड़ा रुख

मंदिर के ढांचे को गिराए जाने और प्रतिमा को हटाए जाने के प्रयासों की खबर जैसे ही फैली, मध्य प्रदेश के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई।

* पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की चिट्ठी:

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस संवेदनशील मामले में सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा।

अपने पत्र में उन्होंने भोपाल के कमलापति रोड चौड़ीकरण का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि जिस प्रकार भोपाल में रोड चौड़ी करते समय एक धार्मिक ढांचे (मस्जिद) को नुकसान पहुंचाए बिना सड़क का नक्शा बदलकर समाधान निकाला गया था, ठीक वैसा ही रास्ता उज्जैन के ‘खड़े हनुमान मंदिर’ के लिए भी अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने विकास के साथ-साथ आस्था के संरक्षण का संतुलन बनाने की वकालत की।

* साध्वी हर्षानंद गिरि का अल्टीमेटम:

दूसरी ओर, साध्वी हर्षानंद गिरि (हर्षा रिछारिया) खुद खड़े हनुमान मंदिर परिसर पहुंचीं। वहां उन्होंने प्रतिमा की पूजा-अर्चना की और प्रशासन की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जताया।

साध्वी ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को 2 दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांग की कि प्रशासनिक अधिकारी खुद मंदिर आकर बाबा से माफी मांगें और मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण का संकल्प लें।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे अनशन और बड़े पैमाने पर धरने-प्रदर्शन पर बैठेंगी।

साधु-संतों का नीलगंगा मॉडल अपनाने का सुझाव

महामुक्तेश्वरी धाम के पीठाधीश्वर पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी सहित उज्जैन के कई अन्य वरिष्ठ संतों ने भी इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।

संतों का स्पष्ट कहना है कि शहर में विकास कार्य जरूर होने चाहिए, लेकिन इसके लिए भगवान की सदियों पुरानी प्रतिमाओं को विस्थापित करना सही विकल्प नहीं है।

संतों ने प्रशासन को ध्यान दिलाया कि उज्जैन के ही नीलगंगा क्षेत्र में जब सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, तब भी कई प्राचीन धार्मिक ढांचों को हटाए बिना उनके आसपास से ही सड़क का रास्ता निकाल दिया गया था।

संतों की मांग है कि सती गेट पर भी इसी ‘नीलगंगा मॉडल’ का पालन करते हुए सड़क के डिजाइन में थोड़ा बदलाव किया जाए ताकि मंदिर भी अपनी जगह सुरक्षित रहे और सड़क चौड़ीकरण का काम भी प्रभावित न हो।

प्रशासन का दावा बनाम भक्तों के वीडियो सबूत

इस बढ़ते विवाद और सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ बन रहे माहौल के बीच उज्जैन जिला प्रशासन ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

प्रशासन का कहना है कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा उज्जैनवासियों और देश भर के श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है।

प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना और प्रतिमा की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक सूचना फैलाई जा रही है कि प्रशासन प्रतिमा को हटाने के कई असफल प्रयास कर चुका है।

प्रशासन के अनुसार, अभी तक प्रतिमा को किसी भी यांत्रिक (मशीन) या मानवीय तरीके से हटाने का कोई सीधा प्रयास किया ही नहीं गया है।

हालांकि, स्थानीय भक्तों और मंदिर से जुड़े लोगों ने प्रशासन के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

मंदिर समिति से जुड़े शैलू यादव और स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन जनता को गुमराह कर रहा है।

भक्तों का दावा है कि जब नगर निगम की टीमें पोकलेन और अन्य मशीनों के साथ मंदिर को तोड़ने और प्रतिमा के आसपास खुदाई करने पहुंची थीं, तब के सारे वीडियो एविडेंस (वीडियो साक्ष्य) उनके पास सुरक्षित हैं।

भक्तों का कहना है कि वे अधिकारियों के सामने इन सबूतों को पेश करने के लिए तैयार हैं और मांग कर रहे हैं कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रहने दिया जाए।

नगर निगम की तरफ से नए स्थान का प्रस्ताव

दूसरी तरफ, उज्जैन नगर निगम का कहना है कि उसने मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी।

निगम अधिकारियों के अनुसार, मंदिर प्रबंधन की पूर्व सहमति के आधार पर 2 सितंबर को ही एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया था।

इस पत्र के तहत वार्ड नंबर 20 में स्थित एक पुरानी पानी की टंकी को हटाकर खाली कराई गई 20.90 वर्गमीटर जमीन मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए आवंटित की गई है।

हालांकि, मौजूदा विवाद और श्रद्धालुओं के विरोध को देखते हुए इस नई जमीन पर मंदिर निर्माण का काम शुरू हो पाएगा या नहीं, इस पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर रील्स का ट्रेंड और दूर-दराज से पहुंचते श्रद्धालु

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस विवाद ने पूरे देश के लोगों का ध्यान उज्जैन की ओर खींचा है।

इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर ‘खड़े हनुमान मंदिर’ के वीडियो और रील्स तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।

फिलहाल, मंदिर परिसर में हर बीतते दिन के साथ श्रद्धालुओं और संतों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है।

एक तरफ जहां IIT इंदौर की तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उमा भारती के पत्र और साध्वी के अल्टीमेटम के बाद अब गेंद प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार के पाले में है।

देखने वाली बात होगी कि क्या प्रशासन सड़क का नक्शा बदलकर मंदिर को बचाने का रास्ता निकालता है या फिर तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर कोई नया बीच का रास्ता खोजा जाता है.

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